&format=webp&quality=medium)
सरकार ने हाल ही में संसद में साफ कर दिया था- किसी तरह का “मर्जर” नहीं होगा.
केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा सवाल हमेशा यही होता है- अगले वेतन आयोग में आखिर सैलरी कैसे बदलेगी? DA कितना मिलेगा? और क्या इसे बेसिक में मर्ज कर दिया जाएगा?
बीते कुछ हफ्तों से DA मर्जर की चर्चा तेज थी, लेकिन सरकार ने हाल ही में संसद में साफ कर दिया- किसी तरह का “मर्जर” नहीं होगा.
लेकिन यह सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि एक सच यह भी है- DA फिर भी शून्य हो सकता है. और यह पूरी तरह 7वें वेतन आयोग की प्रक्रिया जैसा ही होगा.
अब सवाल यह है कि अगर DA मर्ज नहीं होगा, तो शून्य कैसे होगा? सैलरी का नया स्ट्रक्चर कैसे बनेगा? बेसिक कैसे बढ़ेगी? और कर्मचारियों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
आइए इसे एकदम आसान भाषा में समझते हैं- पूरे स्टेप-by-स्टेप.
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि कर्मचारी क्या मांग रहे थे और सरकार ने क्या मना किया. लोग अक्सर दोनों को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि असल में दोनों अलग हैं.
DA के किसी निश्चित हिस्से- जैसे 50% को स्थायी रूप से Basic Pay का हिस्सा बना देना→ जैसा कि 5वें और 6वें वेतन आयोग में हुआ था.
Basic + DA को जोड़कर एक नई बेसिक तैयार करना और फिर DA को 0% से शुरू करना→ जैसा कि 7वां वेतन आयोग में किया गया था.
7वें वेतन आयोग ने 'मर्जर' की जगह 'समायोजन' यानी एडजस्टमेंट का रास्ता अपनाया था. इसमें DA को बीच में बेसिक में नहीं जोड़ा जाता. बल्कि, जब नया वेतन आयोग लागू होता है, तब पिछले सारे DA को, बेसिक सैलरी को और महंगाई के असर को एक साथ मिलाकर एक 'नया वेतन मैट्रिक्स' (New Pay Matrix) तैयार किया जाता है. इसमें DA तकनीकी रूप से बेसिक में समा जाता है, लेकिन इसे 'मर्जर' का नाम नहीं दिया जाता. इसी वजह से सरकार कहती है- “मर्जर नहीं होगा.” लेकिन असल में DA खत्म होकर नए Basic में शामिल हो जाता है.
8वें वेतन आयोग में क्या होगा, यह समझने के लिए हमें 2016 में लागू हुए 7वें वेतन आयोग (7th CPC) के मॉडल को देखना होगा. उस समय सरकार ने एक बहुत ही स्मार्ट कैलकुलेशन का इस्तेमाल किया था. उस वक्त 6वें वेतन आयोग के हिसाब से कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 125% तक पहुंच चुका था.
सरकार ने सैलरी फिक्स करने के लिए ये 5 स्टेप्स अपनाए थे:
यानी, वो 125% DA गायब नहीं हुआ, बल्कि वह आपकी नई बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का हिस्सा बन गया. इसे ही 'एडजस्टमेंट' कहते हैं. तकनीकी रूप से DA “मर्ज” नहीं हुआ, लेकिन व्यावहारिक रूप से DA बेसिक में समाहित (adjusted) हो गया.
अब आते हैं सबसे बड़े सवाल पर- भविष्य में क्या होगा? भले ही अभी सरकार ने 50% पर DA मर्ज करने से मना कर दिया हो, लेकिन जब 8वां वेतन आयोग आएगा, तो पूरी संभावना है कि वह 7वें वेतन आयोग के ही मॉडल को फॉलो करेगा. सरकार का आयोग इस पर काम कर रहा है, सिफारिशें आने में वक्त लगेगा. लेकिन, यह लगभग तय है कि फार्मूला 7वें CPC जैसा ही हो सकता है- कुछ बदलावों के साथ.
संभावित सिनेरियो ऐसा हो सकता है:
मान लीजिए, जब तक 8वां वेतन आयोग लागू होता है, तब तक महंगाई भत्ता बढ़ते-बढ़ते 60% या 65% तक पहुंच जाता है.
