शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष पर प्रहार: बोले- अफवाहों से नहीं, हकीकत से मजबूत होगा देश का किसान!

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ किया है कि भारत की हर ट्रेड डील और FTA में किसानों के हित सुरक्षित हैं. उन्होंने विपक्ष के दावों को झूठा करार दिया.
शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष पर प्रहार: बोले- अफवाहों से नहीं, हकीकत से मजबूत होगा देश का किसान!

शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष पर प्रहार

13 फरवरी 2026 की सुबह भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) का परिसर एक नई ऊर्जा से भरा था. मौका था संस्थान के 64वें दीक्षांत समारोह का, जहां देश के कोने-कोने से आए युवा कृषि वैज्ञानिक अपनी डिग्रियां लेने जुटे थे. लेकिन इस मंच से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सिर्फ बधाई संदेश नहीं दिया, बल्कि देश की कृषि नीति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों (FTA) को लेकर चल रहे विवादों पर एक ऐसी लकीर खींच दी, जो आने वाले समय में राजनीति की दिशा तय करेगी.

शिवराज सिंह चौहान ने बहुत ही साफ और कड़े शब्दों में उन लोगों को जवाब दिया जो कहते हैं कि विदेशी समझौतों से भारत का किसान बर्बाद हो जाएगा. उन्होंने दो टूक कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में न तो हमारा खेत बिका है और न ही किसान. जो लोग डर का माहौल बना रहे हैं, वे असल में झूठ की दुकान चला रहे हैं.

विपक्ष पर तीखा तंज

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समारोह के दौरान मंत्री जी का अंदाज काफी आक्रामक रहा. उन्होंने उन राजनीतिक दलों को निशाने पर लिया जो ट्रेड डील्स को लेकर किसानों के बीच भ्रम फैला रहे हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोग सुबह से शाम तक सिर्फ झूठ का कारोबार करते हैं. उनके लिए झूठ ही खाना है और झूठ ही पीना है. ये लोग 'हम लुट गए, बर्बाद हो गए' जैसे नारे लगाकर केवल अफवाहों का बाजार गर्म कर रहे हैं.

शिवराज सिंह ने कहा कि यह राजनीति का बहुत ही गिरा हुआ स्तर है जहां देश की उपलब्धियों को भी डर के चश्मे से दिखाया जा रहा है. उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि सरकार का हर फैसला किसान की आय बढ़ाने और देश की कृषि को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए है.

ट्रेड डील का सच

अक्सर चर्चा होती है कि यूरोपियन यूनियन या अमेरिका के साथ हुए समझौतों से भारतीय बाजार में विदेशी माल भर जाएगा. इस पर कृषि मंत्री ने आंकड़ों और तथ्यों के साथ बात रखी:

प्रमुख फसलें: गेहूं, चावल, मक्का, सोया और मोटे अनाज (Millets) के लिए विदेशी कंपनियों के वास्ते द्वार नहीं खोले गए हैं.

डेयरी और पोल्ट्री: भारत का दुग्ध उत्पादन और मुर्गी पालन क्षेत्र पूरी तरह से संरक्षित है. इनके हितों पर कोई आंच नहीं आने दी गई है.

इम्पोर्ट की रणनीति: उन्होंने स्पष्ट किया कि हम केवल वही चीजें बाहर से मंगा रहे हैं जिनकी भारत को जरूरत है और जिन्हें हम पहले से ही दूसरे देशों से लाते रहे हैं.

शिवराज सिंह ने बताया कि इन समझौतों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर कोई बुरा असर न पड़े.

विद्यार्थियों से आह्वान

दीक्षांत समारोह में मौजूद 470 छात्र-छात्राओं (जिनमें 290 एम.एससी. और 180 पीच.डी. छात्र थे) को संबोधित करते हुए मंत्री जी काफी भावुक और प्रेरणादायी नजर आए. उन्होंने कहा कि आपके हाथ में जो डिग्री है, वह सिर्फ कागज का टुकड़ा नहीं है बल्कि करोड़ों भूखे पेट भरने की जिम्मेदारी है.

उन्होंने युवाओं को एक बड़ा मंत्र दिया- "जिंदगी केवल मौज-मस्ती के लिए नहीं है." उन्होंने कहा कि जीवन का एक बड़ा उद्देश्य होना चाहिए. उन्होंने भारत रत्न डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक व्यक्ति की जिद ने देश से अकाल को मिटा दिया और हरित क्रांति लेकर आए. उन्होंने छात्रों से कहा कि उन्हें "Job Seeker" (नौकरी मांगने वाला) बनने के बजाय "Job Creator" (नौकरी देने वाला) बनना चाहिए.

खेत तक पहुंचना चाहिए वैज्ञानिक शोध

शिवराज सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिकों की मेहनत का असली फल तब मिलेगा जब उनकी रिसर्च लैब से निकलकर सीधे किसान के खेत तक पहुंचेगी. उन्होंने स्मार्ट खेती की वकालत करते हुए कुछ प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया:

  • प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट: रसायनों से धरती को बचाने के लिए प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना.
  • ड्रोन और एआई: खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल ताकि लागत कम हो और मुनाफा बढ़े.
  • सूक्ष्म सिंचाई: पानी की एक-एक बूंद का सही इस्तेमाल करने के लिए माइक्रो-इरिगेशन पर जोर.
  • एग्री-स्टार्टअप: युवाओं को खेती से जुड़े नए बिजनेस शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करना.

विकसित भारत 2047 का रोडमैप

कृषि मंत्री ने "विकसित भारत 2047" के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि बिना समृद्ध किसान के विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता. उन्होंने कृषि क्षेत्र में 5 प्रतिशत की स्थिर वृद्धि दर बनाए रखने को अनिवार्य बताया. उनका मानना है कि जब युवा वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक छोटे किसानों के साथ जुड़ेंगे, तभी असली बदलाव आएगा.

समारोह के समापन पर उन्होंने सभी डिग्री प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग केवल अपने करियर के लिए नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए करेंगे.

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