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Women's Day 2025: महिलाएं अब न केवल घर की चारदीवारी से बाहर निकल रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रही हैं. वे खेत-खलिहानों, खदानों और फैक्ट्रियों में काम करने के साथ-साथ रेल और हवाई जहाज भी चला रही हैं. यही नहीं, वे अपने पैसों को संभालना और बचत करना भी सीख रही हैं. डीबीएस बैंक इंडिया (DBS Bank India) ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2025 से पहले एक नई रिपोर्ट जारी की है, जिसमें बताया गया है कि भारत की 90% ग्रामीण महिला उद्यमी अपनी मासिक आय का कुछ हिस्सा बचाती हैं.
यह रिपोर्ट डीबीएस बैंक ने सामाजिक संगठन हक़दर्शक (Haqdarshak) के साथ मिलकर तैयार की है. सर्वेक्षण मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के ग्रामीण जिलों की 411 महिला उद्यमियों के बीच किया गया, जिनमें से 402 महिलाएं स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, 57% महिलाएं अपनी मासिक आय का 20% से कम बचाती हैं, 33% महिलाएं 20-50% के बीच बचत करती हैं, जबकि 5% महिलाएं अपनी आय का 50% से अधिक बचाती हैं. हालांकि, कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं, जिन्हें यह पता ही नहीं होता कि वे कितना बचा रही हैं. इसका मतलब है कि वित्तीय साक्षरता और बेहतर योजना की आवश्यकता है.
56% महिलाएं बैंक में पैसे जमा करती हैं.
39% महिलाएं SHG की बचत योजनाओं में हिस्सा लेती हैं.
18% महिलाएं नकद राशि घर पर ही जमा रखती हैं.
केवल 11% महिलाएं फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या रेकरिंग डिपॉजिट (RD) में निवेश करती हैं.
सिर्फ़ 5% महिलाएं सोने में निवेश करती हैं.
64% महिलाएं अपने व्यवसाय के मुनाफे को फिर से अपने कारोबार में निवेश करती हैं.
रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि 18% ग्रामीण महिला उद्यमी अपने वित्तीय फैसले खुद लेती हैं, जबकि 47% महिलाएं अपने पति के साथ मिलकर फैसले करती हैं. वहीं, 24% महिलाओं के वित्तीय निर्णय उनके पति लेते हैं और 11% महिलाएं अपने परिवार के अन्य सदस्यों की सलाह पर निर्भर रहती हैं. ये आंकड़े दिखाते हैं कि महिलाएं अब वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में बढ़ रही हैं, लेकिन पारंपरिक सोच अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. डीबीएस बैंक इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और ग्रुप स्ट्रेटेजिक मार्केटिंग एंड कम्युनिकेशंस प्रमुख अज़मत हबीबुल्ला ने कहा कि हमारी रिपोर्ट महिला उद्यमियों को समर्थन देने और उनकी प्रगति में बाधा बनने वाली समस्याओं को समझने में मदद करेगी.