समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण पर सरकार की सख्ती! अब जहाजों पर खुले में नहीं दिखेंगे पेलेट्स, 15 अप्रैल से बदल जाएंगे नियम

केरल और तमिलनाडु के तटों पर हाल ही में हुई प्रदूषण की घटनाओं के बाद सरकार ने आदेश दिया है कि अब कोई भी मालवाहक जहाज इन प्लास्टिक पेलेट्स को डेक पर नहीं रख सकेगा. नया नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू होगा.
समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण पर सरकार की सख्ती! अब जहाजों पर खुले में नहीं दिखेंगे पेलेट्स, 15 अप्रैल से बदल जाएंगे नियम

समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए ये एक बड़ा और जरूरी कदम है (फोटो सोर्स: Freepik)

भारत सरकार के महानिदेशालय नौवहन (DGS) ने समुद्री पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक पेलेट्स के परिवहन पर सख्त पाबंदी लगा दी है. केरल और तमिलनाडु के तटों पर हाल ही में हुई प्रदूषण की घटनाओं के बाद, सरकार ने आदेश दिया है कि अब कोई भी मालवाहक जहाज इन प्लास्टिक पेलेट्स को डेक (जहाज की ऊपरी सतह) पर नहीं रख सकेगा. इन्हें केवल 'अंडर डेक' (जहाज के अंदरूनी हिस्से) में ही स्टोर करना अनिवार्य होगा. यह नया नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू होगा.

सरकार को इतना सख्त कदम उठाने की जरूरत क्यों पड़ी?

ज़ी बिजनेस के सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट अंबरीश पांडेय के मुताबिक, हाल के सालों में समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण तेजी से बढ़ा है, खासकर जहाजों से गिरने वाले प्लास्टिक पेलेट्स से. ये समुद्री जीवन और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं. ये छोटे दाने (Nurdles) समुद्र के पानी और तटों पर फैलकर भयानक प्रदूषण फैलाते हैं. इन्हें साफ करना लगभग नामुमकिन होता है और ये समुद्री जीवों के पेट में जाकर पूरी फूड चेन को बर्बाद कर रहे हैं.

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नए नियमों में स्टोवेज को लेकर क्या बदलाव हुए हैं?

  • नए सर्कुलर के अनुसार, प्लास्टिक पेलेट्स ले जाने वाले जहाजों को अब सारा माल 'अंडर डेक' ही रखना होगा.
  • जहाज के खुले ऊपरी हिस्से पर इनका परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है.
  • इसका मुख्य उद्देश्य खराब मौसम में कंटेनर के समुद्र में गिरने और फटने के जोखिम को शून्य करना है.

प्लास्टिक पेलेट्स क्या होते हैं?

  • ये छोटे-छोटे प्लास्टिक के दाने होते हैं.
  • प्लास्टिक प्रोडक्ट बनाने में इस्तेमाल होते हैं.

समस्या क्या है?

अगर ये समुद्र में गिर जाएं तो मछलियां इन्हें खा लेती हैं. समुद्री इकोसिस्टम को नुकसान होता है.

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सरकार ने क्या कहा?

  • समुद्री सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता
  • अंतरराष्ट्रीय नियमों (IMO) का पालन जरूरी
  • जहाजों से प्लास्टिक गिरने की घटनाओं को रोकना

क्या केवल जगह बदलने से समस्या हल हो जाएगी?

नहीं, जगह के साथ-साथ सरकार ने पैकेजिंग पर भी नकेल कसी है. अब प्लास्टिक पेलेट्स की पैकिंग IMDG कोड के मानकों के अनुरूप होनी चाहिए. यह वही मानक हैं जो खतरनाक रसायनों या विस्फोटकों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि रिसाव की गुंजाइश न रहे.

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इन नियमों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा?

  • इस सर्कुलर का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कई स्तरों पर तय की गई है-
  • पोर्ट स्टेट कंट्रोल (PSC): बंदरगाहों पर अधिकारी जहाजों का निरीक्षण करेंगे.
  • शिपिंग लाइन्स और लॉजिस्टिक्स एजेंट: इन्हें बुकिंग के समय ही कड़े नियमों का पालन करना होगा.
  • मल्टीमोडल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर्स (MTOs): इन्हें भी नई गाइडलाइन्स का पालन करना अनिवार्य है.

आगे क्या बदलेगा?

  • आने वाले समय में प्लास्टिक ढुलाई के नियम और सख्त होंगे.
  • कंटेनर सुरक्षा पर ज्यादा निवेश
  • कंपनियों को कंप्लायंस बढ़ाना होगा

इसका मतलब है कि शिपिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आने वाला है.

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कंक्लूजन

अगर आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट या लॉजिस्टिक्स बिजनेस से जुड़े हैं, तो 15 अप्रैल के बाद अपनी शिपिंग प्लानिंग बदल लें. 'ऑन डेक' लोडिंग की जिद अब भारी जुर्माना या शिपमेंट रिजेक्शन का कारण बन सकती है. आम नागरिक के तौर पर, यह फैसला हमारे समुद्रों को साफ रखने और सी-फूड की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा सुरक्षा कवच है.

आर्टिकल से जु़ड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1. प्लास्टिक पेलेट्स खतरनाक क्यों हैं?
ये समुद्री जीवों द्वारा खा लिए जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं.

Q2. क्या ये नियम भारत में ही लागू हैं?
नहीं, ये अंतरराष्ट्रीय मानकों (IMO) पर आधारित हैं.

Q3. क्या शिपिंग कंपनियों पर असर पड़ेगा?
हां, उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे.

Q4. क्या इससे प्रदूषण पूरी तरह खत्म होगा?
नहीं, लेकिन काफी हद तक कम होगा.

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