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फोटो- एआई जनरेटेड
पश्चिम एशिया में जारी भारी संघर्ष और तनाव के बीच भारत की रसोई गैस (LPG) आपूर्ति को लेकर एक बेहद सकारात्मक खबर आई है. केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सोमवार को पुष्टि की है कि एलपीजी से लदे दो भारतीय ध्वज वाले जहाज 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' जैसे संवेदनशील इलाके को सुरक्षित पार कर चुके हैं. ये दोनों जहाज, 'ग्रीन सांघवी' और 'ग्रीन आशा', इसी हफ्ते भारतीय तटों पर पहुंच जाएंगे, जो युद्ध के कारण उपजी सप्लाई चेन की चिंताओं को काफी हद तक कम कर देगा.
मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी मुकेश मंगल ने एक अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान बताया कि ये जहाज उस बेड़े का हिस्सा हैं जो मौजूदा वक्त में पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में सक्रिय है. युद्ध की विभीषिका के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए समुद्री रास्तों पर पैनी नजर बनाए हुए है. इन जहाजों का सुरक्षित निकलना भारतीय नौसेना और शिपिंग मंत्रालय की बेहतर निगरानी और कूटनीतिक तालमेल का नतीजा माना जा रहा है.
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मंत्रालय की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, दोनों जहाजों पर भारतीय नाविक तैनात हैं और वह भारी मात्रा में एलपीजी लेकर आ रहे हैं:
ग्रीन सांघवी (Green Sangvi): यह जहाज लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा है. इस पर 25 भारतीय नाविक सवार हैं. इसके 7 अप्रैल तक भारत पहुंचने की संभावना है.
ग्रीन आशा (Green Asha): यह जहाज करीब 15,000 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा है और इस पर 26 भारतीय नाविक मौजूद हैं. इसके 9 अप्रैल तक पहुंचने की उम्मीद जताई गई है.
वर्तमान में कुल 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं, जिन पर कुल 433 भारतीय नाविक सवार हैं. मंत्रालय इन सभी की सुरक्षा और आवाजाही पर 24 घंटे नजर रख रहा है.
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मुकेश मंगल ने बताया कि इन 16 जहाजों में केवल एलपीजी ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण कार्गो भी शामिल हैं. इसमें एक जहाज एलएनजी (LNG) से लदा है, छह कच्चे तेल (Crude Oil) के जहाज हैं (जिनमें से 5 भरे हुए हैं), तीन कंटेनर जहाज, एक ड्रेजर, एक केमिकल टैंकर और दो बल्क कार्गो जहाज शामिल हैं.
राहत की बात यह है कि पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है. सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि भारत के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और कहीं भी जाम (Congestion) जैसी स्थिति नहीं है. गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के समुद्री बोर्ड ने परिचालन को सुचारू बताया है.
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युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है. महानिदेशक शिपिंग (DG Shipping) ने अब तक 1,599 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाने में मदद की है. अकेले पिछले 24 घंटों में ही खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से 180 नाविकों को सकुशल भारत लाया गया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह समुद्री व्यापार की निरंतरता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अपने नागरिकों की जान-माल की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
पश्चिम एशिया के अशांत माहौल में 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से एलपीजी जहाजों का सुरक्षित गुजरना भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सामरिक जीत है. यह न केवल देश में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा, बल्कि वैश्विक संकट के समय में भारतीय समुद्री सुरक्षा की मजबूती को भी दर्शाता है. सरकार की मुस्तैदी और नाविकों की सुरक्षित वापसी यह भरोसा दिलाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 कितनी मात्रा में एलपीजी भारत आ रही है?
दो जहाजों के जरिए कुल 61,000 मीट्रिक टन (46,000 + 15,000) एलपीजी भारत आ रही है.
Q2 जहाजों के नाम और उनके पहुंचने की तारीख क्या है?
'ग्रीन सांघवी' 7 अप्रैल और 'ग्रीन आशा' 9 अप्रैल तक पहुंचने की संभावना है.
Q3 स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) क्यों चर्चा में है?
यह ईरान और ओमान के बीच एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहां युद्ध के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है.
Q4 खाड़ी क्षेत्र में अभी कितने भारतीय जहाज और नाविक हैं?
वहां अभी 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज और कुल 433 भारतीय नाविक मौजूद हैं.
Q5 अब तक कितने नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है?
अब तक कुल 1,599 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है.