&format=webp&quality=medium)
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ता दिख रहा है. अमेरिका पहले भी भारत पर 25% का टैरिफ लगा चुका है. अगर 27 अगस्त से 25% का अतिरिक्त टैरिफ भी लागू हो जाता है तो देश से अमेरिका को होने वाला करीब 48.2 अरब डॉलर का व्यापारिक निर्यात प्रभावित हो सकता है. सरकार ने मंगलवार को संसद में ये जानकारी दी और बताया कि वो स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है और भारतीय हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी.
अमेरिकी सरकार ने भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 50% का रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने की घोषणा की है. इसे दो चरणों में लागू किया जा रहा है:
लोकसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा, "सरकार, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ पर ध्यान केंद्रित कर रही है. अनुमान है कि इस अतिरिक्त टैरिफ के दायरे में भारत से अमेरिका को होने वाला 48.2 अरब डॉलर का व्यापारिक निर्यात आएगा."
सरकार के मुताबिक, अमेरिका को होने वाले कुल व्यापारिक निर्यात का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा यानी करीब 26.5 अरब डॉलर का निर्यात, पहले चरण यानी 25% टैरिफ के दायरे में आ चुका है. इसका मतलब है कि भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में पहले से ही बढ़ी हुई कीमतों का सामना करना पड़ रहा है.
इस व्यापारिक तनाव के बीच एक राहत की बात ये है कि अमेरिका ने फिलहाल भारतीय फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्यात पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया है. ये दोनों सेक्टर भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और अमेरिका को बड़ी मात्रा में इनका निर्यात किया जाता है. इन सेक्टर्स को बाहर रखने से तत्काल होने वाले बड़े नुकसान से कुछ हद तक बचाव हुआ है. हालांकि, भविष्य में इन्हें भी दायरे में लाया जा सकता है, इसकी आशंका बनी हुई है.
केंद्र सरकार ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई इस घोषणा को "अनुचित और अतार्किक" बताया है. सरकार ने अपने बयान में कहा, "हमने इन मुद्दों पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है, जिसमें ये तथ्य भी शामिल है कि हमारा आयात बाजार कारकों पर आधारित है और भारत के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के समग्र उद्देश्य से किया जाता है."
जितिन प्रसाद ने सदन को आश्वासन दिया कि सरकार देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार हमारे किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, निर्यातकों, MSME और उद्योग के सभी वर्गों के कल्याण की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी. जिसमें उचित निर्यात संवर्धन और व्यापार विविधीकरण के उपाय भी शामिल हैं.
अमेरिका द्वारा लगाए गए इस शुल्क को 'रेसिप्रोकल टैरिफ' कहा जा रहा है. इसका मतलब है कि अमेरिका का मानना है कि भारत, अमेरिकी उत्पादों पर जितना शुल्क लगाता है, वो भी भारतीय उत्पादों पर उतना ही शुल्क लगाएगा. ट्रंप प्रशासन की ये नीति 'अमेरिका फर्स्ट' के तहत आती है, जिसका उद्देश्य व्यापार घाटे को कम करना और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देना है. हालांकि, इस तरह के एकतरफा फैसलों से अक्सर वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बन जाती है, जिसका नुकसान दोनों ही देशों को उठाना पड़ता है.
ये टैरिफ भारतीय 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए भी एक बड़ी चुनौती है. जब भारतीय उत्पाद विदेशी बाजारों में महंगे हो जाएंगे, तो उनकी मांग घट जाएगी, जिसका सीधा असर देश के उत्पादन और रोजगार पर पड़ेगा.
टैरिफ एक तरह का टैक्स होता है जो कोई देश दूसरे देश से आने वाले सामान (आयात) पर लगाता है. इससे वो सामान घरेलू बाजार में महंगा हो जाता है.
अमेरिका ने कुल 50% अतिरिक्त टैरिफ की घोषणा की है, जिसे 25-25% के दो चरणों में लागू किया जा रहा है.
नहीं, फिलहाल फार्मास्यूटिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ प्रमुख उत्पादों को इससे बाहर रखा गया है. हालांकि, 55% व्यापारिक निर्यात इसके दायरे में आ चुका है.
इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा, जिससे उनकी मांग घट सकती है. इससे भारत के निर्यातकों को नुकसान होगा और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी प्रभावित हो सकता है.
भारत सरकार ने इस कदम को "अनुचित" बताया है और कहा है कि वो निर्यातकों की मदद करने, नए बाजार खोजने और अमेरिका के साथ कूटनीतिक बातचीत जैसे सभी जरूरी कदम उठा रही है.