&format=webp&quality=medium)
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (HCL) और गेल इंडिया लिमिटेड (GAIL) मिलकर क्रिटिकल मिनरल्स और तांबे की खोज के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं. Zee Business को एक्सक्लूसिव जानकारी मिली है कि दोनों सरकारी कंपनियां अगले दो हफ्तों में एक अहम समझौते (MoU) पर दस्तखत कर सकती हैं. वैसे इस रणनीतिक साझेदारी का मकसद ना केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी जरूरी मिनरल्स की खोज और आपूर्ति सुनिश्चित करना है, जो देश की आत्मनिर्भरता को मजबूती देने वाला है.
HCL के सीनियर अधिकारियों का कहना है कि हिंदुस्तान कॉपर और गेल की यह साझेदारी देश की खनिज रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकती है. वैसे इस सहयोग का अहम फोकस कॉपर, लिथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिजों पर होगा, जो भारत की क्लीन एनर्जी योजनाओं और हाईटेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बहुत जरूरी हैं.वैसे यह कदम भारत को खनिज आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत करेगा.
सूत्रों के मुताबिक, हिंदुस्तान कॉपर और गेल के बीच होने वाला यह समझौता भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी क्रिटिकल मिनरल्स की खोज का रास्ता खोलेगा.आपको बता दें कि इसका मकसद है एक ऐसी सप्लाई चेन बनाना जो मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हो, जिससे देश की ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतें सुरक्षित की जा सकें.
यानी कि साफ है यह कदम सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ योजना के तहत खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा भी है.
गौरतलब है कि हाल ही में हिंदुस्तान कॉपर और गेल की यह साझेदारी ऐसे समय में सामने आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिली का दौरा किया,जो कॉपर और लिथियम जैसे अहम मिनरल्स का बड़ा उत्पादक देश है. पीएम की इस यात्रा के दौरान भारत और चिली ने माइनिंग सेक्टर में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति जताई गई है. इसके साथ ही व्यापार, निवेश और मिनरल स्थिरता को लेकर एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर बातचीत शुरू करने की बात भी सामने आई है.
HCL और GAIL की यह संभावित डील सिर्फ एक आम साझेदारी नहीं, बल्कि भारत की नई खनिज रणनीति का बड़ा संकेत भी है. इसका उद्देश्य दोहरा है एक ओर जहां घरेलू संसाधनों को मजबूत किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर मजबूत सहयोग स्थापित कर देश की मिनरल सिक्योरिटीऔर आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई दी जाएगी.
बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अब तेजी से एक्शन मोड में है. सरकार का फोकस है सही रणनीतिक साझेदार बनाना और जरूरी खनिज संसाधनों की समय रहते सुरक्षा करना, ताकि आने वाले सालों में देश का ऊर्जा और औद्योगिक भविष्य पूरी तरह से मजबूत और आत्मनिर्भर बन सके.