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केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय करते समय एक मानक परिवार का खर्च आधार माना जाता है. (प्रतीकात्मक फोटो)
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ी चर्चा इस समय ‘फैमिली यूनिट’ फॉर्मूला को लेकर है. कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सैलरी तय करने का आधार अब 3 सदस्यीय परिवार नहीं बल्कि 5 सदस्यीय परिवार होना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो वेतन तय करने की पूरी गणना बदल सकती है और बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है.
असल में यह बदलाव सिर्फ एक संख्या का नहीं है, बल्कि इससे फिटमेंट फैक्टर, न्यूनतम वेतन और कुल सैलरी स्ट्रक्चर तीनों पर असर पड़ सकता है.
केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी तय करते समय एक मानक परिवार का खर्च आधार माना जाता है.
अब तक यह 3 सदस्यीय परिवार पर आधारित रहा है:
लेकिन कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के समय में परिवार की जिम्मेदारी इससे कहीं ज्यादा होती है.
उनके मुताबिक परिवार में अक्सर शामिल होते हैं:
इसलिए 5 सदस्यीय परिवार को आधार मानना चाहिए.
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अगर वेतन गणना में फैमिली यूनिट 3 से बढ़कर 5 हो जाती है तो वेतन गणना में बड़ा बदलाव संभव है.
विशेषज्ञों के अनुसार:
7वें वेतन आयोग में सैलरी तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था. लेकिन 8वें वेतन आयोग में अगर फैमिली यूनिट बढ़ती है तो फिटमेंट फैक्टर भी बढ़ सकता है.
कुछ संभावित गणनाओं में:
एक उदाहरण से समझिए सैलरी का गणित
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹78,800 है.
₹78,800 × 1.76 = ₹1,38,688
₹1,38,688 ÷ 3 = ₹46,230 (प्रति यूनिट)
₹46,230 × 5 = ₹2,31,150
फिटमेंट लगभग 3.09 तक पहुंच सकता है.
इस स्थिति में सैलरी:
₹78,800 × 3.09 = ₹2,43,492 तक पहुंच सकती है.
यानी सैलरी में बड़ा बदलाव संभव है.
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अगर यह फॉर्मूला लागू हुआ तो विशेषज्ञों का अनुमान है कि केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक वेतन ₹18,000 से बढ़कर लगभग ₹54,000 तक पहुंच सकता है.
हालांकि यह सिर्फ संभावित गणना है. अंतिम फैसला वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि मौजूदा वेतन गणना आज की जीवनशैली और खर्चों के अनुरूप नहीं है.
उनके मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में:
इसलिए वेतन तय करने का आधार भी बदला जाना चाहिए.
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8वां वेतन आयोग करीब 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन को प्रभावित करेगा.
सरकार ने इसके लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस तय कर दिए हैं और आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया गया है.
इस दौरान कर्मचारी संगठन और अन्य हितधारक अपने सुझाव भी दे रहे हैं.
फैमिली यूनिट 5 करने की मांग अभी कर्मचारी संगठनों की तरफ से प्रस्ताव के रूप में रखी गई है. सरकार या वेतन आयोग की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है.
लेकिन अगर यह प्रस्ताव स्वीकार किया गया तो:
तीनों में बड़ा बदलाव संभव है.
Q1. 8वां वेतन आयोग कब लागू हो सकता है?
A. सरकार ने 8वें वेतन आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है. इसकी सिफारिशें आने में आमतौर पर 15-18 महीने का समय लगता है, इसलिए इसे 2027 के आसपास लागू किए जाने की संभावना मानी जा रही है. हालांकि इसे 1 जनवरी 2026 से प्रभावी किया जा सकता है.
Q2. फैमिली यूनिट का मतलब क्या होता है?
A. वेतन आयोग न्यूनतम सैलरी तय करते समय एक मानक परिवार के खर्च को आधार मानता है. इसी मानक परिवार को फैमिली यूनिट कहा जाता है.
Q3. अभी वेतन गणना में कितनी फैमिली यूनिट मानी जाती है?
A. अभी तक वेतन गणना के लिए 3 सदस्यीय परिवार को आधार माना जाता रहा है—जिसमें कर्मचारी, जीवनसाथी और एक बच्चा शामिल होता है.
Q4. फैमिली यूनिट 5 होने की मांग क्यों की जा रही है?
A. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के समय में परिवार की जिम्मेदारियां बढ़ गई हैं. माता-पिता और दो बच्चों को जोड़कर 5 सदस्यीय परिवार को आधार मानने की मांग की जा रही है.
Q5. क्या फैमिली यूनिट बढ़ने से सैलरी बढ़ेगी?
A. अगर वेतन गणना में फैमिली यूनिट बढ़ाई जाती है तो न्यूनतम वेतन तय करने का आधार बढ़ सकता है, जिससे कुल सैलरी और फिटमेंट फैक्टर पर असर पड़ सकता है.
Q6. क्या सरकार ने फैमिली यूनिट बढ़ाने का फैसला कर लिया है?
A. नहीं. फिलहाल यह कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है. अंतिम फैसला 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा.