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हम में से ज्यादातर लोग जब अपने रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं तो एक जादुई आंकड़ा दिमाग में आता है - 'एक करोड़ रुपए'. इसका कारण है कि करोड़ की वैल्यू आज भी काफी ज्यादा है और भारत में ऐसे तमाम लोग हैं जो इस आंकड़े के आसपास भी नहीं हैं. ऐसे में उन्हें लगता है कि अगर रिटायरमेंट तक 1 करोड़ रुपए जमा कर लिए, तो जिंदगी आराम से कट जाएगी. फाइनेंशियल प्लानर्स भी अक्सर SIP के जरिए 1 करोड़ का फंड बनाने के प्लान बताते हैं.
लेकिन खयाली पुलाव पकाने से पहले जरा रुकिए और ये सोचिए कि अगर आपकी उम्र अभी 30 साल है और आप अगर अब से रिटायरमेंट प्लानिंग शुरू करते हैं, तो आज से 30 साल बाद, यानी 60 में जब आप असल में रिटायर होंगे, तो उस 1 करोड़ रुपए की असली कीमत क्या होगी? अगर आप वास्तव में चाहते हैं कि आपका बुढ़ापा आराम से बीते और पूरी तरह से 'फ्यूचर-प्रूफ' (Future-Proof) बने, तो आपको आज से ही 5 काम जरूर कर लेने चाहिए.
महंगाई वो 'साइलेंट किलर' है जो चुपके से आपके पैसे की ताकत को कम करती जाती है. भारत में लंबी अवधि में महंगाई की औसत दर 6% के आसपास रही है.
अगर हम 6% की औसत महंगाई दर मानकर चलें, तो:
30 साल बाद के ₹1 करोड़ की आज की कीमत सिर्फ ₹17.41 लाख होगी.
इसका मतलब है, जो लाइफस्टाइल आप आज 17-18 लाख रुपए में जी सकते हैं, 30 साल बाद उसी के लिए आपको 1 करोड़ रुपए खर्च करने पड़ेंगे.
तो, अगर आप चाहते हैं कि रिटायरमेंट के बाद आपकी खरीदने की क्षमता आज के 1 करोड़ रुपए के बराबर हो, तो आपको 30 साल बाद लगभग ₹5.74 करोड़ का फंड बनाना होगा!
रिटायरमेंट के बाद हमारी आमइदनी तो बंद हो जाती है, लेकिन एक खर्च है जो उम्र के साथ बढ़ता ही जाता है - मेडिकल का खर्च. भारत में मेडिकल महंगाई दर 14-15% के आसपास है, जो सामान्य महंगाई से दोगुनी से भी ज्यादा है. एक छोटी सी बीमारी या सर्जरी भी आपकी जिंदगी भर की बचत को कुछ ही दिनों में खत्म कर सकती है.
सबसे पहला काम है अपने 1 करोड़ के लक्ष्य को भूल जाना.ऑनलाइन 'इन्फ्लेशन कैलकुलेटर' का इस्तेमाल करें और ये समझें कि आज के खर्चों के हिसाब से आपको 20, 30 या 40 साल बाद कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी. 1 करोड़ का नहीं, बल्कि Inflation-Adjusted लक्ष्य बनाएं, जो शायद 3, 4, या 5 करोड़ रुपए हो.
रिटायरमेंट के लिए सिर्फ सेविंग अकाउंट या FD पर भरोसा करना गलत है. आपको ऐसे एसेट्स चुनने होंगे जो महंगाई से तेज रिटर्न दे सकें.
इतने बड़े लक्ष्य को देखकर डरना स्वाभाविक है. लेकिन इसका समाधान भी बहुत आसान है. आपको हर साल अपनी SIP की रकम को अपनी सैलरी बढ़ोतरी के साथ-साथ बढ़ाते जाना है.
मान लीजिए आप 10,000 रुपए महीने की SIP से शुरू करते हैं, 'स्टेप-अप SIP' में आप हर साल अपनी SIP की रकम को 10% बढ़ा देते हैं (पहले साल 10,000, दूसरे साल 11,000, तीसरे साल 12,100, और इसी तरह). हर साल 10% रकम को बढ़ाते रहें. इससे आप तेजी से अपने लक्ष्य पर पहुंचेंगे.
आपका 5 करोड़ का रिटायरमेंट फंड भी बेकार हो जाएगा अगर वो किसी एक बड़ी बीमारी के इलाज में खत्म हो जाए. इसलिए रिटायरमेंट फंड के साथ हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल प्लानिंग करें.
IRDAI डेटा के मुताबिक भारत में मेडिकल इंफ्लेशन 10-12% सालाना की दर से बढ़ रहा है. यानी अगर आज 5 लाख रुपये का ऑपरेशन होता है तो 30 साल बाद वही सर्जरी 80-90 लाख रुपये तक हो सकती है.
सिर्फ सेविंग्स और पेंशन पर निर्भर रहना रिस्की है. आपको ऐसे पैसिव इनकम सोर्स बनाने होंगे जो रिटायरमेंट के बाद भी चलते रहें.
अगर आपके पास रिटायरमेंट तक 20,000 रुपए की फिक्स पैसिव इनकम है तो सालाना करीब 2.4 लाख रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. रिटायरमेंट पीरियड में ये करीब 50 लाख रुपए या इससे भी ज्यादा का फर्क पैदा कर सकते हैं.
नहीं. महंगाई को ध्यान में रखें तो 30 साल बाद 1 करोड़ की वैल्यू काफी घट जाएगी.
ये आपकी लाइफस्टाइल पर निर्भर करता है. लेकिन सामान्य तौर पर आज की तारीख में 5-7 करोड़ का कॉर्पस रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त माना जाता है.
जितनी जल्दी हो सके. अगर आप 25-30 की उम्र में शुरू करते हैं तो छोटी-छोटी SIP भी करोड़ों का फंड बना सकती है.
क्योंकि मेडिकल इंफ्लेशन बाकी महंगाई से कहीं ज्यादा है. सही हेल्थ कवर आपके कॉर्पस को सुरक्षित रखता है.