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NC-JCM का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में बढ़ी हैं. (प्रतीकात्मक फोटो/AI)
8th Pay Commission latest news: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चा अभी तक फिटमेंट फैक्टर, सैलरी और पेंशन के इर्द-गिर्द घूम रही थी. लेकिन अब केंद्रीय कर्मचारियों की सबसे बड़ी प्रतिनिधि संस्था NC-JCM (National Council-JCM) ने आयोग को जो Memorandum सौंपा है, उससे साफ हो गया है कि इस बार लड़ाई सिर्फ वेतन बढ़ाने की नहीं है.
कर्मचारियों ने Leave Rules, Medical Facilities, LTC, Group Insurance, Ex-gratia, GPF और Compassionate Appointment तक में बड़े बदलाव की मांग रखी है. इनमें कुछ मांगें ऐसी हैं जो अगर स्वीकार हो जाती हैं तो केंद्रीय कर्मचारियों की पूरी Service Life बदल सकती है.
सबसे बड़ी बात यह है कि कर्मचारियों ने CGEGIS के तहत Group-A कर्मचारियों के लिए ₹3 करोड़ तक Insurance Cover, Casual Leave को 12 दिन करने और Leave Encashment की सीमा 300 दिन से बढ़ाकर 600 दिन करने की मांग रखी है.
| Casual Leave | 8 दिन | 12 दिन |
| Industrial Employees CL | 8 दिन | 15 दिन |
| Leave Encashment | 300 दिन | 600 दिन |
| Maternity Leave | 180 दिन | 240 दिन |
| Paternity Leave | 15 दिन | 45 दिन |
| Parent Care Leave | नहीं | 60 दिन |
| Group-A Insurance Cover | मौजूदा CGEGIS | ₹3 करोड़ |
| Group-B Insurance Cover | मौजूदा CGEGIS | ₹1.5 करोड़ |
| Group-C Insurance Cover | मौजूदा CGEGIS | ₹1 करोड़ |
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NC-JCM का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में बढ़ी हैं. पारिवारिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए Casual Leave को फिर से 12 दिन सालाना किया जाना चाहिए.
वहीं Industrial Establishments में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए 15 दिन Casual Leave की मांग रखी गई है.
यह Memorandum की सबसे बड़ी मांगों में से एक है.
फिलहाल Leave Encashment की सीमा 300 दिन है. कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इसे बढ़ाकर 600 दिन किया जाना चाहिए.
इसके अलावा यह भी प्रस्ताव दिया गया है कि:
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आज की तारीख में अगर कोई कर्मचारी निर्धारित सीमा से अधिक देर से कार्यालय पहुंचता है तो Half Day Casual Leave काट ली जाती है.
NC-JCM ने कहा है कि बड़े शहरों में ट्रैफिक की स्थिति को देखते हुए यह नियम व्यावहारिक नहीं रह गया है.
इसलिए प्रस्ताव दिया गया है कि महीने में कुल 120 मिनट (2 घंटे) तक की देरी को माफ किया जाए. इसके बाद ही Half Day Casual Leave काटी जाए.
यानी छोटी-छोटी देरी पर छुट्टी कटने की व्यवस्था खत्म करने की मांग उठाई गई है.
महिला कर्मचारियों के लिए Maternity Leave को 180 दिन से बढ़ाकर 240 दिन करने की मांग रखी गई है.
इसके साथ:
का प्रस्ताव दिया गया है. पुरुष कर्मचारियों के लिए Paternity Leave को 15 दिन से बढ़ाकर 45 दिन करने की मांग रखी गई है.
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NC-JCM ने Child Care Leave (CCL) के नियमों में भी कई बदलाव मांगे हैं.
मुख्य मांगें:
Memorandum में पहली बार Menstrual Leave का भी उल्लेख किया गया है.
कर्मचारी संगठनों ने मांग की है कि महिला कर्मचारियों को हर महीने 3 दिन विशेष अवकाश दिया जाए.
तर्क दिया गया है कि कुछ राज्य पहले ही इस तरह की व्यवस्था लागू कर चुके हैं और केंद्र सरकार को भी इस दिशा में विचार करना चाहिए.
यह एक नई मांग है.
NC-JCM ने सुझाव दिया है कि कर्मचारियों को अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए पूरे सेवा काल में 60 दिन Parent Care Leave दी जाए.
इसके पीछे Maintenance and Welfare of Senior Citizens Act का हवाला दिया गया है.
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कर्मचारी संगठनों ने CGEGIS में बड़े बदलाव की मांग रखी है.
| Category | Monthly Subscription | Insurance Cover |
| Group-A | ₹3,000 | ₹3 करोड़ |
| Group-B | ₹1,500 | ₹1.50 करोड़ |
| Group-C | ₹1,000 | ₹1 करोड़ |
NC-JCM का कहना है कि 5वें, 6वें और 7वें वेतन आयोग ने भी CGEGIS सुधार की बात कही थी, लेकिन वास्तविक बदलाव नहीं हुए.
फिलहाल ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मृत्यु होने पर ₹25 लाख Ex-Gratia मिलता है.
कर्मचारियों की मांग है कि इसे बढ़ाकर ₹2 करोड़ किया जाए.
Memorandum में विशेष रूप से रक्षा उत्पादन इकाइयों और रेलवे कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है, जहां जोखिम अधिक होता है.
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Medical सुविधाओं पर भी लंबी मांग सूची दी गई है.
मुख्य मांगें:
कर्मचारी संगठनों ने कहा है कि NPS/UPS के दायरे में आने वाले कर्मचारियों को GPF चुनने का विकल्प दिया जाए. इसके अलावा:
जैसी मांगें भी Memorandum में शामिल हैं.
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यह सिर्फ वेतन बढ़ाने का एजेंडा नहीं है. NC-JCM ने अपने Memorandum में साफ लिखा है कि Leave, Insurance, Medical Security, LTC और Social Security सुविधाएं किसी भी कर्मचारी के सम्मानजनक जीवन की रीढ़ होती हैं.
अब फैसला 8वें वेतन आयोग को करना है कि वह इन मांगों में से किन्हें अपनी अंतिम सिफारिशों में शामिल करता है. लेकिन इतना तय है कि इस बार चर्चा सिर्फ Basic Pay बढ़ाने की नहीं, बल्कि कर्मचारियों की पूरी Service Life को बेहतर बनाने की है.