1. नया मैट्रिक्स: वेतन आयोग एक बिल्कुल नई टेबल (Pay Matrix) बनाएगा. (हर पे लेवल में नए सेल होंगे-मतलब नए बेसिक, नई ग्रोथ लाइन.)
2. फिटमेंट फैक्टर: एक नया फिटमेंट फैक्टर तय होगा. (कर्मचारी यूनियन 3.68 की मांग कर रहे हैं, जबकि सरकार इसे 1.92 या 2.08 के आसपास रख सकती है). (सरकार वही चुनेगी जो फाइनेंशियल स्पेस के हिसाब से फिट बैठे).
3. शून्य होगा मीटर: जिस दिन नई सैलरी लागू होगी, उस दिन आपके पुराने बेसिक और उस समय के 60-65% DA को नए फिटमेंट फैक्टर के साथ 'समायोजित' (Adjust) कर दिया जाएगा.
4. नतीजा: आपकी बेसिक सैलरी में एक बड़ा उछाल दिखेगा और DA मीटर फिर से 0% से शुरू होगा. बेसिक बढ़ेगी- यानी HRA, TA, NPA, Allowances सब बढ़ेंगे. PF और ग्रेच्युटी की गणना बदल जाएगी. नई पॉलिसी के अनुसार इंडेक्सेशन पहले से बेहतर है, इसलिए DA हर 6 महीने में ही रिवाइज होगा.
आपके मन में सवाल होगा कि अगर अंत में DA को बेसिक में जुड़ना ही है, तो सरकार ने अभी संसद में 'ना' क्यों कहा? इसका कारण 'समय' (Timing) है. सरकार यह कह रही है कि वह "बीच में" (Interim) कोई मर्जर नहीं करेगी. वह वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों का इंतजार करेगी. 7वें वेतन आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि समय-समय पर DA को बेसिक में मर्ज करने की जरूरत नहीं है, बल्कि हर 10 साल पर वेतन मैट्रिक्स को ही रिवाइज कर देना बेहतर है.



तकनीकी तौर पर देखें तो DA का "विलय" (Merger) अब इतिहास की बात हो चुकी है. 7वें वेतन आयोग ने 'वेतन पुनर्गठन' (Pay Restructuring) का जो नया रास्ता दिखाया है, 8वां वेतन आयोग भी उसी राह पर चलेगा. इसलिए, केंद्रीय कर्मचारियों को निराश होने की जरूरत नहीं है. भले ही आज आपकी सैलरी में 50% DA मर्ज नहीं हो रहा, लेकिन जिस दिन नया वेतन आयोग लागू होगा, वह सारा का सारा DA आपकी बेसिक सैलरी का हिस्सा बन जाएगा और महंगाई भत्ता फिर से शून्य हो जाएगा. बस फर्क इतना है कि यह प्रक्रिया अब 'किश्तों' में नहीं, बल्कि 'एकमुश्त' (One-time settlement) होता है.
A: सामान्य तौर पर DA बेसिक सैलरी से अलग होता है. लेकिन रिटायरमेंट के लाभों (जैसे पीएफ, ग्रेच्युटी) की गणना के लिए बेसिक सैलरी और DA दोनों को जोड़ा जाता है.
A: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की गणना 'ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स' (AICPI-IW) के आंकड़ों के आधार पर की जाती है. यह इंडेक्स बताता है कि खुदरा महंगाई कितनी बढ़ी है.
A: आम तौर पर केंद्र सरकार साल में दो बार महंगाई भत्ते में संशोधन करती है. पहला संशोधन 1 जनवरी से और दूसरा 1 जुलाई से लागू होता है. इसकी घोषणा अक्सर मार्च और सितंबर/अक्टूबर के महीनों में की जाती है.
A: फिटमेंट फैक्टर एक ऐसा मल्टीप्लायर (गुणांक) है, जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग पुराने वेतन को नए वेतन में बदलने के लिए करता है. जैसे, अगर आपका पुराना वेतन 100 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.57 है, तो आपका नया वेतन 257 रुपये होगा.
A: दोनों का मकसद महंगाई के असर को कम करना है. बस फर्क इतना है कि 'महंगाई भत्ता' (DA) नौकरी कर रहे मौजूदा कर्मचारियों (Serving Employees) को मिलता है, जबकि 'महंगाई राहत' (DR) रिटायर हो चुके पेंशनभोगियों (Pensioners) को दी जाती है.