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आज के डिजिटल दौर में आधार कार्ड हमारी पहचान का सबसे जरूरी दस्तावेज बन गया है. बैंक अकाउंट खोलने से लेकर सिम कार्ड लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने तक, हर जगह इसकी जरूरत पड़ती है. लेकिन जैसे-जैसे इसका इस्तेमाल बढ़ा है, वैसे-वैसे इसके गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ा है. कई बार हमें ऐसी जगहों पर भी अपने आधार कार्ड की फोटोकॉपी देनी पड़ती है, जहां उसकी जरूरत नहीं होती. ऐसे में ये डर बना रहता है कि कहीं हमारे 12 अंकों के यूनिक नंबर का कोई गलत फायदा न उठा ले.
इसी समस्या का समाधान है 'मास्क्ड आधार कार्ड'. ये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की तरफ से दी गई एक बेहतरीन सुविधा है, जो आपकी प्राइवेसी और सुरक्षा को कई गुना बढ़ा देती है. आइए समझते हैं ये आखिर है क्या, इसके फायदे क्या हैं और आप इसे कैसे इस्तेमाल कर सकते हैं.
मास्क्ड आधार, आपके सामान्य ई-आधार का ही एक खास वर्जन है. जैसा कि नाम से ही जाहिर है, इसमें आपके 12 अंकों के आधार नंबर को 'मास्क' यानी छिपा दिया जाता है. जब आप मास्क्ड आधार डाउनलोड करते हैं, तो उसमें आपके आधार नंबर के शुरुआती 8 अंक दिखाई नहीं देते. उनकी जगह पर "XXXX-XXXX" लिखा होता है और सिर्फ आखिरी के 4 अंक ही दिखते हैं.
अगर आपका आधार नंबर 1234 5678 9012 है, तो मास्क्ड आधार में वो XXXX-XXXX-9012 के रूप में दिखेगा. बाकी सभी जानकारी जैसे आपका नाम, पता, जन्मतिथि, लिंग और फोटो, सामान्य आधार कार्ड की तरह ही दिखाई देती है. इसमें भी एक सुरक्षित QR कोड होता है, जिसे स्कैन करके आपकी पहचान को सत्यापित किया जा सकता है.

UIDAI खुद ये सलाह देता है कि हर जगह अपने आधार कार्ड की कॉपी बिना सोचे-समझे शेयर न करें. कई बार हम होटल में चेक-इन करते समय, किसी जगह पर पहचान पत्र के तौर पर या सिम कार्ड लेते समय अपने आधार की पूरी कॉपी दे देते हैं. इन जगहों पर सत्यापन के लिए पूरे 12 अंकों के आधार नंबर की जरूरत नहीं होती. अगर ये कॉपी किसी गलत हाथ में पड़ जाए, तो आपके आधार नंबर का इस्तेमाल धोखाधड़ी या फ्रॉड के लिए किया जा सकता है. मास्क्ड आधार इसी जोखिम को कम करने के लिए बनाया गया है. ये सुनिश्चित करता है कि आपका काम भी हो जाए और आपकी पूरी जानकारी भी लीक न हो.
ये इसका सबसे बड़ा फायदा है. चूंकि आपका पूरा आधार नंबर सामने नहीं आता, इसलिए कोई भी इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता. आपकी व्यक्तिगत जानकारी काफी हद तक सुरक्षित रहती है.
आधार से जुड़े फ्रॉड का खतरा काफी कम हो जाता है. स्कैमर्स को अगर आपका अधूरा आधार नंबर मिलता है, तो वो उनके किसी काम का नहीं होता. वो इसका इस्तेमाल किसी बैंक खाते या मोबाइल नंबर से अवैध रूप से लिंक करने के लिए नहीं कर सकते.
UIDAI के नियमों के अनुसार, मास्क्ड आधार कार्ड पहचान और पते के प्रमाण के रूप में पूरी तरह से वैध है. आप इसे ट्रेन या फ्लाइट में यात्रा के दौरान, होटल में चेक-इन के लिए और जहां भी पहचान पत्र की जरूरत हो, वहां बिना किसी झिझक के इस्तेमाल कर सकते हैं.
आप इसे UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट से कुछ ही मिनटों में मुफ्त में डाउनलोड कर सकते हैं. इसके लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है.

ये समझना बहुत जरूरी है कि मास्क्ड आधार का इस्तेमाल कहां किया जा सकता है और कहां नहीं.
जी हां, UIDAI के अनुसार मास्क्ड आधार कार्ड पहचान और पते के प्रमाण के रूप में पूरी तरह से वैध है.
नहीं, बैंक खाता खोलने या वित्तीय सेवाओं के लिए जहां e-KYC की जरूरत होती है, वहां आपको अपना सामान्य आधार कार्ड ही देना होगा जिसमें पूरा 12 अंकों का नंबर हो.
नहीं, ये सुविधा पूरी तरह से मुफ्त है. आप इसे UIDAI की वेबसाइट से जितनी बार चाहें, डाउनलोड कर सकते हैं.
हां, मास्क्ड आधार में दिया गया QR कोड पूरी तरह से काम करता है और उसे स्कैन करने पर आपकी पूरी डेमोग्राफिक जानकारी (नाम, पता, फोटो आदि) को सत्यापित किया जा सकता है.
मास्क्ड आधार आपके आधार कार्ड का एक छिपा हुआ वर्जन है. वहीं, वर्चुअल आईडी (VID) एक 16-अंकों का अस्थायी नंबर है जिसे आप अपने आधार नंबर की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं. दोनों का मकसद आधार नंबर को सुरक्षित रखना है, लेकिन दोनों अलग-अलग चीजें हैं.