Delivery Trends 2026: फास्ट डिलीवरी की रेस हुई पुरानी! अब ग्राहकों को 10 मिनट नहीं, चाहिए 'भरोसेमंद' टाइमिंग; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

सोशल मीडिया पर गलत डिलीवरी की शिकायतों के बीच नई रिसर्च ने सबको चौंका दिया है. ग्राहक अब 10 मिनट वाली फास्ट डिलीवरी के बजाय भरोसेमंद और तय समय पर डिलीवरी चाहते हैं.तो जानिए क्यों भारत में 'क्विक कॉमर्स' का मॉडल अब सवालों के घेरे में है और कंपनियां डिलीवरी लागत कम करने के लिए AI का सहारा क्यों ले रही हैं.
Delivery Trends 2026: फास्ट डिलीवरी की रेस हुई पुरानी! अब ग्राहकों को 10 मिनट नहीं, चाहिए 'भरोसेमंद' टाइमिंग; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

ग्राहक अब 10 मिनट वाली फास्ट डिलीवरी के बजाय भरोसेमंद और तय समय पर डिलीवरी चाहते हैं   (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)

Delivery Trends 2026: आजकल सोशल मीडिया पर शिकायतों की बाढ़ आई रहती है कि मंगाया कुछ और था, आ कुछ और गया, कभी डिलीवरी मिली ही नहीं, तो कभी गलत सामान हाथ में थमा दिया गया. इन सबके बीच FarEye, ASCLA और SCMAP की एक रिपोर्ट ने हैरान करने वाला खुलासा किया है. सामने आई इस रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहक अब सबसे तेज डिलीवरी के पीछे नहीं भाग रहे, बल्कि उन्हें ऐसी डिलीवरी चाहिए जिस पर वो भरोस' कर सकें.

स्पीड नहीं, सही समय है सबसे जरूरी

इस रिसर्च में यह बात सामने आई है कि एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र के 41% ऑपरेटर्स अब मानते हैं कि ग्राहकों के लिए Predictable Delivery Time (तय समय पर फिक्स डिलीवरी) सबसे अहम है.

हैरानी की बात ये है कि सबसे तेज डिलीवरी को केवल 22% ऑपरेटर्स ने ही वैल्यू दी है. इसका मतलब साफ है कि भारत में जो 10-20 मिनट वाली डिलीवरी का मॉडल चल रहा है और जिस पर भारी इन्वेस्टमेंट किया गया है, वह शायद गलत दिशा में जा रहा है. ग्राहकों के लिए स्पीड से ज्यादा यह मायने रखता है कि जो समय दिया गया है, सामान ठीक उसी वक्त पर मिले.

अच्छी सर्विस के लिए एक्स्ट्रा पैसे देने को तैयार हैं ग्राहक

ये रिपोर्ट कहती है कि 60% ऑपरेटर्स का मानना है कि अगर डिलीवरी भरोसेमंद और तय टाइम पर हो, तो ग्राहक इसके लिए एक्स्ट्रा पैसा खर्च करने से भी पीछे नहीं हटते हैं. लेकिन कंपनियों के लिए चुनौती बढ़ रही है क्योंकि डिलीवरी की कॉस्ट सालाना औसतन 18.9% की दर से बढ़ रही है.

कंपनियों का कहां हो रहा है नुकसान?

भारत जैसे देशों में कंपनियों को खराब मैनेजमेंट की वजह से बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. असल में सर्वे के अनुसार 75% ऑपरेटर्स ने माना कि खराब रूटिंग (रास्तों का सही चुनाव न होना) सबसे बड़ी ऑपरेशनल समस्या है.

करीब 57% ऑपरेटर्स के मुताबिक ड्राइवरों की कमी दूसरी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है. वहीं, फेल्ड डिलीवरी और बार-बार री-शेड्यूलिंग करने से कंपनियों का मुनाफा कम हो रहा है.

AI पर भरोसा तो है, पर यूज बहुत कम

आजकल AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की बातें बहुत हो रही हैं. लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, 98% ऑपरेटर्स को AI पर पूरा भरोसा है कि यह उनकी मुश्किलें हल कर सकता है. लेकिन हकीकत यह है कि केवल 15% ने ही अब तक AI का बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू किया है.

आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन

इतना ही नहीं डिलीवरी के बढ़ते बोझ को संभालने के लिए कंपनियां अब बाहरी कूरियर पार्टनर्स का सहारा ले रही हैं. फिलहाल 62% ऑपरेटर्स आउटसोर्स्ड डिलीवरी नेटवर्क चला रहे हैं, और अगले 5 सालों में 48% कंपनियां इसे और बढ़ाने की योजना बना रही हैं.

एक नजर में समझें पूरी रिसर्च

नई रिसर्च में खुलासा, ग्राहक सबसे तेज नहीं बल्कि भरोसेमंद और तय समय पर डिलीवरी चाहते हैं

APAC क्षेत्र के 41% ऑपरेटर्स ने Predictable Delivery Time को सबसे अहम ग्राहक जरूरत बताया

सबसे तेज डिलीवरी को केवल 22% ऑपरेटर्स ने प्राथमिकता माना

रियल-टाइम ट्रैकिंग को सिर्फ 10% ने सबसे अहम फीचर बताया

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 10-20 मिनट डिलीवरी मॉडल पर भारी निवेश शायद गलत दिशा में गया

ग्राहकों के लिए स्पीड से ज्यादा भरोसेमंद डिलीवरी मायने रखती है

60% ऑपरेटर्स का कहना है कि ग्राहक अच्छी डिलीवरी के लिए अतिरिक्त पैसा देने को तैयार हैं

APAC में डिलीवरी लागत सालाना औसतन 18.9% बढ़ी

भारत में फेल्ड डिलीवरी, री-शेड्यूलिंग और खराब रूटिंग से कंपनियों का बड़ा नुकसान हो रहा है

75% ऑपरेटर्स ने खराब रूटिंग को सबसे बड़ी ऑपरेशनल समस्या बताया

57% ऑपरेटर्स के मुताबिक ड्राइवर की कमी दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है

98% ऑपरेटर्स AI पर भरोसा करते हैं, लेकिन सिर्फ 15% ने AI का व्यापक इस्तेमाल शुरू किया है

AI अपनाने में सबसे बड़ी बाधा सिस्टम इंटीग्रेशन, तकनीकी विशेषज्ञता और खराब डेटा क्वालिटी है

62% ऑपरेटर्स आउटसोर्स्ड डिलीवरी नेटवर्क चला रहे हैं

अगले 5 सालों में 48% कंपनियां आउटसोर्सिंग और बढ़ाने की योजना बना रही हैं


निष्कर्ष

FarEye, ASCLA और SCMAP की यह साझा रिपोर्ट साफ इशारा करती है कि 2026 तक डिलीवरी की दुनिया बदल जाएगी. अब मुकाबला 'कौन सबसे पहले पहुँचेगा' का नहीं, बल्कि 'कौन सही समय पर और सही सामान पहुंचाएगा' का होने वाला है. यानी अब सिर्फ तेज होना काफी नहीं है, भरोसेमंद होना भी जरूरी है. (रिपोर्ट सोर्स: Eye on the Last Mile 6.0 (2026 APAC Edition)


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