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भारत में क्रेडिट कार्ड खर्च (Credit Card Spending) तेजी से बढ़ रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India - RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2025 में क्रेडिट कार्ड खर्च 1.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जबकि जून में यह 1.83 लाख करोड़ रुपये था. यानी सिर्फ एक महीने में करीब 6% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कई लोग बहुत ही समझदारी से करते हैं तो कई लोग इसके ट्रैप में फंस जाते हैं. अगर आप भी क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अच्छे से करते हैं, तो आप एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखकर और ज्यादा फायदा कमा सकते हैं. आइए जानते हैं क्यों एक से ज्यादा क्रेडिट कार्ड रखना फायदे वाली बात है.
अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग तरह के क्रेडिट कार्ड आते हैं. दो क्रेडिट कार्ड रखने का सबसे बड़ा फायदा रिवॉर्ड ऑप्टिमाइजेशन है. एक कार्ड से आप रोजमर्रा के खर्च जैसे ग्रॉसरी (Grocery) और पेट्रोल (Petrol) का पेमेंट कर सकते हैं, जहां कैशबैक (Cashback) और रिवार्ड प्वाइंट्स ज्यादा मिलते हैं. दूसरा कार्ड आप ऑनलाइन शॉपिंग (Online Shopping), ट्रैवल (Travel) और अन्य बड़े खर्च के लिए रख सकते हैं. चाहे तो अलग-अलग काम के लिए कई सारे क्रेडिट कार्ड भी रख सकते हैं, बशर्ते आप उन सबको मैनेज कर पाएं.
कई बार एक कार्ड पर एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस (Airport Lounge Access), तो दूसरे पर डाइनिंग डिस्काउंट (Dining Discount) और ट्रैवल इंश्योरेंस (Travel Insurance) मिलता है. ऐसे में अगर आपके पास दो कार्ड हैं तो आप दोनों कार्ड्स के बेनिफिट्स को मिला कर ज्यादा फायदा ले सकते हैं.
क्रेडिट स्कोर (Credit Score) किसी भी इंसान की फाइनेंशियल रिपोर्ट कार्ड की तरह होता है. अगर आपके पास दो कार्ड हैं तो आप अपनी लिमिट (Limit) को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं. इससे क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो (Credit Utilisation Ratio) कम रहता है और समय पर भुगतान करने से आपका क्रेडिट स्कोर और मजबूत होता है.
ऑनलाइन सेल में अक्सर ही कई चीजों पर नो कॉस्ट ईएमआई का ऑफर मिलता है. मान लीजिए कोई प्रोडक्ट 60 हजार का है और 12 महीने की नो कॉस्ट ईएमआई पर मिल रहा है. ऐसे में आपको हर महीने करीब 5 हजार रुपये ही चुकाने हैं, लेकिन जब आप वह प्रोडक्ट खरीदते हैं तो पूरे 60 हजार आपकी क्रेडिट लिमिट से ब्लॉक हो जाते हैं. इसके बाद धीरे-धीरे हर महीने के भुगतान के साथ थोड़ी-थोड़ी लिमिट वापस मिलती जाती है. अगर आपके पास ज्यादा कार्ड हैं तो आपका कुल क्रेडिट यूटिलाइजेशन कंट्रोल में रहेगा.
वहीं दूसरी ओर, इन सेल में तमाम तरह के डिस्काउंट और ऑफर अलग-अलग कार्ड पर मिलते हैं. ऐसे में अगर आपके पास कई कार्ड हैं तो आप सेल में अपनी पसंदीदा डील हासिल कर सकते हैं. हालांकि, ध्यान रहे कि अगर आप क्रेडिट कार्ड्स को ठीक से मैनेज नहीं कर पाते हैं तो आप देखते ही देखते डेट ट्रैप में फंस जाएंगे.
कभी-कभी एक कार्ड ब्लॉक (Block), लॉस्ट (Lost) या डिक्लाइन (Decline) हो सकता है. ऐसी स्थिति में दूसरा कार्ड आपके लिए बैकअप (Backup) बन जाता है. इसके अलावा दोनों कार्ड्स की अलग-अलग बिलिंग साइकिल (Billing Cycle) आपके खर्चों को मैनेज करने और कैश फ्लो (Cash Flow) को कंट्रोल में रखने में मदद करती है.
जितना फायदा है, उतना ही रिस्क भी है. ज्यादा कार्ड का मतलब ज्यादा जिम्मेदारी. अगर आप समय पर पेमेंट नहीं करेंगे तो भारी ब्याज (Interest) और चार्ज (Charge) लग सकता है. साथ ही ज्यादा डिपेंडेंसी (Dependency) आपको डेट ट्रैप (Debt Trap) में भी डाल सकती है.
भारत में डिजिटल खर्च तेजी से बढ़ रहा है और क्रेडिट कार्ड इसका सबसे बड़ा हिस्सा बन चुके हैं. दो क्रेडिट कार्ड रखना अब सिर्फ लग्जरी (Luxury) नहीं बल्कि समझदारी है, अगर आप उन्हें जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें. इससे न सिर्फ फायदे दोगुने होते हैं बल्कि वित्तीय सुरक्षा और स्कोर मैनेजमेंट भी आसान हो जाता है.
क्रेडिट कार्ड एक तरह का लोन कार्ड होता है, जिससे आप खर्च कर सकते हैं और बाद में बैंक को चुका पैसे सकते हैं.
क्रेडिट स्कोर आपकी लोन चुकाने की क्षमता दिखाता है और इससे आपको भविष्य में लोन आसानी से मिलता है.
हां, लेकिन तभी जब आप समय पर भुगतान करें और लिमिट से ज्यादा खर्च न करें.
यह आपके इस्तेमाल किए गए क्रेडिट और कुल लिमिट का अनुपात है. इसे कम रखना बेहतर है.
हां, लेकिन उस पर तुरंत ब्याज और चार्ज लगते हैं, इसलिए इसे अवॉइड करना चाहिए.
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