&format=webp&quality=medium)
'रिच डैड पुअर डैड' के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी के ये 10 सबक आपकी आंखें खोल देंगे. प्रतीकात्मक फोटो ( AI/ChatGPT)
दुनिया भर के करोड़ों लोगों की पैसों की सोच को बदलने वाली मशहूर किताब 'रिच डैड पुअर डैड' (Rich Dad Poor Dad) के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) ने अमीर बनने और पैसे के प्रबंधन को लेकर कई ऐसी बातें बताई हैं, जिन्हें अधिकतर लोग तब सीखते हैं, जब बहुत देर हो जाती है. कियोसाकी ने अपनी किताब में अपने दो पिताओं के विचारों की तुलना की है- एक उनके सगे पिता (पुअर डैड), जो बहुत पढ़े-लिखे होने के बावजूद आर्थिक रूप से परेशान रहे, और दूसरे उनके दोस्त के पिता (रिच डैड), जिन्होंने बिना किसी बड़ी डिग्री के भारी संपत्ति बनाई.
निवेश को लेकर रॉबर्ट कियोसाकी ने 10 सिद्धांत दिए हैं, जो पारंपरिक सोच को चुनौती देते हैं और बताते हैं कि आखिर क्यों पारंपरिक सलाह लोगों को अमीर बनाने के बजाय जीवन भर संघर्ष की ओर ले जाती है. कियोसाकी के ये सिद्धांत बेहद सरल हैं, लेकिन इन्हें जीवन में लगातार लागू करने से आपकी पूरी आर्थिक स्थिति बदल सकती है. आइए जानते हैं इनके बारे में.
कियोसाकी का पहला और सबसे बुनियादी नियम है: "गरीब और मध्यम वर्ग के लोग पैसों के लिए काम करते हैं. अमीरों के लिए उनका पैसा काम करता है." यह सिद्धांत नौकरीपेशा मानसिकता और कॉर्पोरेट सीढ़ी चढ़ने की पारंपरिक सोच को चुनौती देता है. इसका मतलब यह नहीं कि आप काम करना बंद कर दें, बल्कि ऐसी व्यवस्था या सिस्टम (जैसे बिजनेस या निवेश) बनाएं जहां आपकी पूंजी आपके समय के बिना भी लगातार आय पैदा करे. जो लोग इसे जवानी में समझ लेते हैं, वह सोते समय भी पैसे कमाते हैं.
हमारा स्कूल सिस्टम आपको एक कर्मचारी (Employee) बनना सिखाता है, न कि संपत्ति बनाने वाला. कियोसाकी का मानना है कि बड़ी-बड़ी डिग्रियां आपको आर्थिक तंगी से नहीं बचा सकतीं. वह कहते हैं, "लोग आर्थिक रूप से इसलिए संघर्ष करते हैं, क्योंकि वह सालों स्कूल में बिताते हैं, लेकिन पैसे के बारे में कुछ नहीं सीखते." स्कूल पढ़ना-लिखना तो सिखाते हैं, पर यह नहीं सिखाते कि पैसा काम कैसे करता है.
इस नियम को लोग अक्सर पूरी जिंदगी गलत समझते हैं. कियोसाकी के अनुसार:
एसेट (Asset): वह चीज है जो आपकी जेब में पैसा डाले (जैसे रेंटल प्रॉपर्टी, शेयर, बिजनेस).
लायबिलिटी (Liability): वह चीज है जो आपकी जेब से पैसा निकाले (जैसे कार, महंगा फोन, लोन).
पैसे के मामले में आपकी भावनाएं ही आपका भविष्य तय करती हैं. कियोसाकी सलाह देते हैं, "अपनी भावनाओं से सोचने के बजाय, अपनी भावनाओं का इस्तेमाल सोचने के लिए करना सीखें." डर और लालच अक्सर लोगों से गलत फैसले करवाते हैं. डर के कारण लोग जोखिम नहीं लेते और असुरक्षित नौकरियों में फंसे रहते हैं, जबकि लालच के कारण वह जल्दी अमीर बनने वाली धोखाधड़ी की स्कीमों में पैसा गंवा देते हैं.
पैसे को लेकर आप जिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, वह आपके दिमाग के दरवाजे या तो खोलते हैं या बंद करते हैं. कियोसाकी समझाते हैं, "जब आप कहते हैं 'मैं इसे नहीं खरीद सकता', तो आपका दिमाग काम करना बंद कर देता है. लेकिन जब आप पूछते हैं 'मैं इसे कैसे खरीद सकता हूं?', तो आपके दिमाग में नए रास्ते, उत्साह और सपने खुलने लगते हैं." 'कैसे' पूछने से आपका दिमाग समाधान ढूंढने पर मजबूर होता है.
ज्यादातर लोग पैसे खोने के डर से कभी निवेश ही नहीं कर पाते. कियोसाकी कहते हैं, "जीतने वाले हारने से नहीं डरते, लेकिन हारने वाले डरते हैं. असफलता तो सफलता के सफर का एक जरूरी हिस्सा है. जो लोग असफलता से बचते हैं, वह सफलता से भी दूर हो जाते हैं." हर अमीर इंसान ने कभी न कभी पैसा गंवाया है, लेकिन उन्होंने उसे एक सीख की तरह लिया.
