E20 पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, भारत में जारी रहेगी 20% इथेनॉल मिश्रण नीति

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह नीति देशभर में लागू रहेगी और इस पर कोई हस्तक्षेप नहीं होगा.
E20 पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका खारिज, भारत में जारी रहेगी 20% इथेनॉल मिश्रण नीति

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें केंद्र सरकार की 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) नीति को चुनौती दी गई थी. अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह नीति देशभर में लागू रहेगी और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अदालत ने इस नीति को चुनौती देने का कोई आधार नहीं पाया और कहा कि सरकार की यह नीति स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अहम है. इस फैसले के बाद भारत का 20% इथेनॉल मिश्रण लक्ष्य बिना किसी रोकटोक के आगे बढ़ेगा.

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ISMA का बयान

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया. ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा, “ISMA सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करता है जिसमें E20 नीति को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज किया गया है. 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से 5 साल पहले हासिल करना ऐतिहासिक उपलब्धि है.

इससे किसानों को ₹1.18 लाख करोड़ का भुगतान हुआ, ₹1.36 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा बचत हुई और 698 लाख टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई. यह नीति किसानों, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है और भारत की सतत ऊर्जा संक्रमण की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है.”

याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा?

याचिकाकर्ता वकील अक्षय मल्होत्रा ने कहा कि सरकार का यह कदम लाखों वाहन चालकों को उनके वाहनों के लिए डिजाइन नहीं किए गए ईंधन का उपयोग करने के लिए मजबूर कर रहा है. याचिका में बताया गया कि 2023 से पहले निर्मित वाहन और कुछ BS-6 वाहन भी इस ईंधन के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जिससे इंजन को नुकसान, ईंधन दक्षता में गिरावट और मरम्मत का खर्च बढ़ सकता है.

याचिकाकर्ता की दलीलें

E-20 से वाहन के इंजन और पुर्जों पर असर पड़ेगा और ईंधन की खपत बढ़ेगी.

पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराया जाए.

उपभोक्ताओं को ईंधन की जानकारी देने के लिए स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य की जाए.

बीमा कंपनियां इथेनॉल मिश्रण से हुए नुकसान के दावों को नकार रही हैं.

अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इथेनॉल की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखी जाती है, भारत में भी ऐसा होना चाहिए.

इथेनॉल मिश्रण से क्या होगा लाभ?

भारत सरकार की इस नीति का उद्देश्य देश में पेट्रोल पर निर्भरता को कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और प्रदूषण में कमी लाना है. इथेनॉल मिश्रण से गन्ना किसानों को स्थिर आय का स्रोत मिला है और तेल आयात पर देश का खर्च घटा है. यह फैसला ऊर्जा क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है.

खबर से जुड़े 5 FAQs

Q1. सुप्रीम कोर्ट ने E20 नीति पर क्या फैसला दिया?

सुप्रीम कोर्ट ने E20 नीति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी और इसे लागू रखने का आदेश दिया.

Q2. याचिकाकर्ता की मुख्य दलील क्या थी?

याचिकाकर्ता ने कहा कि यह नीति पुराने और कुछ नए वाहनों को नुकसान पहुंचा सकती है, और इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प होना चाहिए.

Q3. ISMA ने इस फैसले पर क्या कहा?

ISMA ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया, जिसने किसानों को ₹1.18 लाख करोड़, विदेशी मुद्रा में ₹1.36 लाख करोड़ की बचत और CO₂ उत्सर्जन में 698 लाख टन कमी दिलाई.

Q4. E20 नीति का उद्देश्य क्या है?

इस नीति का उद्देश्य तेल आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों को लाभ पहुंचाना और प्रदूषण घटाना है.

Q5. भारत में इथेनॉल मिश्रण की मौजूदा स्थिति क्या है?

भारत ने E20 लक्ष्य तय समय से 5 साल पहले हासिल कर लिया है, जिससे देश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है.

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