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आइए आज आपको बताते हैं इसके पीछे की कहानी. (Image:Sudarsan Pattnaik)
Teachers day 2020: टीचर्स डे...हर एक स्टूडेंट के लिए एक खास दिन. इस दिन आप अपने टीचर्स के लिए कुछ खास प्लान करते हैं और ये दिन सभी स्टूडेंट्स के लिए खास होता है, लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर टीचर्स डे 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है? इसके पीछे क्या कोई कहानी है या फिर कोई और कारण...आइए आज आपको बताते हैं इसके पीछे की कहानी-
सर्वपल्ली राधाकृष्णन का होता है जन्मदिन
भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बर्थ डे को ही टीचर्स डे की तरह मनाया जाता है. देश के पहले उप-राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन का जन्म 5 सितंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुमनी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. वे बचपन से ही किताबें पढ़ने के शौकीन थे और स्वामी विवेकानंद से काफी प्रभावित थे. राधाकृष्णन का निधन चेन्नई में 17 अप्रैल 1975 को हुआ था.
जब डॉ. एस राधाकृष्णन भारत के राष्ट्रपति बने तो उनके कुछ छात्र व मित्र उनके पास पहुंचे और उनसे अनुरोध किया कि वे उन्हें अपना जन्मदिन मनाने की अनुमति दें. उन्होंने उत्तर दिया कि मेरे जन्मदिन को अलग से मनाने के बजाय इस 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो यह मेरे लिए गौरवपूर्ण सौभाग्य होगा. तब से उनकी जयंती यानी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा.
अलग-अलग देशों में इस दिन मनाया जाता है शिक्षक दिवस
शिक्षक दिवस को चीन से लेकर, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, अल्बानिया, इंडोनेशिया, ईरान, मलयेशिया, ब्राजील और पाकिस्तान तक शामिल हैं. हालांकि हर देश में इस दिवस को मनाने की तारीख अलग-अलग है. जैसे कि- चीन में 10 सितंबर तो अमेरिका में छह मई, ऑस्ट्रेलिया में अक्तूबर के अंतिम शुक्रवार, ब्राजील में 15 अक्तूबर और पाकिस्तान में पांच अक्तूबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है.