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IMD ने 2026 के मॉनसून को लेकर अपना दूसरा पूर्वानुमान भी जारी कर दिया है. (प्रतीकात्मक फोटो/AI)
Weather Update: मई की झुलसाती गर्मी के बीच देशभर में मौसम अचानक करवट लेता दिख रहा है. अगले 8 दिनों तक देश के कई हिस्सों में बारिश, तेज आंधी, गरज-चमक और कुछ इलाकों में ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है. इससे केरलम, तमिलनाडु, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के इलाकों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है. खासकर उत्तर भारत में इन दिनों गर्मी का प्रचंड दौर चल रहा है. वहां राहत मिलने की उम्मीद है.
लेकिन इस राहत के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है. जब देश के अलग-अलग हिस्सों में बादल बरस रहे हैं और तापमान गिर रहा है, तो दक्षिण-पश्चिम मॉनसून (Southwest Monsoon) आखिर केरलमम में आधिकारिक तौर पर दस्तक क्यों नहीं दे पा रहा? स्थिति यह है कि मॉनसून केरलमम तट से करीब 30-35 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद पिछले पांच दिनों से लगभग एक ही जगह पर अटका हुआ है.
उधर IMD ने 2026 के मॉनसून को लेकर अपना दूसरा पूर्वानुमान भी जारी कर दिया है. मौसम विभाग ने पूरे सीजन की बारिश का अनुमान पहले के मुकाबले घटाया है और जून-जुलाई में अल नीनो के असर की संभावना भी जताई है.
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यूरोप की मौसम एजेंसी यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स के मुताबिक, अगले एक हफ्ते के दौरान उत्तर, मध्य, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं. केरलम, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं. पहाड़ी राज्यों हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कई स्थानों पर बारिश और ओलावृष्टि की संभावना है. हालांकि, पश्चिमी राजस्थान और कुछ उत्तर-पश्चिमी इलाकों में हीटवेव का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिली है.
यही सबसे बड़ा भ्रम है. अभी जो बारिश हो रही है, वह दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की बारिश नहीं है. इसके पीछे पश्चिमी विक्षोभ, ट्रफ लाइन, स्थानीय संवहनीय गतिविधियां और अरब सागर-बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी जिम्मेदार है.
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मॉनसून की आधिकारिक घोषणा के लिए सिर्फ बारिश काफी नहीं होती. इसके लिए हवा की दिशा, नमी, बादलों की संरचना और कई तकनीकी मानकों का पूरा होना जरूरी होता है.
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IMD के मुताबिक मॉनसून केरलम तट के बेहद करीब पहुंच चुका है, लेकिन आगे बढ़ने के लिए जरूरी परिस्थितियां अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं. मौसम विभाग का कहना है कि इस समय मजबूत पछुआ हवाओं की ऊंचाई पर्याप्त नहीं है. सामान्य तौर पर मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए लगभग 4 किलोमीटर तक प्रभावी हवाओं की जरूरत होती है, जबकि अभी यह काफी कम है. इसी वजह से मॉनसून की प्रगति धीमी पड़ गई है.

IMD ने अपने दूसरे दीर्घावधि पूर्वानुमान में 2026 के मॉनसून सीजन के लिए बारिश का अनुमान Long Period Average (LPA) के 90% पर रखा है. इससे पहले अनुमान 92% था. यानी मौसम विभाग अब पहले की तुलना में थोड़ी कम बारिश की संभावना देख रहा है.
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मौसम विभाग ने संकेत दिए हैं कि जून और जुलाई के दौरान अल-नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है. अल नीनो बनने पर आमतौर पर मॉनसूनी हवाएं कमजोर पड़ती हैं, तापमान बढ़ता है और बारिश का वितरण असमान हो जाता है. यही वजह है कि जून में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान भी जताया गया है.
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फिलहाल देश के कई हिस्सों में बारिश और आंधी लोगों को गर्मी से राहत जरूर दे सकती है, लेकिन इसे मॉनसून की एंट्री मानना जल्दबाजी होगी. असली नजर अब केरलम पर टिकी है, जहां से पूरे देश के बारिश सीजन की शुरुआत होती है. अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मॉनसून अपनी रफ्तार पकड़ता है या फिर 2026 का सीजन उम्मीद से ज्यादा चुनौतीपूर्ण साबित होता है.