नेताओं के घर और सरकारी दफ्तरों में लगेंगे प्रीपेड मीटर, चुकाना होगा बिजली का बिल

उत्तर प्रदेश में लगभग 7 लाख स्मार्ट प्रीपेड लगाये जा चुके हैं और 2022 तक पूरे प्रदेश में सभी ग्राहकों को इसके दायरे में लाया जाएगा.
नेताओं के घर और सरकारी दफ्तरों में लगेंगे प्रीपेड मीटर, चुकाना होगा बिजली का बिल

स्मार्ट प्रीपेड मीटर में ग्राहक को मोबाइल फोन की तरह मीटर रिचार्ज कराना होता है. 

उत्तर प्रदेश में बिजली वितरण कंपनियों की माली हालत में सुधार लाने और बिल वसूली सिस्टम को दुरूस्त करने के लिये सरकारी कार्यालयों और विधायकों तथा सांसदों समेत सभी जनप्रतिनिधियों के यहां स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे. यूपी में सरकारी विभागों पर बिजली डिपार्टमेंट का 13,000 करोड़ रुपये बकाया है.

प्रदेश में प्रीपेड मीटर लगाने के लिए 15 नवंबर से एक विशेष अभियान शुरू किया जाएगा. और इस अभियान के पहले चरण में 1 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे. अभी तक पूरे प्रदेश में लगभग 7 लाख स्मार्ट प्रीपेड लगाये जा चुके हैं और 2022 तक पूरे प्रदेश में सभी ग्राहकों को इसके दायरे में लाया जाएगा.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2019 तक देशभर में सरकारी विभागों पर राज्य बिजली वितरण कंपनियों का बकाया 41,743 करोड़ रुपये पहुंच गया. इससे पहले वित्त वर्ष में यह बकाया 36,900 करोड़ रुपये था. उत्तर प्रदेश में ही पुलिस, सिंचाई समेत विभिन्न सरकारी विभागों एवं इकाइयों पर बकाया 13,480 करोड़ रुपये है.

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यूपी सरकार का दावा है कि मार्च 2020 तक सभी सरकारी दफ्तरों और जन प्रतिनिधियों के यहां स्मार्ट मीटर लगा दिए जाएंगे.

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स्मार्ट प्रीपेड मीटर में ग्राहक को मोबाइल फोन की तरह मीटर रिचार्ज कराना होता है. रिचार्ज के हिसाब से ही वह बिजली का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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