आमतौर पर सैलरी के मैनेजमेंट को लेकर 50-30-20 के नियम को फॉलो करने की बात कही जाती है. लेकिन 50-30-20 का नियम सुनने में जितना अच्छा लगता है, असल जिंदगी में उतना ही मुश्किल है. तमाम लोग जिनकी सैलरी बहुत ज्यादा नहीं होती, उनके लिए हर महीने 20% की बचत कर पाना काफी मुश्किल हो जाता है.
ऐसे में ये नियम फॉलो नहीं हो पाता और फिर महीना खत्म होते-होते, सारा हिसाब-किताब बिगड़ जाता है और बचत के नाम पर हाथ खाली रह जाते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो आज हम आपको बजट बनाने के एक ऐसे नए और प्रैक्टिकल फॉर्मूले के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आसान है और वाकई काम करता है. ये नियम है - 15-65-20. आज 1 सितंबर को सैलरी क्रेडिट होते ही ये रूल फॉलो करें. यहां जानिए इसके बारे में.
आखिर क्यों फेल हो जाता है 50-30-20 का नियम?
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ये नियम अक्सर इसलिए फेल हो जाता है क्योंकि:
- बचत सबसे आखिर में: ये नियम कहता है कि सारे खर्चे करने के बाद 20% बचाओ. लेकिन असलियत ये है कि महीने के अंत तक कुछ बचता ही नहीं.
- अव्यावहारिक प्रतिशत: बड़े शहरों में रहने वाले लोगों के लिए घर का किराया, बच्चों की फीस और EMI जैसे जरूरी खर्चे ही सैलरी का 60-70% हिस्सा ले लेते हैं. ऐसे में 50% में जरूरतें पूरी करना नामुमकिन सा लगता है.
- लगातार ट्रैकिंग का झंझट: हर खर्च को 'जरूरत' और 'शौक' में बांटना बहुत थकाऊ काम है.
ये है नया 15-65-20 का रूल: बचत पहले, खर्चे बाद में
इस नियम का सबसे बड़ा और सबसे शक्तिशाली सिद्धांत है - 'बचत सबसे पहले'. ये 50-30-20 नियम को बस थोड़ा सा उलट देता है जिससे यह कहीं ज्यादा असरदार हो जाता है.
ये नियम कैसे काम करता है-
- 15% (बचत और निवेश): जैसे ही आपकी सैलरी आए, कोई भी दूसरा खर्च करने से पहले, अपनी सैलरी का 15% हिस्सा सबसे पहले बचत या निवेश (SIP, PPF, RD) के लिए अलग कर दें. ये आपके भविष्य के लिए आपकी पहली EMI है.
- 65% (जरूरतें - Needs): अब जो पैसा बचा है, उसमें से 65% हिस्सा अपनी जरूरी चीजों पर खर्च करें. इसमें आपका घर का किराया, लोन की EMI, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की फीस और ट्रांसपोर्ट का खर्चा शामिल है.
- 20% (शौक - Wants): और आखिर में बचा हुआ 20% हिस्सा आप अपने शौकों पर, बिना किसी टेंशन या अपराध-बोध के, खर्च कर सकते हैं. इसमें बाहर खाना, घूमना, शॉपिंग करना, फिल्में देखना जैसी चीजें शामिल हैं.
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आपकी महीने की सैलरी 50,000 रुपए है.
- 15% (बचत): सैलरी आते ही सबसे पहले ₹7,500 (50,000 का 15%) की SIP या RD ऑटो-डेबिट पर सेट कर दें. अब आप इस पैसे को भूल जाएं.
- 65% (जरूरतें): अब आपके पास ₹32,500 (50,000 का 65%) हैं. इस पैसे से आप अपने सारे जरूरी बिल और EMI चुकाएं.
- 20% (शौक): और आखिर में, आपके पास ₹10,000 (50,000 का 20%) बचते हैं. ये पैसा आपका 'फन मनी' है. इसे आप अपनी मर्जी से, बिना सोचे-समझे खर्च कर सकते हैं, क्योंकि आपकी बचत तो पहले ही हो चुकी है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. अगर मैं अपनी सैलरी का 15% नहीं बचा सकता तो क्या करूं.
कोई बात नहीं! आप 10% या 5% से भी शुरुआत कर सकते हैं. महत्वपूर्ण बात 'बचत सबसे पहले' की आदत को बनाना है. जैसे-जैसे आपकी आय बढ़े, आप इस प्रतिशत को बढ़ा सकते हैं.
2. अगर मेरी जरूरतें 65% से ज्यादा हैं तो क्या करूं.
अगर आपकी जरूरतें 65% से ज्यादा हैं, तो ये एक संकेत है कि आपको अपने खर्चों को फिर से देखने की जरूरत है. हो सकता है आपको अपने 'शौक' वाले 20% हिस्से में से कुछ कटौती करके जरूरतों में डालना पड़े.
3. 'बचत सबसे पहले' के तहत बचाए गए 15% पैसे को कहां निवेश करना चाहिए.
ये आपके लक्ष्य पर निर्भर करता है. लंबी अवधि के लक्ष्यों (जैसे रिटायरमेंट) के लिए आप इक्विटी म्यूचुअल फंड में SIP कर सकते हैं. छोटी अवधि के लक्ष्यों के लिए आप RD या लिक्विड फंड में पैसा डाल सकते हैं.
4. क्या ये नियम हर आय वर्ग के लिए काम करता है.
आमतौर पर ये नियम सभी पर काम करता है. लेकिन अगर आपकी आमदनी कम है तो आप 15-65-20 की जगह 10-70-20 का नियम अपना सकते हैं, जबकि अगर आमदनी ज्यादा है तो आप 25-55-20 का नियम अपना सकते हैं. मूल सिद्धांत 'बचत सबसे पहले' का है.