Emergency Fund: एक्सपर्ट ने बताए वो 7 नियम, जो आपको नहीं होने देंगे कर्जदार, किसी के आगे नहीं फैलाना पड़ेगा हाथ

हर भारतीय परिवार के पास कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए. इसे सुरक्षित और लिक्विड (आसानी से निकलने योग्य) रखना जरूरी है. फंड बनाने के 7 मुख्य नियमों में लिक्विडिटी को प्राथमिकता देना, फंड को अलग खाते में रखना और उपयोग के बाद इसे तुरंत फिर से भरना शामिल है.
Emergency Fund: एक्सपर्ट ने बताए वो 7 नियम, जो आपको नहीं होने देंगे कर्जदार, किसी के आगे नहीं फैलाना पड़ेगा हाथ

हर भारतीय परिवार के पास कम से कम 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए. फोटो- एआई जनरेटेड

जीवन में अनिश्चितता कभी भी दस्तक दे सकती है. अचानक आई कोई बीमारी, घर की मरम्मत का बड़ा खर्च या नौकरी का जाना- ये ऐसी स्थितियां हैं जो किसी को भी मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ सकती हैं. ऐसे समय में घबराने के बजाय, एक 'इमरजेंसी फंड' (Emergency Fund) आपके लिए ढाल का काम करता है.

अक्सर देखा गया है कि तैयारी न होने पर लोग कर्ज के जाल में फंस जाते हैं या अपनी लंबी अवधि के निवेश (म्यूचुअल फंड या शेयर) को बीच में ही बेच देते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, कर्ज मुक्त जीवन जीने के लिए इमरजेंसी फंड बनाना कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जरूरत है.

इमरजेंसी फंड क्या है? (What is an Emergency Fund?)

आसान शब्दों में कहें तो इमरजेंसी फंड वह पैसा है जिसे केवल और केवल अनिश्चित और आपातकालीन स्थितियों के लिए अलग रखा जाता है. यह पैसा छुट्टियों पर जाने, शॉपिंग करने या किसी सुनियोजित निवेश के लिए नहीं होता. यह फंड सुरक्षित, हमेशा उपलब्ध और 'लिक्विड' होना चाहिए.

इमरजेंसी फंड के 7 सुनहरे नियम

इमरजेंसी फंड को लेकर जी बिजनेस ने बात की पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट पंकज मठपाल से, जिन्होंने इससे जुड़े 7 नियम बताए हैं. अगर आपने भी इन्हें अपना लिया तो आपको किसी भी आपात स्थिति में कर्ज लेने की जरूरत शायद ही पड़े.

1. 3 से 6 महीने के खर्च का लक्ष्य रखें

आमतौर पर 3–6 महीने का इमरजेंसी फंड बनाने की सलाह दी जाती है. मान लीजिए आपका मासिक घरेलू खर्च ₹25,000 है (जिसमें राशन, ईएमआई, किराया और बिजली बिल शामिल हैं). तो आपके पास कम से कम ₹75,000 से ₹1,50,000 का फंड हमेशा तैयार होना चाहिए. यह राशि आपको नौकरी जाने या अन्य बड़े खर्चों के समय कर्ज लेने से बचाएगी.

हालांकि, पकंज मठपाल कहते हैं कि यह नियम सभी पर लागू नहीं होता. अगर घर में आप अकेले कमाने वाले व्यक्ति हैं, तो 6–9 महीने के घरेलू खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाने के बारे में सोचना चाहिए. वहीं अगर आप एक फ्रीलांसर हैं या ऐसे बिजनेस में हैं जहां कमाई हर महीने एक जैसी नहीं होती, घटती-बढ़ती रहती है, तो 9–12 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड भी रखा जा सकता है. इस बात को हमने कोविड के दौरान बखूबी समझा है.

2. इसे बाकी खर्चों से बिल्कुल अलग रखें

इमरजेंसी फंड को कभी भी अपने रोजमर्रा के बचत खाते या खर्चों के साथ मिक्स न करें. इसके लिए एक अलग बैंक खाता रखें. इससे भावनाओं में बहकर या फालतू खर्चों के लिए इस पैसे को इस्तेमाल करने का लालच कम हो जाता है.

