4 देशों की बड़ी पहल, ₹1.9 लाख करोड़ का निवेश; क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ की सप्लाई होगी मजबूत

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए नई पहल शुरू की है. इसके तहत 20 अरब डॉलर तक निवेश जुटाने, माइनिंग-प्रोसेसिंग बढ़ाने और ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की योजना है.
4 देशों की बड़ी पहल, ₹1.9 लाख करोड़ का निवेश; क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ की सप्लाई होगी मजबूत

क्वाड देशों की बड़ी पहल, क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई को मजबूत करने पर होगा फोकस (फोटो - AI)

Quad सदस्य देशों जैसे भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका ने क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए बड़ी पहल की है. क्वाड देशों ने “क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनीशिएटिव” के तहत सुरक्षित, विविध और मजबूत सप्लाई चेन विकसित करने का फैसला किया है.

इस पहल का मकसद एडवांस टेक्नोलॉजी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, क्लीन एनर्जी, डिफेंस और इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की उपलब्धता सुनिश्चित करना है.

20 अरब डॉलर तक निवेश का लक्ष्य

क्वाड देशों ने इस पहल के तहत सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से करीब 20 अरब डॉलर (1.9 लाख करोड़ रुपए) तक का निवेश जुटाने का इरादा जताया है. यह निवेश माइनिंग, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा. इस फ्रेमवर्क के तहत उन प्रोजेक्ट्स की पहचान की जाएगी जिनका क्वाड देशों से सीधा संबंध हो.

इसमें क्वाड देशों में स्थित प्रोजेक्ट्स, वहां की कंपनियों की ओर से संचालित परियोजनाएं या क्वाड मार्केट्स को सप्लाई करने वाले प्रोजेक्ट शामिल हो सकते हैं. इसके अलावा निर्यात क्रेडिट एजेंसियों, डेवलपमेंट फाइनेंस संस्थानों और निजी पूंजी के जरिए रणनीतिक परियोजनाओं को समर्थन दिया जाएगा.

चीन पर निर्भरता कम करने पर फोकस

दुनियाभर में इस समय क्रिटिकल मिनरल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी, सेमीकंडक्टर, डिफेंस सिस्टम और हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक्स में इनका इस्तेमाल बढ़ने से इनकी रणनीतिक अहमियत भी काफी बढ़ गई है.

फिलहाल वैश्विक प्रोसेसिंग मार्केट में चीन का दबदबा माना जाता है. ऐसे में क्वाड देशों की यह पहल सप्लाई चेन को अधिक विविध और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है.

Zee Business Hindi Live TV यहां देखें

रेगुलेटरी सहयोग और तेज मंजूरी पर जोर

क्वाड देशों ने यह भी कहा है कि वे लाइसेंसिंग, परमिट और रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के लिए आपस में सहयोग करेंगे. इसके तहत टेक्निकल जानकारी साझा करना, परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को तेज करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े जोखिमों पर निगरानी जैसे कदम शामिल होंगे.

साथ ही भू-वैज्ञानिक मैपिंग, रिसोर्स असेसमेंट और नई तकनीकों के विकास में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा.

ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग पर भी फोकस

इस पहल में ई-वेस्ट और स्क्रैप मटेरियल से क्रिटिकल मिनरल्स की रिकवरी और रीसाइक्लिंग पर भी खास ध्यान दिया गया है.
क्वाड देशों ने कहा कि वे रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी, कलेक्शन नेटवर्क और प्रोसेसिंग सिस्टम में निवेश को बढ़ावा देंगे.
इसके अलावा ई-वेस्ट से रेयर अर्थ और अन्य जरूरी मिनरल्स निकालने के लिए नई तकनीकों पर मिलकर काम किया जाएगा.

भारत के लिए क्यों अहम है यह समझौता?

यह पहल भारत के लिए काफी अहम साबित हो सकती है. भारत इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी मैन्युफैक्चरिंग और क्लीन एनर्जी सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा रहा है. ऐसे में मजबूत क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन भारत की इंडस्ट्रियल ग्रोथ और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी मानी जा रही है. क्वाड देशों की यह साझेदारी आने वाले समय में वैश्विक सप्लाई चेन के नए ढांचे को आकार देने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.

(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)

Add Zee Business as a Preferred Source
  1. 1
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 5
  6. 6