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Vice President Resigns: उपराष्ट्रपति जनदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने इस्तीफे में जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का हवाला दिया है. हालांकि, राष्ट्रपति द्वारा इस्तीफे को स्वीकार किया गया है, इस पर राष्ट्रपति भवन से आधिकारिक बयान नहीं आया है. इस्तीफे में जगदीप धनखड़ ने लिखा- "स्वास्थ्य और मेडिकल एडवाइज का पालन करते हुए संविधान के अनुच्छेद 67 (A) के मुताबिक, मैं तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं." आपको बता दें कि साल 2022 में जगदीप धनखड़ को उपराष्ट्रपति चुना गया था. उन्होंने वैंकेया नायडू की जगह ली थी. इससे पहले वह पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी रहे थे. उपराष्ट्रपति के साथ-साथ जगदीप धनखड़ ऊपरी सदन राज्यसभा के चेयरमैन भी हैं.
जगदीप धनखड़ ने अपने इस्तीफे में लिखा- "मेरे कार्यकाल के दौरान आपके अटूट समर्थन और हमारे बीच अच्छे और सौहार्दपूर्ण कामकाजी संबंधों के लिए मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का दिल से आभार जताता हूं. मैं माननीय प्रधानमंत्री और सम्मानित मंत्रीपरिषद के प्रति भी गहरा आभार व्यक्त करता हूं. प्रधानमंत्री जी का सहयोग और समर्थन मेरे लिए अमूल्य रहा है. मैंने अपने कार्यकाल से काफी कुछ सीखा है. संसद के सभी माननीय सदस्यों से मिले प्यार, विश्वास और लगाव को मैं हमेशा सहज कर रखूंगा और वह मेरी यादों में हमेशा रहेगा."
उपराष्ट्रपति ने अपने इस्तीफे के आखिरी में लिखा- "हमारे महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के तौर में प्राप्त हुए अमूल्य अनुभवों और दृष्टिकोण के लिए मैं दिल से आभारी हूं. इस महत्वपूर्ण अवधि के दौरान देश की उल्लेखनीय आर्थिक प्रगति और अभूतपूर्व विकास का साक्षी और भागीदार बनना मेरे लिए सौभाग्य और संतोष की बात है. हमारे देश के इतिहास के इस परिवर्तनकारी युग में सेवा करने मेरे लिए एक सच्चा सम्मान रहा है. मैं जब ये प्रतिष्ठित पद को छोड़ रहा हं तो मैं भारत के वैश्विक उदय और उसकी असाधारण उपलब्धियों पर गर्व से भरा हूं. मुझे उसके उज्जवल भविष्य पर अटूट विश्वास है."
जगदीप धनखड़ भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही इस्तीफा दिया है. सबसे पहले साल 1969 में भारत के तीसरे उपराष्ट्रपति वी.वी.गिरी ने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया था. दरअसल तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन का निधन हो गया था. इसके अलावा साल 1987 में आर.वेंकेटरमन ने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए उपराष्ट्रपति का पद छोड़ दिया था.