3. रिटर्न से ज्यादा Liquidity को महत्व दें

यह निवेश का जरिया नहीं है. यहां सुरक्षा और पैसे की तत्काल उपलब्धता सबसे ज्यादा मायने रखती है. लोग अक्सर अधिक मुनाफे के चक्कर में इस पैसे को रिस्की स्कीमों में लगा देते हैं, जो गलत है. आपात स्थिति में आपको पैसा तुरंत मिलना चाहिए, भले ही उस पर ब्याज कम मिले.

4. सेविंग्स अकाउंट में फंड रखने से बचें

अधिकतर लोग इमरजेंसी फंड को सेविंग्स अकाउंट में रखते हैं. पंकज मठपाल कहते हैं कि सेविंग्स बैंक अकाउंट की ब्याज दरें लगभग 2.50% सालाना के आसपास होती हैं. इमरजेंसी फंड को सेविंग्स अकाउंट में रखने के बजाय ऐसी बैंक FD में रखना चाहिए जो सेविंग्स अकाउंट के साथ लिंक हो. यानी जरूरत पड़ने पर FD का पैसा सेविंग्स अकाउंट में आ सके और अगर जरूरत न हो तो FD का ब्याज मिलता रहे. इसके अलावा, इमरजेंसी फंड का कुछ हिस्सा अच्छी गुणवत्ता वाले डेट फंड में भी रखा जा सकता है.

5. शुरुआत छोटी करें, पर अभी करें

इमरजेंसी फंड बनाने के लिए किसी बड़ी रकम का इंतजार न करें. महीने के ₹1,000 से ₹5,000 की बचत भी एक शानदार शुरुआत हो सकती है. निरंतरता, ईमानदारी और समर्पण ही एक मजबूत फंड बनाने का आधार है.

6. इस्तेमाल के बाद फंड को फिर से भरें

यदि किसी आपात स्थिति में आपको फंड से पैसा निकालना पड़े, तो संकट टलते ही इसे दोबारा भरने को प्राथमिकता दें. यह अच्छी व्यक्तिगत वित्त व्यवस्था के लिए बहुत जरूरी है.

7. सालाना आधार पर फंड की समीक्षा करें

जैसे-जैसे आपकी आय और जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, आपके खर्च भी बढ़ते हैं. इसलिए, हर साल अपने इमरजेंसी फंड का विश्लेषण करें और अपनी नई जीवनशैली के अनुसार इसे बढ़ाते रहें.

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Conclusion

एक मजबूत इमरजेंसी फंड अब केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि कुशल वित्तीय नियोजन का एक बुनियादी हिस्सा है. ऊपर दिए गए सरल लेकिन प्रभावी नियमों का पालन करके, आप खुद को और अपने परिवार को अचानक आने वाले आर्थिक झटकों से बचा सकते हैं और लंबी अवधि की आर्थिक स्थिरता का निर्माण कर सकते हैं.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 इमरजेंसी फंड में कितना पैसा होना चाहिए?

आदर्श रूप से, आपके 3 से 6 महीने के अनिवार्य खर्चों (किराया, राशन, ईएमआई) के बराबर राशि होनी चाहिए.

Q2 क्या मैं इमरजेंसी फंड को म्यूचुअल फंड में रख सकता हूं?

आप इसे 'लिक्विड फंड्स' में रख सकते हैं जहां से पैसा 24 घंटे में मिल जाए, लेकिन सबसे सुरक्षित विकल्प एक अलग बचत खाता ही है.

Q3 क्या क्रेडिट कार्ड को इमरजेंसी फंड माना जा सकता है?

नहीं. क्रेडिट कार्ड एक कर्ज है. इमरजेंसी फंड का उद्देश्य आपको कर्ज से बचाना है, न कि नए कर्ज में डालना.

Q4 मेरी सरकारी नौकरी है, तो भी क्या मुझे इस फंड की जरूरत है?

हां, क्योंकि आपात स्थिति केवल नौकरी जाने तक सीमित नहीं है, मेडिकल इमरजेंसी या घर की मरम्मत जैसे खर्च कभी भी आ सकते हैं.

Q5 क्या बच्चों की शिक्षा के लिए इस फंड का उपयोग कर सकते हैं?

नहीं, बच्चों की शिक्षा एक 'नियोजित खर्च' है, जिसके लिए आपको अलग से निवेश करना चाहिए. इमरजेंसी फंड केवल 'अनियोजित' संकटों के लिए है.

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