क्या होता है Masked Aadhaar Card, क्या हैं इसके फायदे? इसे कहां इस्‍तेमाल कर सकते हैं और कहां पर नहीं!

मास्क्ड आधार कार्ड (Masked Aadhaar Card) आपके आधार की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल ताला है. ये एक ऐसा ई-आधार है जिसमें आपके 12 अंकों के नंबर में से शुरुआती 8 अंक छिपे होते हैं और सिर्फ आखिरी 4 दिखते हैं. जानिए इसे कैसे डाउनलोड कर सकते हैं, क्‍या हैं इसके फायदे, इसे कहां कर सकते हैं इस्‍तेमाल? जानिए सबकुछ.
क्या होता है Masked Aadhaar Card, क्या हैं इसके फायदे? इसे कहां इस्‍तेमाल कर सकते हैं और कहां पर नहीं!

आज के डिजिटल दौर में आधार कार्ड हमारी पहचान का सबसे जरूरी दस्तावेज बन गया है. बैंक अकाउंट खोलने से लेकर सिम कार्ड लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक, हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है. लेकिन जैसे-जैसे इसका इस्तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे इसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ा है. कई बार हमें ऐसी जगहों पर भी अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी देनी पड़ती है, जहां उसकी जरूरत नहीं होती. ऐसे में ये डर बना रहता है कि कहीं हमारे 12 अंकों के यूनिक नंबर का कोई गलत फायदा न उठा ले.

इसी समस्या का समाधान है 'मास्क्ड आधार कार्ड'. ये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की तरफ से दी गई एक बेहतरीन सुविधा है, जो आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा को कई गुना बढ़ा देती है. आइए समझते हैं ये आखिर है क्या, इसके फायदे क्या हैं और आप इसे कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं.

मास्क्ड आधार कार्ड आखिर है क्या?

मास्क्ड आधार, आपके सामान्य ई-आधार का ही एक खास वर्जन है. जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इसमें आपके 12 अंकों के आधार नंबर को 'मास्क' यानी छिपा दिया जाता है. जब आप मास्क्ड आधार डाउनलोड करते हैं, तो उसमें आपके आधार नंबर के शुरुआती 8 अंक दिखाई नहीं देते. उनकी जगह पर "XXXX-XXXX" लिखा होता है और सिर्फ आखिरी के 4 अंक ही दिखते हैं.

उदाहरण देखिए

अगर आपका आधार नंबर 1234 5678 9012 है, तो मास्क्ड आधार में वो XXXX-XXXX-9012 के रूप में दिखेगा. बाकी सभी जानकारी जैसे आपका नाम, पता, जन्मतिथि, लिंग और फोटो, सामान्य आधार कार्ड की तरह ही दिखाई देती है. इसमें भी एक सुरक्षित QR कोड होता है, जिसे स्कैन करके आपकी पहचान को सत्यापित किया जा सकता है.

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क्यों पड़ी मास्क्ड आधार की ज़रूरत?

UIDAI खुद ये सलाह देता है कि हर जगह अपने आधार कार्ड की कॉपी बिना सोचे-समझे शेयर न करें. कई बार हम होटल में चेक-इन करते समय, किसी जगह पर पहचान पत्र के तौर पर या सिम कार्ड लेते समय अपने आधार की पूरी कॉपी दे देते हैं. इन जगहों पर सत्यापन के लिए पूरे 12 अंकों के आधार नंबर की जरूरत नहीं होती. अगर ये कॉपी किसी गलत हाथ में पड़ जाए, तो आपके आधार नंबर का इस्तेमाल धोखाधड़ी या फ्रॉड के लिए किया जा सकता है. मास्क्ड आधार इसी जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है. ये सुनिश्चित करता है कि आपका काम भी हो जाए और आपकी पूरी जानकारी भी लीक न हो.

मास्क्ड आधार कार्ड के फायदे

आपकी प्राइवेसी की सुरक्षा

ये इसका सबसे बड़ा फायदा है. चूंकि आपका पूरा आधार नंबर सामने नहीं आता, इसलिए कोई भी इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता. आपकी व्यक्तिगत जानकारी काफी हद तक सुरक्षित रहती है.

धोखाधड़ी से बचाव

आधार से जुड़े फ्रॉड का खतरा काफी कम हो जाता है. स्कैमर्स को अगर आपका अधूरा आधार नंबर मिलता है, तो वो उनके किसी काम का नहीं होता. वो इसका इस्तेमाल किसी बैंक खाते या मोबाइल नंबर से अवैध रूप से लिंक करने के लिए नहीं कर सकते.

पूरी तरह वैलिड और कानूनी

UIDAI के नियमों के अनुसार, मास्क्ड आधार कार्ड पहचान और पते के प्रमाण के रूप में पूरी तरह से वैध है. आप इसे ट्रेन या फ्लाइट में यात्रा के दौरान, होटल में चेक-इन के लिए और जहां भी पहचान पत्र की जरूरत हो, वहां बिना किसी झिझक के इस्तेमाल कर सकते हैं.

