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दिल्ली में भारत और अमेरिका के बीच आज 16 सितंबर को लगभग 7 घंटे तक मीटिंग चली. इस मीटिंग को दोनों ही पक्षों ने बेहद अहम बताया. इसमें अमेरिका के Assistant U.S. Trade Representative Brendan Lynch और भारत के Ministry of Commerce and Industry Special Secretary राजेश अग्रवाल शामिल रहे.
अमेरिकी दूतावास (US Embassy) ने कहा कि यह बातचीत सकारात्मक रही और आगे के कदमों पर चर्चा हुई. भारत सरकार ने भी कहा कि बातचीत रचनात्मक रही और दोनों देशों ने स्वीकार किया कि द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) दोनों के लिए बेहद अहम है.
भारत सरकार की तरफ से जारी जानकारी में कहा गया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच ने किया. भारत की ओर से विशेष सचिव राजेश अग्रवाल और उनकी टीम मौजूद रही. चर्चा का फोकस भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement) रहा. बातचीत में इस समझौते को जल्द निपटाने पर जोर दिया गया. निर्णय लिया गया कि दोनों देश इस पर काम की गति और तेज करेंगे.
अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, "ब्रेंडन लिंच ने भारत में अपने समकक्ष से सकारात्मक बैठक की, जिसमें आगे के कदमों पर चर्चा हुई." इस बयान से साफ है कि वॉशिंगटन भी चाहता है कि ट्रेड वार्ता सिर्फ बातचीत तक सीमित न रहकर जल्द नतीजे तक पहुंचे.
भारत और अमेरिका के बीच कारोबार (Trade) लगातार बढ़ रहा है. लेकिन कई मसलों पर टकराव भी रहे हैं. अगर द्विपक्षीय समझौता हो जाता है तो इन विवादों पर काफी हद तक समाधान निकल सकता है.
इस मीटिंग के बाद दोनों देशों ने साफ संकेत दिए हैं कि अब फोकस परिणाम लाने पर होगा. पहले की तरह सिर्फ बातचीत और बयानबाजी तक यह मामला नहीं रहेगा. भारत ने साफ कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद होगा. अमेरिका ने कहा कि बातचीत सकारात्मक रही और आगे का रोडमैप तैयार है. दोनों पक्ष अब जल्दी मीटिंग्स कर प्रक्रिया को तेज करेंगे.
माना जा रहा है कि आने वाले महीनों में इस पर ठोस प्रगति हो सकती है. भारत और अमेरिका दोनों के लिए यह समझौता आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही स्तर पर अहम होगा. अगर डील जल्दी हो जाती है तो न सिर्फ कारोबार बढ़ेगा बल्कि भू-राजनीतिक रिश्ते भी और मजबूत होंगे.
भारत और अमेरिका के बीच 7 घंटे तक चली यह लंबी बातचीत एक बड़े बदलाव का संकेत देती है. दोनों देशों ने साफ कर दिया है कि अब वक्त है कि पुराने विवादों को किनारे कर ठोस नतीजे निकाले जाएं. आने वाले समय में यह समझौता भारत-अमेरिका रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है और कारोबारियों के लिए बड़े मौके खोल सकता है.
यह दो देशों के बीच ऐसा समझौता होता है जिसमें वे टैरिफ, ड्यूटी और मार्केट एक्सेस जैसी शर्तों को तय करके व्यापार आसान बनाते हैं.
मुख्य रूप से आईटी, फार्मा, एग्रीकल्चर, स्टील और ई-कॉमर्स सेक्टर में.
भारतीय कंपनियों को अमेरिकी मार्केट में ज्यादा एक्सेस और निर्यात (Export) के नए मौके मिलेंगे.
अमेरिका चाहता है कि भारत अपनी मार्केट पॉलिसी को और खुला करे और अमेरिकी कंपनियों के लिए ज्यादा अवसर उपलब्ध कराए.
फिलहाल कोई तय तारीख नहीं है, लेकिन 2025 के अंत तक दोनों देशों के बीच ठोस प्रगति की उम्मीद जताई जा रही है.
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