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Richest CM of India: आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्री हैं, जिनकी कुल संपत्ति 931 करोड़ रुपये से ज्यादा है. वहीं, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू 332 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे सबसे अमीर हैं. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 51 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर हैं. यह रिपोर्ट एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने जारी की है.
ADR की रिपोर्ट Analysis of Current Chief Ministers from 28 State Assemblies and 3 Union Territories of India 2024 के मुताबिक, चंद्रबाबू नायडू 931 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ सबसे अमीर हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सिर्फ 15 लाख रुपये के साथ सबसे गरीब हैं.वहीं, सभी 31 मुख्यमंत्रियों की कुल संपत्ति 1,630 करोड़ रुपये है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रति मुख्यमंत्री औसतन 52.59 करोड़ रुपये की संपत्ति है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जहां 2023-2024 के लिए भारत की प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय या NNI लगभग 1,85,854 रुपये थी, वहीं एक मुख्यमंत्री की औसत आय 13,64,310 रुपये है, जो भारत की औसत प्रति व्यक्ति आय का लगभग 7.3 गुना है.

रिपोर्ट यह भी बताती है कि पेमा खांडू पर सबसे ज्यादा 180 करोड़ रुपये का कर्ज है. वहीं, सिद्धारमैया पर 23 करोड़ रुपये और चंद्रबाबू नायडू पर 10 करोड़ रुपये का कर्ज है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 55 लाख रुपये की संपत्ति के साथ दूसरे सबसे गरीब हैं. केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन 1.18 करोड़ रुपये की संपत्ति के साथ तीसरे स्थान पर हैं.

आपराधिक मामलों की बात करें तो 31 में से 13 मुख्यमंत्रियों ने खुद पर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है. इनमें से 10 मुख्यमंत्रियों पर गंभीर अपराध जैसे हत्या का प्रयास, अपहरण, रिश्वतखोरी और धमकी के मामले हैं. तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर सबसे ज्यादा 89 मामले दर्ज हैं, जिनमें 72 गंभीर हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर 47 मामले हैं, जिनमें 11 गंभीर हैं. चंद्रबाबू नायडू पर 19 आपराधिक मामले हैं. 31 मुख्यमंत्रियों में केवल दो ही महिलाएं हैं जिसमें पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी और दिल्ली की आतिशी हैं.
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की 931 करोड़ रुपये की संपत्ति का लगभग 82 प्रतिशत हिस्सा डेयरी उत्पाद फर्म हेरिटेज फूड्स लिमिटेड में उनके परिवार की हिस्सेदारी के कारण है. कंपनी के अधिकारियों ने यह दावा किया है. अधिकारियों ने कहा कि कंपनी को तीन दशक से भी अधिक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था को खोले जाने के तुरंत बाद 1992 में स्थापित किया गया था.
दूध और डेयरी उत्पादों की खुदरा बिक्री करने वाली इस कंपनी को 1994 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध किया गया था. हालांकि, इस कंपनी में नायडू की कोई हिस्सेदारी नहीं है लेकिन उनकी पत्नी भुवनेश्वरी नारा के पास 24.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है जिसकी कीमत लगभग 763 करोड़ रुपये है. उनकी इस शेयर पूंजी को नायडू की संपत्ति के रूप में गिना जाता है.
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट में नायडू को 931 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ देश का सबसे अमीर मुख्यमंत्री बताया गया है. इस दावे पर हेरिटेज फूड्स के अधिकारियों ने कहा कि कंपनी शुद्ध रूप से दैनिक उत्पाद बेचने वाली खुदरा विक्रेता है और बुनियादी ढांचा जैसे साठगांठ पर आधारित किसी पूंजीवादी क्षेत्र में नहीं है.
कंपनी अधिकारियों ने कहा, "किसी तरह की सरकारी सब्सिडी या मदद नहीं पाने वाली कोई खुदरा विक्रेता तभी बढ़ सकती है जब उसके उत्पादों को लोग पसंद करें. यह कंपनी तब स्थापित की गई थी जब नायडू सिर्फ एक विधायक थे. फर्म के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के बाद वह राज्य के मुख्यमंत्री बने थे."
उन्होंने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में संयुक्त आंध्र प्रदेश में नायडू का गृह जनपद चित्तूर राज्य का सबसे बड़ा दूध उत्पादक जिला था. उस समय यहां दूध खपत से अधिक था और उसका विपणन कर पाना दूध उत्पादकों के लिए मुश्किल था. ऐसी स्थिति में जब तत्कालीन वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थव्यवस्था को निजी क्षेत्र के लिए खोलने का फैसला किया तो नायडू ने 1992 में 50 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ हेरिटेज फूड्स की स्थापना की थी. कंपनी अधिकारियों के मुताबिक, नायडू दो साल तक हेरिटेज फूड्स के प्रबंध निदेशक रहे थे. लेकिन 1994 में पहली बार मंत्री बनने पर उन्होंने पद छोड़ दिया था.