LPG गैस की कालाबाजारी करने वालों पर ऐक्शन में योगी सरकार, 2500 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी, 8 गिरफ्तार!

यूपी में एलपीजी की कालाबाजारी पर योगी सरकार का कड़ा प्रहार! 2,554 ठिकानों पर छापेमारी, 40 एफआईआर और 8 गिरफ्तार. जानें आपके जिले में गैस सप्लाई की क्या है स्थिति.
LPG गैस की कालाबाजारी करने वालों पर ऐक्शन में योगी सरकार, 2500 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी, 8 गिरफ्तार!

LPG गैस की कालाबाजारी करने वालों पर ऐक्शन में योगी सरकार.

उत्तर प्रदेश में इन दिनों रसोई गैस को लेकर सरकार पूरी तरह एक्शन मोड में है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ कर दिया है कि आम आदमी की थाली और रसोई के बीच में कोई भी कालाबाजारी करने वाला नहीं आना चाहिए. पिछले दो दिनों से पूरे प्रदेश में जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की टीमें सड़कों पर हैं. कहीं गोदामों की जांच हो रही है, तो कहीं गैस एजेंसियों के रजिस्टर खंगाले जा रहे हैं. सरकार की कोशिश बस एक ही है- हर घर को उसकी जरूरत के हिसाब से गैस मिले और कोई भी बिचौलिया इसका फायदा न उठा पाए.

यह कोई सामान्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि एक ऐसा बड़ा अभियान है जिसने अवैध धंधा करने वालों की नींद उड़ा दी है. शहरों से लेकर गांवों तक, आपूर्ति व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है. अगर आप भी यूपी के निवासी हैं, तो आपको यह जानना चाहिए कि सरकार आपकी सुविधा के लिए किस तरह जमीन पर काम कर रही है और कैसे आपके हक की गैस को सुरक्षित बना रही है.

कालाबाजारी पर कानून का तगड़ा शिकंजा

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योगी सरकार ने अवैध बिक्री करने वालों को सीधा संदेश दिया है कि उनके लिए जेल की सलाखें तैयार हैं. पिछले 48 घंटों में प्रदेश की प्रवर्तन टीमों ने रिकॉर्ड तोड़ काम किया है. कुल 2,554 अलग-अलग जगहों पर औचक निरीक्षण और छापेमारी की गई है. इस कार्रवाई का नतीजा भी सबके सामने है. एलपीजी वितरकों के खिलाफ 5 एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिन्होंने नियमों की अनदेखी की थी.

इतना ही नहीं, गैस की कालाबाजारी के खेल में शामिल अन्य बाहरी लोगों पर भी गाज गिरी है. इनके खिलाफ कुल 35 एफआईआर दर्ज की गई हैं. मौके से 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 37 व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई (अभियोजन) शुरू कर दी गई है. मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को सख्त लहजे में कहा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी किसी भी हाल में नहीं होनी चाहिए.

4,000 से ज्यादा वितरक और भरपूर स्टॉक

अक्सर पैनिक और डर के माहौल में लोग सोचने लगते हैं कि शायद गैस खत्म हो गई है, लेकिन आंकड़े कुछ और ही कह रहे हैं. उत्तर प्रदेश में कुल 4,108 एलपीजी गैस वितरक हैं और उन सबके पास सिलेंडरों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. सरकार ने सुनिश्चित किया है कि जो भी उपभोक्ता अपनी बुकिंग करा रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रिफिल की डिलीवरी दी जाए.

व्यावसायिक प्रतिष्ठानों यानी होटल और दुकानों के लिए भी सरकार ने रास्ता निकाला है. भारत सरकार ने कमर्शियल सिलेंडरों की कुल खपत के 20 प्रतिशत तक आवंटन की विशेष अनुमति दी है. इससे फायदा यह होगा कि व्यावसायिक जरूरतें भी पूरी होंगी और घरेलू गैस की सप्लाई पर कोई अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा. यानी आपकी रसोई के साथ-साथ बाजार की व्यवस्था भी सुचारू रूप से चलती रहेगी.

24 घंटे एक्टिव कंट्रोल रूम की निगरानी

जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए खाद्यायुक्त कार्यालय में एक हाई-टेक कंट्रोल रूम बनाया गया है. यह कंट्रोल रूम दिन-रात 24 घंटे काम कर रहा है. यहां खाद्य एवं रसद विभाग के अनुभवी अधिकारियों को तैनात किया गया है जो हर जिले की रिपोर्ट ले रहे हैं. इसके साथ ही एक 'होम कंट्रोल रूम' भी बनाया गया है ताकि हर छोटी-बड़ी समस्या का तुरंत समाधान किया जा सके.

सिर्फ राजधानी में ही नहीं, बल्कि यूपी के हर जिले में स्थानीय स्तर पर भी कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं. जिला पूर्ति कार्यालय के अधिकारी और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार फील्ड में घूम रही हैं. वे खुद जाकर देख रहे हैं कि वितरकों के यहां डिलीवरी की स्थिति क्या है. अगर आपको गैस मिलने में कोई दिक्कत आती है, तो आप इन कंट्रोल रूम के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकते हैं.

पैनिक नहीं, सावधानी की है जरूरत

सरकार का स्पष्ट मानना है कि व्यवस्था में कोई कमी नहीं है, बस कुछ असामाजिक तत्व अव्यवस्था फैलाना चाहते हैं. आपूर्ति व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि कहीं भी किसी प्रकार की कमी न हो. मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि आम नागरिकों को पेट्रोल और डीजल भी उनकी आवश्यकता के अनुसार आसानी से मिलता रहे.

छापेमारी की यह कार्रवाई अभी थमी नहीं है. आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज हो सकता है ताकि कालाबाजारी को जड़ से खत्म किया जा सके. प्रशासन का कहना है कि जब तक सप्लाई चेन पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो जाती, तब तक यह कड़ाई जारी रहेगी. उपभोक्ताओं से भी अपील की गई है कि वे केवल रजिस्टर्ड वितरकों से ही गैस लें और किसी भी अवैध विक्रेता के झांसे में न आएं.

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