पेट्रोल-डीजल और गैस पर योगी सरकार सख्त, प्रदेश भर में 12700 से ज्यादा छापेमारी, 16 गिरफ्तार, 24 घंटे खुलेगा कंट्रोल रूम!

उत्तर प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और LPG की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने 'जीरो टॉलरेंस' नीति अपनाई है. 12 मार्च 2026 से प्रदेश भर में कालाबाजारी और अवैध बिक्री के खिलाफ 12,732 छापेमारी की गई है. सरकार ने सख्त संदेश देते हुए 25 वितरकों सहित कुल 177 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है.
पेट्रोल-डीजल और गैस पर योगी सरकार सख्त, प्रदेश भर में 12700 से ज्यादा छापेमारी, 16 गिरफ्तार, 24 घंटे खुलेगा कंट्रोल रूम!

उत्तर प्रदेश में ईंधन की आपूर्ति को लेकर मची अफरा-तफरी के बीच योगी सरकार ने मोर्चा संभाल लिया है. पिछले कुछ दिनों में जिस तरह से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कालाबाजारी की खबरें आ रही थीं, उसे देखते हुए प्रशासन ने 'ताबड़तोड़' कार्रवाई शुरू कर दी है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि किसी भी उपभोक्ता को ईंधन के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और जो लोग आपदा में अवसर तलाश रहे हैं, उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाएगा. आइए, इस बड़ी कार्रवाई के मुख्य आंकड़ों और सरकारी इंतजामों को समझते हैं.

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आंकड़ों में बड़ी कार्रवाई (12 मार्च से अब तक)

सरकार की सख्ती का अंदाजा आप इन नंबरों से लगा सकते हैं:

कुल छापेमारी/निरीक्षण: 12,732 (प्रदेश भर में).

एलपीजी वितरकों पर गाज: 25 वितरकों के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं के लिए FIR दर्ज.

अन्य आरोपी: कालाबाजारी में शामिल 152 अन्य व्यक्तियों पर भी मुकदमे दर्ज.

गिरफ्तारी और एक्शन: अब तक 16 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 185 लोगों के खिलाफ कानूनी अभियोजन (Prosecution) शुरू हो चुका है.

सप्लाई चैन को मजबूत करने के 3 बड़े कदम

सिर्फ छापेमारी ही नहीं, बल्कि सरकार ने आपूर्ति बढ़ाने के लिए भी 'मल्टी-लेयर' व्यवस्था लागू की है:

20% अतिरिक्त आवंटन: भारत सरकार के सहयोग से 23 मार्च 2026 से कमर्शियल गैस सिलेंडरों के आवंटन में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई है. इससे बाजार में गैस की कमी नहीं होगी.

निर्बाध रिफिल डिलीवरी: प्रदेश के 4,108 एलपीजी वितरकों को आदेश दिया गया है कि बुकिंग के अनुसार उपभोक्ताओं को तुरंत रिफिल पहुंचाई जाए. फिलहाल पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

कंट्रोल रूम की तैनाती: खाद्य आयुक्त कार्यालय में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम बनाया गया है. अगर आपको कोई समस्या है, तो आप तुरंत यहां सूचना दे सकते हैं.

फील्ड में अधिकारियों की 'पैनी नजर'

मुख्य सचिव ने सभी DM (जिलाधिकारियों) को निर्देश दिए हैं कि वे खुद स्थिति की निगरानी करें.

जिला पूर्ति अधिकारी (DSO): स्थानीय प्रशासन और आपूर्ति विभाग के अधिकारी लगातार फील्ड में घूम रहे हैं.

होम कंट्रोल रूम: खाद्य एवं रसद विभाग के बड़े अधिकारियों को सीधे निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि कहीं भी पैनिक (Panic) वाली स्थिति न बने.

उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?

सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त स्टॉक है. लोगों को घबराने (Panic Buying) की जरूरत नहीं है. यदि कोई वितरक आपसे अतिरिक्त पैसे मांगे या गैस देने से मना करे, तो आप तुरंत जिला प्रशासन या कंट्रोल रूम को शिकायत कर सकते हैं.

Conclusion

योगी सरकार की यह कार्रवाई दिखाती है कि प्रशासन अब किसी भी तरह की 'आर्टिफिशियल किल्लत' बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. छापेमारी और 20% अतिरिक्त आवंटन जैसे कदमों से अगले 2-3 दिनों में स्थिति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है. यह उन लोगों के लिए भी कड़ा सबक है जो जरूरी चीजों की जमाखोरी कर रहे थे.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- क्या यूपी में गैस की कमी है?

नहीं, सरकार के अनुसार स्टॉक पर्याप्त है और 20% अतिरिक्त आवंटन भी शुरू हो गया है.

2- अगर मेरा गैस वितरक सिलेंडर नहीं दे रहा तो क्या करूं?

आप जिले के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) से संपर्क करें या 24 घंटे चलने वाले स्टेट कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराएं.

3- 20% अतिरिक्त आवंटन केवल कमर्शियल सिलेंडर के लिए है?

फिलहाल कमर्शियल सप्लाई को सुदृढ़ करने के लिए यह फैसला लिया गया है, जिससे घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी पर भी रोक लगेगी.

4- यह छापेमारी कब तक चलेगी?

जब तक पूरे प्रदेश में आपूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो जाती, तब तक सघन जांच अभियान जारी रहेगा.

5- क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव हुआ है?

यह कार्रवाई केवल आपूर्ति (Supply) सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने के लिए है, कीमतों पर फिलहाल कोई नया सरकारी आदेश नहीं है.

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