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रूसी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक” बताया. (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGPT)
देश इस वक्त सिर्फ महंगाई नहीं… बल्कि संभावित ईंधन संकट की चिंता से भी गुजर रहा है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव लगातार बढ़ रहा है. हालात ऐसे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद देशवासियों से ईंधन बचाने की अपील करनी पड़ी. कई राज्यों में सरकारी काफिलों की गाड़ियों की संख्या तक कम कर दी गई. इसी बीच दोस्त रूस ने भारत को ऐसा भरोसा दिया है, जिसने पूरी तस्वीर बदल दी है.
रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov 14 मई 2026 को ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने भारत आए हैं. लेकिन आने से पहले साफ उन्होंने कहा कि रूस भारत के साथ हुए ऊर्जा समझौतों को हर हाल में निभाएगा. भारत के हितों को नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और “अनुचित व बेईमान प्रतिस्पर्धा” के बावजूद ऊर्जा आपूर्ति जारी रहेगी.
लेकिन यह सिर्फ तेल सप्लाई वाला बयान नहीं है. इसके पीछे एक बड़ा जियोपॉलिटिकल मैसेज छिपा है- रूस सिर्फ क्रूड सप्लायर नहीं… बल्कि India का long-term strategic energy partner बनना चाहता है.
क्योंकि यह बयान ऐसे समय आया है जब:
और भारत अपनी एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर बेहद सतर्क है.
इस बार BRICS भी पहले जैसा नहीं है.
अब इसमें:
जैसे नए सदस्य शामिल हो चुके हैं. यानी अब BRICS सिर्फ emerging economies का समूह नहीं… बल्कि एनर्जी इन्फ्लूएंस ब्लॉक भी बनता दिख रहा है.
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यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. रूस और भारत के बीच सिर्फ crude oil trade नहीं होता. दोनों देशों के बीच:
जैसे कई समझौते हैं. इसीलिए लावरोव ने “energy supply agreements” शब्द का इस्तेमाल किया. उनका संदेश साफ था चाहे ग्लोबल प्रेशर कितना भी बढ़ जाए Russia-India एनर्जी पार्टनरशिप नहीं टूटेगी.
Lavrov ने इंटरव्यू में कहा- “भारत और रूस के रिश्ते गहरी दोस्ती पर आधारित हैं. ऐसी कोई स्थिति पैदा नहीं हो सकती, जिसमें हमारे रास्ते अलग हो जाएं.” यह सिर्फ diplomatic लाइन नहीं है. दरअसल, रूस पर पश्चिमी प्रतिबंध हैं. भारत पर भी लगातार geopolitical pressure रहता है. लेकिन दोनों देश स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी बनाए रखना चाहते हैं.
यानी Russia चाहता है कि India उसके लिए भरोसेमंद पार्टनर बना रहे और भारत चाहता है कि उसकी एनर्जी सप्लाई सुरक्षित रहे.
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1. क्योंकि भारत भारी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है. ऐसे में crude oil, LNG, coal की सप्लाई बाधित होने का सीधा असर अर्थव्यवस्था पर पड़ता है.
2. रूस ने मुश्किल वक्त में सप्लाई जारी रखी
जब दुनिया के कई हिस्सों में सप्लाई संकट था… तब रूस ने भारत को डिस्काउंटेड क्रूड, लगातार शिपमेंट्स, अल्ट्रनेटिव ट्रेड एग्रीमेंट्स दिए. यही वजह है कि दोनों देशों की एनर्जी पार्टनरशिप और मजबूत हुई.
लावरोव ने तमिलनाडु के Kudankulam Nuclear Power Plant को दोनों देशों की दोस्ती का सबसे बड़ा उदाहरण बताया. यह सिर्फ एक बिजली परियोजना नहीं…बल्कि स्ट्रैटेजिक एनर्जी कॉरपोरेशन मॉडल है.
उन्होंने कहा:
| वजह | असर |
| Nuclear Energy | स्थिर बिजली उत्पादन |
| कम Fossil Fuel dependence | आयात दबाव कम |
| Long-term energy source | भविष्य की जरूरतें पूरी |
| Russia technology support | रणनीतिक सहयोग मजबूत |
पहली यूनिट फरवरी 2016 से 1000 मेगावाट क्षमता पर काम कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक 2027 तक पूरा प्रोजेक्ट फुल कैपेसिटी पर पहुंच सकता है.
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रूसी विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक” बताया. उन्होंने कहा, मोदी भारत की संप्रभुता मजबूत कर रहे हैं. अर्थव्यवस्था, रक्षा और संस्कृति पर फोकस कर रहे हैं. और भारत वैश्विक स्तर पर मजबूत भूमिका निभा रहा है. यह बयान सिर्फ तारीफ नहीं… बल्कि रूस की तरफ से पॉलिटिकल एन्डोर्समेंट भी माना जा रहा है.
लावरोव ने कहा- “हिंदी-रूसी भाई-भाई सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं… बल्कि दोनों देशों की संस्कृति का हिस्सा है.” उन्होंने राज कपूर, भारतीय सिनेमा, टीवी सीरियल्स तक का जिक्र किया. दरअसल, रूस लगातार यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि India-Russia relation सिर्फ डिफेंस डील तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पब्लिक कनेक्ट भी मजबूत है.
लावरोव भारत पहुंच चुके हैं. वो यहां विदेश मंत्री S. Jaishankar से मुलाकात करेंगे. BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा ले रहे हैं.
मुख्य मुद्दे हो सकते हैं:
यही इस बार BRICS की सबसे बड़ी जियोपॉलिटिकल कहानी है. ईरान दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रिजर्व में शामिल है. मिडिल ईस्ट टेंशन का का केंद्र है. UAE ग्लोबल एनर्जी ट्रेडिंग हब है औऱ भारत का बड़ा एनर्जी पार्टनर भी है. यानी अब BRICS में सप्लायर भी हैं, बायर भी हैं और लॉजिस्टिक हब भी शामिल हैं.
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लावरोव का इशारा साफ तौर पर पश्चिमी दबाव और प्रतिबंधों की तरफ माना जा रहा है. रूस का आरोप है कि ग्लोबल एनर्जी ट्रेड पॉलिटिसाइज्ड हो रहा है. प्रतिबंध से सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है. और ऑल्टरनेटिव पार्टनरशिप को रोकने की कोशिश हो रही. लेकिन Russia का कहना है कि भारत के साथ समझौते जारी रहेंगे.
बहुत फर्क पड़़ता है. अगर तेल सप्लाई स्थिर रहती है, एनर्जी इंपोर्ट्स जारी रहते हैं और क्रूड का भाव कंट्रोल में रहते हैं तो पेट्रोल-डीजल महंगाई सीमित रह सकती है. ट्रांसपोर्ट कॉस्ट कम दबाव में रहेगा. महंगाई को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.
Sergey Lavrov का यह बयान सिर्फ डिप्लोमैटिक नहीं था. यह उस समय आया है जब दुनिया का एनर्जी क्षेत्र में अनिश्चतता में है. BRICS का स्वरूप बदल रहा है. भारत स्ट्रैटेजिक बैलेंस साध रहा है और मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है. ऐसे में रूस का यह कहना कि भारत के एनर्जी इंट्रस्ट प्रभावित नहीं होंगे.” दरअसल भारत के लिए एक भू-राजनीतिक भरोसा भी है औऱ स्ट्रैटेजिक संकेत भी.