करोड़पति बनते ही भारत क्यों छोड़ रहे हैं लोग, 2025 को लेकर Henley की रिपोर्ट हैरान कर देगी

Henley Private Wealth Migration Report 2025 के मुताबिक भारत से करोड़पतियों का पलायन लगातार जारी है. ये अमीर खासकर UAE, अमेरिका और पुर्तगाल जैसे देशों को वे नया ठिकाना बना रहे हैं.
करोड़पति बनते ही भारत क्यों छोड़ रहे हैं लोग, 2025 को लेकर Henley की रिपोर्ट हैरान कर देगी

करोड़पति बनते ही भारत क्यों छोड़ रहे हैं लोग

पिछले कुछ वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में जबरदस्त तेजी आई है. स्टार्टअप्स, शेयर बाजार और पारिवारिक व्यवसायों के ज़रिए करोड़पति बनने वालों की संख्या में अच्छा-खासा उछाल आया है. लेकिन इसके साथ ही एक और ट्रेंड दिख रहा है, जैसे ही लोग करोड़पति बनते हैं, वे भारत छोड़ने की योजना बनाने लगते हैं. Henley Private Wealth Migration Report 2025 के आंकड़े बताते हैं कि ये सिलसिला 2025 में भी बदस्तूर जारी रहेगा.

Henley रिपोर्ट का चौंकाने वाला खुलासा

Henley Private Wealth Migration Report 2025 के अनुसार, साल 2025 में भारत से करीब 3,500 हाई नेट वर्थ इंडिविजुअल्स (HNWIs) देश छोड़ देंगे. भले ही यह आंकड़ा 2023 और 2024 के मुकाबले थोड़ा कम है, लेकिन यह अब भी दुनिया में सबसे ज्यादा है.

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इन अमीरों के साथ लगभग 26.2 अरब डॉलर की संपत्ति भी भारत से बाहर चली जाएगी. वहीं दूसरी ओर, यूएई सबसे बड़ा लाभार्थी देश बनकर उभरा है, जहां साल 2025 में 9,800 करोड़पतियों के बसने की उम्मीद है. अमेरिका, पुर्तगाल और सिंगापुर जैसे देशों में भी बड़ी संख्या में भारतीय अमीर जा रहे हैं.

UAE गोल्डन वीज़ा की वायरल अफवाह

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से फैली कि यूएई सिर्फ 23 लाख रुपए में भारत और बांग्लादेश के नागरिकों को लाइफटाइम गोल्डन वीज़ा दे रहा है. कई मीडिया हाउसेज़ ने इसे छापा भी, लेकिन 7 जुलाई को यूएई की सरकारी समाचार एजेंसी WAM ने इस खबर को खारिज कर दिया. हालांकि, यह अफवाह अचानक नहीं फैली. यह उसी वैश्विक ट्रेंड का हिस्सा है जिसे “ग्लोबल वेल्थ माइग्रेशन” कहा जाता है, यानी अमीर लोगों का एक देश से दूसरे देश में बस जाना.

भारत छोड़ने की ये है सबसे बड़ी वजह

भारतीय अमीरों के देश छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण टैक्स का बढ़ता दबाव है. FY25 की पहली तिमाही में CBDT ने 20,000 करोड़ रुपए की टैक्स रिकवरी की, जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी है. टैक्स डिमांड अब 42 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. इसके अलावा भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से डिजिटल और फॉर्मल हो रही है.

UPI से लेकर GST, आधार-पैन लिंकिंग और MSME रजिस्ट्रेशन जैसे कदमों ने टैक्स छिपाने की गुंजाइश लगभग खत्म कर दी है. FY 2024-25 में UPI के ज़रिए 261 लाख करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन हुए, जिससे अब हर कमाई की डिजिटल ट्रैकिंग आसान हो गई है.

क्रिप्टो पर सख्ती ने निवेशकों को खींचा बाहर

क्रिप्टोकरेंसी को लेकर भारत सरकार का रवैया कड़ा हो गया है. अब इनकम पर 30 फीसदी का फ्लैट टैक्स और ट्रांजेक्शन पर 1 फीसदी TDS लगाया जाता है, भले ही उसमें घाटा ही क्यों न हो. इससे बड़े निवेशकों ने भारतीय एक्सचेंज छोड़कर विदेशी प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख करना शुरू कर दिया है.

इन वजहों से भी देश छोड़ रहे अमीर भारतीय

केवल टैक्स ही नहीं, बल्कि बेहतर हेल्थकेयर, एजुकेशन, पासपोर्ट पावर और ग्लोबल ट्रैवल एक्सेस भी उन कारणों में शामिल हैं जिनके चलते अमीर भारतीय विदेशों को चुन रहे हैं. Kotak Private और EY के पार्टनरशिप वाले एक सर्वे के मुताबिक, 22 फीसदी अल्ट्रा रिच भारतीय देश छोड़ने की योजना बना रहे हैं, ताकि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य दे सकें और बिजनेस के लिए आसान माहौल मिल सके.

भारत छोड़कर कहां बस रहे देश के करोड़पति

भारत के अमीरों की सबसे पसंदीदा जगहों में यूएई सबसे ऊपर है. इसकी बड़ी वजह है वहां की टैक्स फ्री इनकम, शानदार जीवनशैली और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने वाली गोल्डन वीज़ा स्कीम. यहां रहना न केवल आसान है, बल्कि व्यापार के लिए भी बेहतर माहौल उपलब्ध है.

अमेरिका भी अमीर भारतीयों की पहली पसंद में शामिल है. यहां का EB-5 वीज़ा प्रोग्राम काफी लोकप्रिय है, जिसमें करीब 8 लाख डॉलर का निवेश करना होता है और बदले में 10 नौकरियों का क्रिएशन जरूरी होता है. इसके बाद निवेशकों को अमेरिका में ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास की सुविधा मिल जाती है.

हाल ही में अमेरिका में एक नई योजना की चर्चा तेज हुई है, जिसे "ट्रंप गोल्ड कार्ड" कहा जा रहा है. इसके तहत 5 मिलियन डॉलर यानी लगभग 40 करोड़ रुपए के निवेश पर स्थायी अमेरिकी नागरिकता देने का प्रस्ताव रखा गया है. हालांकि, यह स्कीम फिलहाल केवल एक प्रस्ताव है और अभी इसे कानूनी मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन अमीर भारतीयों में इसकी चर्चा जोरों पर है.

इसके अलावा पुर्तगाल भी एक आकर्षक विकल्प बनकर उभरा है. यहां की गोल्डन वीज़ा स्कीम के तहत केवल पांच साल के बाद नागरिकता मिल सकती है. इसके साथ ही, पुर्तगाल की नागरिकता मिलने पर शेंगेन ज़ोन में वीज़ा फ्री यात्रा, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाएं और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जीवनशैली का लाभ मिलता है.

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