PM विश्वकर्मा योजना का कमाल: 30 लाख कारीगरों का रजिस्ट्रेशन, ₹41,188 करोड़ के लोन से बदलेगी किस्मत!

पीएम विश्वकर्मा योजना से 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों को बड़ा सहारा मिला है. अब तक ₹41,188 करोड़ के 4.7 लाख लोन मंजूर हुए हैं. यह स्कीम प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और बिना गारंटी लोन के जरिए कारीगरों को आत्मनिर्भर बना रही है.
PM विश्वकर्मा योजना का कमाल: 30 लाख कारीगरों का रजिस्ट्रेशन, ₹41,188 करोड़ के लोन से बदलेगी किस्मत!

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना शुरू होने के दो साल पूरे होने पर सरकार ने इसका अपडेट साझा किया है.सरकार के मुताबिक इस योजना में अब तक लगभग 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. इनमें से बड़ी संख्या में लोगों को स्किल वेरिफिकेशन और ट्रेनिंग का लाभ भी दिया जा चुका है. इतना ही नहीं, योजना के अंतर्गत अब तक 41,188 करोड़ रुपए के 4.7 लाख लोन मंजूर किए जा चुके हैं, जो कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम है.

ट्रेनिंग और स्किल वेरिफिकेशन में बड़ी उपलब्धि

सरकार ने बताया कि योजना के तहत लगभग 26 लाख कारीगरों और शिल्पकारों का स्किल वेरिफिकेशन पूरा हो गया है. इनमें से करीब 86% लोगों ने अपनी बेसिक ट्रेनिंग पूरी कर ली है. सबसे ज्यादा रजिस्ट्रेशन राजमिस्त्री (Mason) पेशे में देखने को मिले हैं, जो इस बात को दर्शाता है कि निर्माण कार्य से जुड़े पारंपरिक बिजनेस अभी भी बड़ी संख्या में लोगों की रोज़ी-रोटी का साधन हैं.

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आधुनिक उपकरणों और तकनीक का लाभ

सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि योजना का उद्देश्य सिर्फ रजिस्ट्रेशन तक सीमित नहीं है, बल्कि कारीगरों को आधुनिक उपकरणों से लैस करना भी है. इसके लिए 23 लाख से अधिक ई-वाउचर टूलकिट इंसेंटिव के रूप में जारी किए गए हैं. इन वाउचर्स के जरिए कारीगर नए औज़ार खरीद सकते हैं और अपने काम को और बेहतर बना सकते हैं.

योजना की शुरुआत और बजट

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की शुरुआत 17 सितंबर, 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर की गई थी. इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 13,000 करोड़ रुपए रखा गया है, जो फाइनेंशियल ईयर 2023-24 से 2027-28 तक लागू रहेगा. सरकार ने इसे एक परिवर्तनकारी योजना बताया है, जिसका मकसद पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को न सिर्फ पहचान दिलाना है बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना भी है.

योजना का उद्देश्य

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Kaushal Samman) का मुख्य उद्देश्य है –

पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को उनके काम के लिए मान्यता देना

उन्हें कौशल प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराना

संपार्श्विक-मुक्त (Collateral Free) लोन उपलब्ध कराना

डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना

और उनके उत्पादों को ब्रांड प्रमोशन और मार्केट कनेक्टिविटी के जरिए बड़े बाजार से जोड़ना.

वंचित और विशेष समूहों पर फोकस

यह स्कीम खास रूप से उन वर्गों को ध्यान में रखकर बनाई गई है, जो समाज के वंचित हिस्से से आते हैं. इनमें महिलाएं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर, पूर्वोत्तर राज्यों, द्वीपीय और पहाड़ी क्षेत्रों के निवासी शामिल हैं, इस फोकस से सरकार चाहती है कि कोई भी कारीगर या शिल्पकार पीछे न रह जाए.

जिला स्तर पर निगरानी

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला परियोजना प्रबंधन इकाइयां (DPMU) बनाई गई हैं. जुलाई 2025 तक देशभर में 497 डीपीएमयू नियुक्त किए जा चुके हैं, जो 618 जिलों को कवर कर रहे हैं. इनकी भूमिका योजना की जानकारी फैलाना, ट्रेनिंग बैच और केंद्रों की जानकारी देना, हितधारकों के साथ समन्वय करना और ट्रेनिंग की गुणवत्ता की निगरानी करना है.

डिजिटल और वित्तीय सशक्तिकरण

सरकार की मंशा है कि कारीगर न सिर्फ पारंपरिक तरीके से बल्कि डिजिटल माध्यमों से भी सक्षम हों. इसलिए इस योजना में डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। साथ ही, लोन और टूलकिट जैसी मदद सीधे उनके खातों में पहुंचाई जा रही है. इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका भी खत्म होती है.

छोटे कारीगरों को मिला बड़ा मंच

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह छोटे-छोटे कारीगरों को एक मंच पर लाकर उन्हें मान्यता देती है. ये वही लोग हैं जो सदियों से अपनी कला और हुनर से समाज की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं. अब योजना के जरिए उन्हें आधुनिक जमाने के मुताबिक ट्रेनिंग, औजार और वित्तीय मदद दी जा रही है, ताकि वे न सिर्फ स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना सकें.

फ्यूचर की संभावनाएं

अगर इस योजना का सही तरीके से क्रियान्वयन होता रहा तो आने वाले वर्षों में भारत के पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार ग्लोबल ब्रांड बन सकते हैं. यह न केवल उनके जीवन स्तर को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा.सरकार का मानना है कि यह पहल न सिर्फ रोजगार सृजन में सहायक होगी, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और कला को संरक्षित भी रखेगी.

कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने सिर्फ दो साल में ही बड़ी संख्या में कारीगरों और शिल्पकारों को जोड़कर अपनी उपयोगिता साबित की है. यह पहल आने वाले समय में भारत के हस्तशिल्प और पारंपरिक हुनर को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकती है.

5 FAQs

Q1. पीएम विश्वकर्मा योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है जो कारीगरों और शिल्पकारों को प्रशिक्षण, टूलकिट और बिना गारंटी लोन उपलब्ध कराती है.

Q2. अब तक कितने लोगों ने योजना में पंजीकरण कराया है?
करीब 30 लाख कारीगरों और शिल्पकारों ने पंजीकरण कराया है.

Q3. इस योजना के तहत कितने लोन मंजूर हुए हैं?
सरकार ने ₹41,188 करोड़ के 4.7 लाख लोन मंजूर किए हैं.

Q4. इस योजना का लाभ किन्हें मिलेगा?
कारीगर, शिल्पकार, महिलाएं, SC/ST, OBC, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर और पहाड़ी व पूर्वोत्तर राज्यों के लोग लाभ ले सकते हैं.

Q5. पीएम विश्वकर्मा योजना कब शुरू हुई थी?
यह योजना 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर शुरू हुई थी.

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