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मई में भारत के कुल डीजल एक्सपोर्ट का 83% हिस्सा अफ्रीका गया, जबकि यूरोप को एक भी कार्गो नहीं भेजा गया. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)
भारत दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग हब्स में से एक है. पिछले 2 सालों में यूरोप भारतीय डीजल का बड़ा खरीदार बन गया था, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है. मई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि भारत का डीजल अब यूरोप नहीं, बल्कि अफ्रीका की अर्थव्यवस्था को ईंधन दे रहा है.
मई में भारत से अफ्रीका निर्यात होने वाला डीजल 83 फीसदी रहा, जो अप्रैल में सिर्फ 32 फीसदी और फरवरी में 64 फीसदी था. वहीं यूरोप, जिसे भारत डीजल एक्सपोर्ट किया करता था, अब कुछ भी एक्सपोर्ट नहीं कर रहा. सवाल है कि आखिर अचानक ऐसा क्या बदल गया कि भारत के डीजल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा अफ्रीका पहुंचने लगा?
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इस कहानी के पीछे 3 बड़े कारण हैं:
1. एशिया को अब कम जरूरत पड़ रही है
ग्लोबल ट्रेड का डेटा देने वाले प्लेटफॉर्म Kpler के अनुसार चीन की क्रूड ऑयल मांग 10 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है. इससे एशिया के दूसरे देशों की रिफाइनरियों को ज्यादा कच्चा तेल मिलने लगा है.
नतीजा:
इसी वजह से मई में एशिया को भारतीय डीजल निर्यात 76% गिरकर सिर्फ 40,000 बैरल प्रतिदिन रह गया.
2. यूरोप के दरवाजे लगभग बंद हो गए
यूरोपीय संघ (EU) ने रूसी कच्चे तेल से रिफाइन किए गए ईंधन पर सख्ती बढ़ा दी है.
भारत पिछले कुछ सालों में रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर डीजल बनाकर यूरोप भेज रहा था. लेकिन नए नियमों के बाद यह रास्ता मुश्किल हो गया.
दिलचस्प बात यह है कि भारत के आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी फिर करीब 40% तक पहुंच गई है.
नतीजा:
3. पश्चिम एशिया के तनाव ने बदल दिया पूरा ट्रेड मैप
ईरान संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में सप्लाई जोखिमों ने वैश्विक डीजल व्यापार को नया आकार दिया. पहले पश्चिम एशिया से अफ्रीका को डीजल जाता था. अब भारत अफ्रीका को ज्यादा डीजल भेज रहा है, यूरोप उत्तर अमेरिका से ज्यादा खरीद रहा है. यानी पूरी सप्लाई चेन का पुनर्गठन (Trade Re-Optimization) हो रहा है.

| कुल डीजल निर्यात | 3.94 लाख BPD |
| अफ्रीका को निर्यात | 3.27 लाख BPD |
| हिस्सेदारी | 83% |
| यूरोप को निर्यात | 0 |
| एशिया को निर्यात | 40,000 BPD |
| रूसी तेल की हिस्सेदारी | करीब 40% |
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काफी हद तक हां. अफ्रीका में:
भारत के लिए यह बड़ा अवसर बन सकता है क्योंकि:
दिलचस्प बात यह है कि डीजल निर्यात बढ़ा, लेकिन पेट्रोल निर्यात घट गया.
| अवधि | पेट्रोल निर्यात (BPD) |
| फरवरी | 360,000 |
| अप्रैल | 290,000 |
| मई | 173,000 |
भारत से मुख्य रूप से ये कंपनियां ईंधन निर्यात करती हैं:
यह आंकड़े दिखाते हैं:
अगर आप निवेशक हैं या अर्थव्यवस्था को समझना चाहते हैं तो यह बदलाव महत्वपूर्ण है. असर यहां दिख सकता है:
एशिया में रिफाइनरी रन बढ़ने और चीन की कमजोर क्रूड मांग ने एशियाई आयात घटाए. वहीं पश्चिम एशिया संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े व्यवधानों ने वैश्विक डीजल ट्रेड फ्लो को फिर से व्यवस्थित कर दिया है. भारत अब उस अफ्रीकी बाजार की आपूर्ति कर रहा है जिसे पहले पश्चिम एशिया सप्लाई करता था.
भारत के डीजल निर्यात का अफ्रीका की ओर झुकाव किसी एक महीने की घटना नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यापार में हो रहे बड़े बदलाव का संकेत है. यूरोप के प्रतिबंध, रूसी तेल की बढ़ती हिस्सेदारी और पश्चिम एशिया के तनाव ने भारत को नए बाजार खोजने पर मजबूर किया है. फिलहाल सबसे बड़ा लाभार्थी अफ्रीका नजर आ रहा है, जहां भारत तेजी से प्रमुख ईंधन सप्लायर बनता जा रहा है.
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