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उत्तर प्रदेश में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी करने वालों की खैर नहीं है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ संदेश दे दिया है कि आम जनता के हक की गैस चोरी करने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. 12 मार्च से शुरू हुए इस महा-अभियान ने पूरे प्रदेश के गैस वितरकों और अवैध धंधा करने वालों में हड़कंप मचा दिया है.
योगी सरकार की प्रवर्तन एजेंसियां (Enforcement Agencies) इस समय पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं. छापेमारी की रफ्तार का अंदाजा आप इन आंकड़ों से लगा सकते हैं:
दर्ज एफआईआर (FIR): कुल 70 मुकदमे दर्ज हुए.
वितरकों (Distributors) के खिलाफ: 10 एफआईआर.
अन्य अवैध विक्रेताओं के खिलाफ: 60 एफआईआर.
गिरफ्तारी: मौके से 10 लोग गिरफ्तार किए गए.
कानूनी कार्रवाई: 67 व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई (अभियोजन) शुरू की गई है.
प्रदेश में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने केवल छापेमारी ही नहीं की, बल्कि सिस्टम को भी मजबूत किया है.
डिलीवरी की निगरानी: प्रदेश के सभी 4108 एलपीजी वितरकों पर नजर रखी जा रही है कि वे बुकिंग के हिसाब से सिलेंडर दे रहे हैं या नहीं.
स्टॉक समीक्षा: अधिकारी नियमित रूप से गोदामों के स्टॉक की जांच कर रहे हैं ताकि कृत्रिम किल्लत (Artificial Scarcity) पैदा न की जा सके.
कमर्शियल सिलेंडर पर सख्ती: केंद्र सरकार ने वाणिज्यिक (Commercial) सिलेंडरों के 20% आवंटन की जो अनुमति दी है, उसके सही क्रियान्वयन पर कड़ी सतर्कता बरती जा रही है.
उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए लखनऊ से लेकर जिलों तक एक मजबूत तंत्र खड़ा किया गया है.
राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम: खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाया गया है. यहां खाद्य एवं रसद विभाग के अधिकारी तैनात हैं.
जिला स्तरीय निगरानी: हर जिले में अलग से कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं.
फील्ड में अधिकारी: जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार मार्केट में भ्रमण कर रही हैं ताकि कोई भी अवैध रूप से गैस की रिफिलिंग न कर सके.
योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि घरेलू सिलेंडरों का कमर्शियल इस्तेमाल या एक सिलेंडर से दूसरे में गैस पलटना (Refilling) संगीन अपराध माना जाएगा.
सप्लाई चेन: रिफिल की उपलब्धता पर रोजाना रिपोर्ट ली जा रही है.
पेट्रोल-डीजल पर भी नजर: एलपीजी के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल की सप्लाई और गुणवत्ता की भी जांच की जा रही है.
योगी सरकार का यह एक्शन दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में अब बिचौलियों और माफियाओं के लिए कोई जगह नहीं है. 4816 छापेमारी महज एक शुरुआत है. सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि उज्ज्वला योजना और सामान्य कनेक्शन वाले हर उपभोक्ता को बिना किसी अतिरिक्त कीमत या परेशानी के अपना सिलेंडर मिल सके.
1- क्या आम लोग भी कालाबाजारी की शिकायत कर सकते हैं?
हां, उत्तर प्रदेश खाद्य एवं रसद विभाग के टोल-फ्री नंबर या जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) के कंट्रोल रूम में 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
2- गैस वितरकों के खिलाफ एफआईआर क्यों की गई?
मुख्य रूप से स्टॉक में गड़बड़ी, ओवररेटिंग (तय कीमत से ज्यादा वसूलना) और बुकिंग के बावजूद सिलेंडर न देने के कारण ये कार्रवाई की गई है.
3- योगी सरकार का यह अभियान कब तक चलेगा?
यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, लेकिन वर्तमान में विशेष प्रवर्तन अभियान के तहत 12 मार्च से सघन चेकिंग की जा रही है.
4- कमर्शियल सिलेंडर के 20% आवंटन का क्या नियम है?
केंद्र सरकार ने कुल खपत के 20% तक वाणिज्यिक सिलेंडरों के आवंटन की अनुमति दी है, जिसकी निगरानी अब यूपी सरकार सख्ती से कर रही है ताकि इसका दुरुपयोग न हो.
5- अगर मेरा गैस वितरक सिलेंडर देने में देरी करे तो क्या करें?
आप तुरंत अपने जिले के जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में संपर्क करें या सरकार द्वारा स्थापित 24x7 कंट्रोल रूम में शिकायत करें.
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