ये भी पढ़ें- रॉबर्ट कियोसाकी ने दी 'महामंदी' की चेतावनी, 'रिच डैड पुअर डैड' के ये 6 तरीके बचाएंगे आपकी मेहनत की कमाई
अमीर और गरीब के बजट संभालने के तरीके में बड़ा अंतर होता है:
गरीबों की सोच: पहले सारे खर्च (किराया, बिल, किस्त) चुकाएंगे, फिर जो बचेगा उसे निवेश करेंगे (जो कि आमतौर पर कुछ नहीं बचता).
अमीरों की सोच: वह जैसे ही कमाते हैं, सबसे पहले एक निश्चित हिस्सा अपने निवेश के लिए निकाल लेते हैं (Pay Yourself First), उसके बाद बचे हुए पैसों से अपने खर्चों को मैनेज करते हैं.
लोग अक्सर सिर्फ ऊंचे वेतन या सैलरी के पीछे भागते हैं, जबकि करियर की सही रणनीति सीखने पर होनी चाहिए. कियोसाकी के पढ़े-लिखे पिता (पुअर डैड) के लिए 'नौकरी की सुरक्षा' (Job Security) सबसे बड़ी चीज थी, लेकिन उनके अमीर पिता (रिच डैड) के लिए 'सीखना' (Learning) सबसे महत्वपूर्ण था. शुरुआत में ऐसे काम चुनें जहां आपको सेल्स, नेगोशिएशन (मोलभाव), मार्केटिंग और वित्तीय विश्लेषण जैसे हुनर सीखने को मिलें.
कियोसाकी इन दोनों शब्दों के बीच एक बड़ा अंतर बताते हैं. 'ब्रोक' (Broke) होने का मतलब है कि आपके पास इस समय कैश या पैसा खत्म हो गया है, लेकिन आपके पास ज्ञान और हुनर है जिससे आप दोबारा पैसा बना सकते हैं. दूसरी तरफ, 'पुअर' (Poor) यानी गरीब होना एक स्थायी मानसिक स्थिति है, जिसमें इंसान के पास वित्तीय समझ और सही सोच ही नहीं होती, चाहे उसके बैंक खाते में कितना भी पैसा क्यों न आ जाए.
बाकी सभी नियम इसी बुनियादी सिद्धांत से निकलते हैं. कियोसाकी सिखाते हैं, "हम सभी के पास जो एक सबसे शक्तिशाली संपत्ति है, वह है हमारा दिमाग. अगर इसे सही तरीके से ट्रेनिंग दी जाए, तो यह पल भर में अपार संपत्ति खड़ी कर सकता है." आर्थिक रूप से समझदार इंसान अगर सब कुछ खो भी दे, तो भी वह अपने दिमाग के दम पर दोबारा साम्राज्य खड़ा कर सकता है.
रॉबर्ट कियोसाकी के ये सबक कोई बहुत जटिल सिद्धांत नहीं हैं जिन्हें समझने के लिए किसी बड़ी डिग्री की जरूरत हो. ये बेहद सरल और व्यावहारिक नियम हैं. त्रासदी यह नहीं है कि ये नियम मुश्किल हैं, बल्कि त्रासदी यह है कि ज्यादातर लोग इन्हें तब सीखते हैं जब वे अपनी जिंदगी के तीन-चार दशक आर्थिक अज्ञानता और संघर्ष में गंवा चुके होते हैं. इन नियमों को समय रहते सीखने और लागू करने से ही आप अपनी और अपने परिवार की आर्थिक तकदीर को बदल सकते हैं.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 रॉबर्ट कियोसाकी के अनुसार 'निवेश' की शुरुआत कब करनी चाहिए?
जितनी जल्दी हो सके, क्योंकि कम उम्र में शुरुआत करने से आपके रुपये पर 'कंपाउंडिंग' का सबसे ज्यादा फायदा मिलता है.
Q2 अमीर बनने के लिए रुपये को कहां लगाना चाहिए- एसेट में या लायबिलिटी में?
हमेशा एसेट में. एसेट वह निवेश है जो आपकी जेब में नियमित रूप से रुपया डालता है (जैसे रेंटल प्रॉपर्टी या शेयर), जबकि लायबिलिटी आपकी जेब से रुपया निकालती है.
Q3 'फाइनेंशियल लिटरेसी' (वित्तीय साक्षरता) का निवेश में क्या महत्व है?
इसका मतलब है रुपये के काम करने के नियम को समझना, इसके बिना आप कितना भी रुपया कमा लें, उसे सही जगह निवेश करके बढ़ा नहीं पाएंगे.
Q4 निवेश के मामले में अमीर लोग अपनी सैलरी या आय का प्रबंधन कैसे करते हैं?
अमीर लोग 'पे योरसेल्फ फर्स्ट' (Pay Yourself First) नियम अपनाते हैं, यानी कमाई आते ही सबसे पहले उसका एक हिस्सा निवेश में डालते हैं और बचे हुए रुपये से खर्चे चलाते हैं.
Q5 क्या रुपया डूबने के डर से निवेश बंद कर देना चाहिए?
बिल्कुल नहीं, विजेता कभी हारने से नहीं डरते. नुकसान से डरने वाले लोग कभी निवेश नहीं करते और जीवन भर आर्थिक रूप से पीछे रह जाते हैं.