डाउनलोड करना है बेहद आसान

आप इसे UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट से कुछ ही मिनटों में मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है.

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कहां इस्तेमाल करें और कहां नहीं?

ये समझना बहुत जरूरी है कि मास्क्ड आधार का इस्तेमाल कहां किया जा सकता है और कहां नहीं.

यहां करें इस्तेमाल

  • होटल और एयरपोर्ट पर पहचान पत्र के तौर पर.
  • ट्रेन में यात्रा के दौरान TTE को दिखाने के लिए.
  • नया सिम कार्ड लेते समय (जहां सिर्फ फिजिकल वेरिफिकेशन हो).
  • किसी भी निजी संस्थान में पहचान पत्र की फोटोकॉपी देने के लिए.

यहां इस्तेमाल करने से बचें

  • सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए, जैसे कि एलपीजी सब्सिडी, पेंशन, या मनरेगा. इन योजनाओं में सरकार को सीधे आपके बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर करना होता है, जिसके लिए पूरे आधार नंबर की जरूरत होती है.
  • बैंक में नया खाता खुलवाने, म्यूचुअल फंड में निवेश करने या डीमैट अकाउंट खोलने के लिए. इन जगहों पर e-KYC प्रक्रिया के लिए आपके पूरे आधार नंबर की जरूरत होती है.
  • सीधे शब्दों में कहें तो, जहां भी आपको सिर्फ पहचान या पते का प्रमाण देना है, वहां मास्क्ड आधार का इस्तेमाल करें. लेकिन जहां भी किसी वित्तीय सेवा या सरकारी सब्सिडी के लिए e-KYC की प्रक्रिया होनी है, वहां आपको सामान्य आधार ही देना होगा.

मास्क्ड आधार कार्ड कैसे डाउनलोड करें?

  • सबसे पहले UIDAI के myAadhaar पोर्टल (myaadhaar.uidai.gov.in) पर जाएं.
  • अपने 12 अंकों के आधार नंबर और दिए गए कैप्चा कोड को डालकर 'Send OTP' पर क्लिक करें. आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा.
  • OTP डालकर लॉग-इन करें.
  • डैशबोर्ड पर आपको 'Download Aadhaar' का ऑप्शन दिखेगा, उस पर क्लिक करें.
  • आपकी डिटेल स्क्रीन पर आ जाएगी. यहीं पर आपको एक चेकबॉक्स दिखेगा जिस पर लिखा होगा 'Do you want a masked Aadhaar?'. इस बॉक्स पर टिक कर दें.
  • अब 'Download' बटन पर क्लिक करें. आपका मास्क्ड आधार कार्ड PDF फॉर्मेट में डाउनलोड हो जाएगा.
  • ये PDF फाइल पासवर्ड से सुरक्षित होगी. इसका पासवर्ड आपके नाम के पहले 4 अक्षर (CAPITAL में) और आपके जन्म का वर्ष (YYYY फॉर्मेट में) होता है. जैसे, अगर आपका नाम ROHIT है और जन्म का साल 1995 है, तो आपका पासवर्ड ROHI1995 होगा.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या मास्क्ड आधार कार्ड कानूनी तौर पर मान्य है?

जी हां, UIDAI के अनुसार मास्क्ड आधार कार्ड पहचान और पते के प्रमाण के रूप में पूरी तरह से वैध है.

2. क्या मैं बैंक में KYC के लिए मास्क्ड आधार दे सकता हूं?

नहीं, बैंक खाता खोलने या वित्तीय सेवाओं के लिए जहां e-KYC की जरूरत होती है, वहां आपको अपना सामान्य आधार कार्ड ही देना होगा जिसमें पूरा 12 अंकों का नंबर हो.

3. क्या मास्क्ड आधार डाउनलोड करने के लिए कोई फीस लगती है?

नहीं, ये सुविधा पूरी तरह से मुफ्त है. आप इसे UIDAI की वेबसाइट से जितनी बार चाहें, डाउनलोड कर सकते हैं.

4. क्या मास्क्ड आधार कार्ड में QR कोड काम करता है?

हां, मास्क्ड आधार में दिया गया QR कोड पूरी तरह से काम करता है और उसे स्कैन करने पर आपकी पूरी डेमोग्राफिक जानकारी (नाम, पता, फोटो आदि) को सत्यापित किया जा सकता है.

5. मास्क्ड आधार और वर्चुअल आईडी (VID) में क्या अंतर है?

मास्क्ड आधार आपके आधार कार्ड का एक छिपा हुआ वर्जन है. वहीं, वर्चुअल आईडी (VID) एक 16-अंकों का अस्थायी नंबर है जिसे आप अपने आधार नंबर की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं. दोनों का मकसद आधार नंबर को सुरक्षित रखना है, लेकिन दोनों अलग-अलग चीजें हैं.

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