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SBI Research की एक ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नए लेबर कोड लागू होने के बाद देश में रोजगार और उपभोग दोनों पर पॉज़िटिव असर पड़ेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, New Labour Code लागू होने के बाद देश की बेरोजगारी दर लगभग 1.3% तक कम हो सकती है. इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में लगभग 77 लाख नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं. हालांकि नए लेबर कोड का ये असर रिफॉर्म्स के लागू होने, फर्म लेवल पर एडजस्टमेंट कॉस्ट और कॉम्प्लीमेंट्री राज्य-स्तरीय नियमों जैसे फैक्टर्स पर निर्भर करेगा.
एसबीआई के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्या कांति घोष के मुताबिक, जब रोजगार बढ़ेगा तो लोगों की जेब में पैसा भी बढ़ेगा और इससे खर्च भी बढ़ेगा. उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 30% सेविंग रेट है और अगर लेबर कोड लागू होता है तो औसतन 66 रुपए प्रति व्यक्ति प्रति दिन खर्च बढ़ सकता है. इसका कुल योग लगभग 75,000 करोड़ रुपए होगा, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी तेजी आएगी.
भारत में करीब 44 करोड़ लोग असंगठित सेक्टर में काम करते हैं. इनमें से 31 करोड़ ई-श्रम पोर्टल पर रजिस्टर्ड हैं. रिपोर्ट का अनुमान है कि अगर इनमे से सिर्फ 20% लोग भी अनौपचारिक सेक्टर से फॉर्मल सेक्टर में शिफ्ट होते हैं, तो लगभग 10 करोड़ लोगों को सीधा फायदा मिलेगा. इस बदलाव के बाद भारत में सोशल सिक्योरिटी कवरेज अगले 2-3 साल में 80-85% तक पहुंच सकता है.
पीएलएफएस डेटा के मुताबिक अभी भारत में 60.4% वर्कफोर्स फॉर्मल सेक्टर में है. लेबर कोड लागू होने के बाद यह दर बढ़कर 75.5% तक पहुंच सकती है. इससे श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा, मेडिकल, पीएफ, ग्रेच्युटी और बेहतर नौकरी सुरक्षा का लाभ मिलेगा, जबकि कंपनियों में पारदर्शिता और कानूनों का पालन सुनिश्चित होगा.