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दुनिया के नक्शे पर पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ती हलचल ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. इस तनाव का सीधा असर भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक न पड़े, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कमान संभाल चुके हैं. आज यानी रविवार की शाम पीएम मोदी ने अपने वरिष्ठ मंत्रियों और आला अधिकारियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण हाई-लेवल बैठक बुलाई है.
इस बैठक का एकमात्र मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्लोबल लेवल पर चल रही उथल-पुथल का असर भारत की सप्लाई चेन पर रत्ती भर भी न हो. प्रधानमंत्री का फोकस बहुत साफ है- चाहे पेट्रोल-डीजल हो, बिजली हो या फिर किसानों के लिए खाद, देश के हर कोने में इनकी आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहनी चाहिए.
पश्चिम एशिया में जो हालात बन रहे हैं, उनका सीधा असर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और गैस की कीमतों पर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा यहीं से आयात करता है. पीएम मोदी ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि यह वैश्विक ऊर्जा संकट की स्थिति है और ऐसे समय में राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा होती है.
आज की बैठक इसी परीक्षा की तैयारी है. प्रधानमंत्री चाहते हैं कि दुनिया में चाहे जो भी हो, भारत के आम आदमी और यहां के उद्योगों को किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े.
आज शाम होने वाली इस बैठक का एजेंडा काफी विस्तृत है. पीएम मोदी मुख्य रूप से चार बड़े क्षेत्रों की स्थिति की बारीकी से समीक्षा करेंगे-
पेट्रोलियम और क्रूड ऑयल: कच्चे तेल की कीमतों और इसके आयात के रास्तों पर चर्चा होगी.
पावर (बिजली): देश में बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन की उपलब्धता जांची जाएगी.
उर्वरक (फर्टिलाइजर): किसानों के लिए खाद की सप्लाई में कोई बाधा न आए, यह सुनिश्चित किया जाएगा.
लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन: सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने के रास्ते सुरक्षित और चालू रहें.
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि देश के भीतर लॉजिस्टिक्स और डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम इतना मजबूत हो कि ग्लोबल सप्लाई चेन में आने वाली किसी भी रुकावट का असर यहां न दिखे.
प्रधानमंत्री ने 12 मार्च को भी इस बात पर जोर दिया था कि युद्ध जैसी स्थितियों से निपटने के लिए शांति, धैर्य और सार्वजनिक जागरूकता बहुत जरूरी है. सरकार अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर पल-पल नजर रख रही है ताकि समय रहते प्रो-एक्टिव कदम उठाए जा सकें.
इस बैठक का सबसे बड़ा संदेश यह है कि सरकार उपभोक्ताओं और उद्योगों के साथ खड़ी है. महंगाई को काबू में रखने और फैक्ट्रियों का पहिया न थमे, इसके लिए जरूरी है कि तेल और बिजली जैसी बुनियादी चीजों की कीमतें स्थिर रहें.
पीएम मोदी की यह बैठक इसी 'सुरक्षा चक्र' को मजबूत करने की एक कड़ी है. सरकार का मानना है कि सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है, इसलिए सप्लाई चैन के हर छोटे-बड़े लिंक की आज शाम समीक्षा की जाएगी.
प्रधानमंत्री ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए दिन-रात काम कर रही है. भारत ने हमेशा से ही वैश्विक परिस्थितियों को धैर्य के साथ हैंडल किया है. आज की यह हाई-लेवल मीटिंग भी इसी रणनीति का हिस्सा है, जहां प्रो-एक्टिव स्टेप्स लेकर आने वाली संभावित चुनौतियों को पहले ही भांपने और उनका समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी.