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उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने UPPCL द्वारा जून 2026 में लगाए जाने वाले 10% फ्यूल सरचार्ज पर आपत्ति जताई है (फाइल फोटो)
उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है. प्रदेश में बिजली की दरों में 'फ्यूल सरचार्ज' के नाम पर होने वाली बढ़ोतरी पर फिलहाल राज्य विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने कड़ा रुख अपनाया है. आयोग ने उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा जून 2026 के महीने में 10% एक्स्ट्रा सरचार्ज (FPPAS) वसूलने की कोशिश पर सवाल उठाए हैं और इसे नियमों के खिलाफ बताया है.
असल में आयोग ने साफ कर दिया है कि पुराने बकाये और अदालती फैसलों के कारण होने वाले खर्चों का बोझ 'फ्यूल सरचार्ज' के जरिए सीधे जनता की जेब पर नहीं डाला जा सकता.
आपको बता दें किपावर कॉर्पोरेशन (UPPCL) ने जून 2026 के लिए फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) की गणना 20.61% की थी. हालांकि, रूल्स के मुताबिक इसकी अधिकतम सीमा 10% तय है, इसलिए कॉर्पोरेशन ने उपभोक्ताओं से 10% सरचार्ज वसूलने की तैयारी कर ली थी. इस बढ़ोतरी के पीछे तर्क दिया गया था कि एनटीपीसी (NTPC) के पुराने बकाये और सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी के पिछले सालों के खर्चों का भुगतान किया गया है.
विद्युत नियामक आयोग के सचिव सुमीत कुमार अग्रवाल की ओर से जारी पत्र में UPPCL के इस कदम को नियमों का उल्लंघन बताया गया है. आयोग का कहना है कि आयोग के 2025 के नियमों के अनुसार, FPPAS का इस्तेमाल केवल उसी महीने में बिजली खरीद की लागत में हुए बदलाव (ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव) की भरपाई के लिए किया जा सकता है.
पुराना बकाया नहीं जोड़ सकते: आयोग ने साफ किया कि पिछले सालों के बकाये, अदालती आदेशों (APTEL) के कारण किए गए भुगतान या पुराने कानूनी दावों की वसूली इस 'ऑटोमैटिक' सरचार्ज के जरिए नहीं की जा सकती.
आयोग ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि पावर कॉर्पोरेशन पुराने बकाये को वर्तमान लागत में शामिल कर रहा है. आयोग के अनुसार, इस तरह के पुराने खर्चों को 'ट्रू-अप' (True-Up) प्रक्रिया के तहत लाना चाहिए, जहां आयोग खुद इसकी बारीकी से जांच करता है. 'फ्यूल सरचार्ज' एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें कंपनियां बिना आयोग की पूर्व अनुमति के सीधे उपभोक्ताओं से पैसा वसूल लेती हैं, इसलिए इसमें कॉर्पोरेशन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वह केवल जायज खर्च ही जोड़े.
| विवरण | जानकारी |
| प्रस्तावित सरचार्ज | 10% (वास्तविक गणना 20.61%) |
| प्रभावी महीना | जून 2026 |
| विवाद का कारण | पुराने बकाये (NTPC/APTEL) को सरचार्ज में जोड़ना |
| आयोग का निर्देश | 7 दिन के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण दें |
| नियामक संस्था | उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) |
अगर नियामक आयोग UPPCL के जवाब से साफ नहीं होता है, तो उपभोक्ताओं को जून के बिल में लगने वाले इस 10% अतिरिक्त बोझ से राहत मिल सकती है. आयोग का यह कदम बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है.