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विदेशों में रिसर्च कर रहे भारतीयों को देश में मिलेंगे बेहतर मौके (फोटो- रॉयटर्स)
विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय विदेशों में रह रहे भारतीय अनुसंधानकर्ताओं Indian researchers को भारतीय संस्थानों और यूनिवर्सिटीज में काम करने के लिए बेहतर मौके उपलब्ध कराएगी. इसके लिए सरकार आकर्षक स्कीम लेकर आई है. आइये जानते हैं क्या है ये स्कीम.
विजिटिंग एडवांस्ड ज्वाइंट रिसर्च (Visiting Advanced Joint Research) फ़ैकल्टी स्कीम: इस स्कीम के तहत प्रवासी भारतीयों (NRI) और विदेशी भारतीय नागरिकों (OCI) सहित विदेशी वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को सार्वजनिक वित्त पोषित संस्थानों Public funded institutions और यूनिवर्सिटीज में एक तय समय तक काम करने के लिए, भारत आने का ऑफर दिया जाएगा. इस योजना के तहत भारतीय शोधकर्ताओं सहित विदेशी वैज्ञानिकों को एक या एक से अधिक भारतीय सहयोगियों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अत्याधुनिक क्षेत्रों में रिसर्च करने के लिए विजिटिंग फैकल्टी असाइनमेंट दिया जाएगा.
रामानुजन फेलोशिप: ये फेलोशिप विदेश में रह रहे बेहतर योग्यता वाले भारतीय शोधकर्ताओं को भारतीय संस्थानों या विश्वविद्यालयों में काम करने के लिए विज्ञान, इंजीनियरिंग और चिकित्सा के सभी क्षेत्रों में बेहतर मौके देती है. ये फेलोशिप विदेश से भारत लौटने की इच्छा रखने वाले 40 साल से कम उम्र के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को ध्यान में रख कर तैयार की गई है.
रामलिंगस्वामी re-entry fellowship: इस फेलोशिप के तहत देश के बाहर काम कर रहे उन वैज्ञानिकों (भारतीय नागरिकों) को प्रोत्साहित करने की योजना है जो जीवन विज्ञान, आधुनिक जीव विज्ञान, बॉयो टेक्नॉलाजी और इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों में अपनी रिसर्च पर काम करने के लिए स्वदेश लौटना चाहेंगे.
बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम (BRCP): यह कार्यक्रम शुरुआती, मध्यवर्ती और वरिष्ठ स्तर के शोधकर्ताओं को भारत में बेसिक बायोमेडिकल या क्लिनिकल एंड पब्लिक हेल्थ में अपनी रिसर्च और अकेडमिक करियर के बेहतर मौके देता है. इस फेलोशिप के लिए वे सभी योग्य researchers अप्लाई कर सकते हैं जो भारत में काम करना जारी रखना चाहते हैं.
भारतीय रिसर्च लैब्रोरेट्रीज में भारतीय मूल के वैज्ञानिक/प्रौद्योगिकीविद (STIO): भारतीय मूल के वैज्ञानिकों / प्रौद्योगिकीविदों (STIO) को वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) प्रयोगशालाओं में कांट्रेक्ट के आधार पर नौकरी की व्यवस्था की गई है. इससे उन्हें अपनी रिसर्च को जारी रखने में मदद मिलेगी.
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वरिष्ठ अनुसंधान एसोसिएटशिप (SRA) (वैज्ञानिक पूल योजना): इस योजना के तहत खास तौर पर विदेशों से लौट रहे उन भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, प्रौद्योगिकीविदों और चिकित्सा कार्मिकों को अस्थायी प्लेसमेंट दिया जाता है जिनका भारत में कोई रोजगार नहीं है.