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कभी-कभी ज़िंदगी में एक के बाद एक आर्थिक परेशानी (Financial Emergency) आ जाती है. मेडिकल इमरजेंसी, घर की मरम्मत या किसी जरूरी खर्च के लिए हमें पर्सनल लोन (Personal Loan) लेना पड़ता है. धीरे-धीरे जब ऐसे कई लोन हो जाते हैं, तो हर महीने कई ईएमआई (EMI) संभालना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में अगर समझदारी से काम लिया जाए तो बिना किसी परेशानी के आप इस लोन लोड को संभाल सकते हैं.
दरअसल, एक साथ कई लोन की ईएमआई चुकाना किसी टाइम बम जैसा होता है. अगर वक्त रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो ये आपकी फाइनेंशियल हेल्थ (Financial Health) पर भारी पड़ सकता है. आइए जानते हैं 10 स्मार्ट स्ट्रेटेजी जो आपको इस जाल से निकालने में मदद करेंगी.
सबसे पहला कदम है अपने सभी लोन की ईएमआई को ऑटो डेबिट (Auto Debit) पर सेट करना. इससे आपको हर महीने की डेट याद रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी और पेमेंट मिस होने का डर भी नहीं रहेगा. अगर हो सके तो सभी ईएमआई की डेट एक जैसी रखिए और कोशिश करें कि ये आपकी सैलरी डेट (Salary Date) के तुरंत बाद हो. इससे फायदा ये होगा कि खर्च करने से पहले ही आपकी ईएमआई कट जाएगी.
अपने सभी लोन का एक क्लियर ओवरव्यू बनाना जरूरी है. इसके लिए एक एक्सेल शीट (Excel Sheet) बना लीजिए, जिसमें हर लोन का नाम, ब्याज दर, बाकी बची ईएमआई, लोन टेन्योर और बाकी रकम लिखिए. इससे आपको साफ दिखेगा कि किस लोन पर कितना ब्याज जा रहा है और कौन सा लोन पहले खत्म करना चाहिए.
अब जब आपके पास सारी जानकारी है, तो एक मंथली बजट (Monthly Budget) तैयार करें. इससे आपको पता चलेगा कि खर्चों के बाद कितना पैसा बचता है, जिसे आप डेट रिपेमेंट (Debt Repayment) के लिए यूज कर सकते हैं. कई बार छोटे खर्चे कट कर बड़ी राहत मिलती है. जैसे बाहर खाना कम करना, सब्सक्रिप्शन कम करना, या अनावश्यक खरीदारी रोकना.
अगर आपके पास कई छोटे-छोटे लोन हैं, तो उन्हें एक लोन में कंसोलिडेट (Consolidate) करें. इसे डेट कंसोलिडेशन (Debt Consolidation) कहा जाता है. एक ही लोन की ईएमआई मैनेज करना आसान होता है और आपको हर महीने एक ही डेट ट्रैक करनी पड़ती है.
आपके पास दो स्मार्ट विकल्प हैं. पहला है स्नोबॉल मेथड, इसके तहत सबसे छोटे लोन को पहले खत्म करें. इससे मोटिवेशन बढ़ेगा. दूसरा है एवलांच मेथड, जिसके तहत सबसे ज्यादा ब्याज वाले लोन को पहले खत्म करें. इससे पैसे की बचत होगी. आपकी स्थिति के हिसाब से जो भी तरीका बेहतर हो, वही अपनाइए.
अगर पेमेंट मुश्किल हो रही है, तो बैंक से बात करें. कई बैंक लोन टेन्योर (Loan Tenure) बढ़ा देते हैं या ब्याज दर घटा देते हैं, ताकि आपकी ईएमआई कम हो जाए. कई बार बैंक आपके सभी लोन को एक साथ जोड़कर नया कर्ज दे देते हैं, जिसे मैनेज करना आसान होता है. बैंक से डेट रीस्ट्रक्चरिंग पर बात करें.
अगर आपके मौजूदा बैंक की ब्याज दर ज्यादा है, तो आप किसी दूसरे बैंक में बैलेंस ट्रांसफर (Balance Transfer) कर सकते हैं. इससे आपकी ब्याज दर कम हो सकती है और ईएमआई घट सकती है. हालांकि, ध्यान रखें कि पुराने बैंक को फोरक्लोजर चार्ज (Foreclosure Charges) देना पड़ सकता है और नए बैंक में प्रोसेसिंग फीस (Processing Fee) भी लग सकती है.
जब भी आपको बोनस, इंसेंटिव या कोई लंपसम अमाउंट मिले, उसे खर्च करने के बजाय लोन क्लियर करने में लगाएं. आप चाहें तो इससे उस लोन को पूरा खत्म कर सकते हैं, जिसका ब्याज ज्यादा है या जो जल्द खत्म हो सकता है.
अगर आप क्रेडिट कार्ड आउटस्टैंडिंग (Credit Card Outstanding) को अगले महीने तक ले जाते हैं तो बैंक करीब 3.5% प्रति माह (42% वार्षिक) ब्याज वसूलते हैं. इसलिए बेहतर है कि बकाया रकम को ईएमआई में कन्वर्ट कर दें, ताकि ब्याज दर कम हो जाए और आप आसानी से भुगतान कर सकें.
अगर स्थिति हाथ से निकल रही है, तो किसी डेट काउंसलर (Debt Counsellor) की मदद लें. वह आपकी इनकम, खर्च और लोन के हिसाब से एक रियलिस्टिक प्लान बनाएंगे, जिससे आप धीरे-धीरे कर्ज से बाहर निकल सकें.
कई बार जरूरत के वक्त लिए गए लोन हमारी फाइनेंशियल आजादी छीन लेते हैं. लेकिन अगर आप इन 10 स्मार्ट स्ट्रेटजीज को अपनाते हैं, तो आप आसानी से मल्टीपल पर्सनल लोन (Multiple Personal Loans) को मैनेज कर सकते हैं. थोड़ी अनुशासन और सही प्लानिंग से कर्ज का बोझ धीरे-धीरे कम होता जाएगा और आप एक दिन पूरी तरह डेट-फ्री (Debt-free) बन जाएंगे.
यह ऐसा लोन है जिसे आप बिना किसी सिक्योरिटी के अपनी जरूरत के लिए लेते हैं.
EMI यानी हर महीने तय रकम जो लोन के बदले में चुकानी होती है.
आप अपना लोन एक बैंक से दूसरे बैंक में कम ब्याज दर पर ट्रांसफर कर सकते हैं.
जब आप लोन की कुछ ईएमआई पहले ही चुका देते हैं, उसे प्रीपेमेंट कहते हैं.
जरूरत पड़ने पर लिया जा सकता है, लेकिन समय पर उसे चुकाने की क्षमता होनी चाहिए.
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