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समुद्र में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने के लिए ये एक बड़ा और जरूरी कदम है (फोटो सोर्स: Freepik)
भारत सरकार के महानिदेशालय नौवहन (DGS) ने समुद्री पर्यावरण को बचाने के लिए प्लास्टिक पेलेट्स के परिवहन पर सख्त पाबंदी लगा दी है. केरल और तमिलनाडु के तटों पर हाल ही में हुई प्रदूषण की घटनाओं के बाद, सरकार ने आदेश दिया है कि अब कोई भी मालवाहक जहाज इन प्लास्टिक पेलेट्स को डेक (जहाज की ऊपरी सतह) पर नहीं रख सकेगा. इन्हें केवल 'अंडर डेक' (जहाज के अंदरूनी हिस्से) में ही स्टोर करना अनिवार्य होगा. यह नया नियम 15 अप्रैल 2026 से लागू होगा.
ज़ी बिजनेस के सीनियर स्पेशल कॉरेस्पॉन्डेंट अंबरीश पांडेय के मुताबिक, हाल के सालों में समुद्र में प्लास्टिक प्रदूषण तेजी से बढ़ा है, खासकर जहाजों से गिरने वाले प्लास्टिक पेलेट्स से. ये समुद्री जीवन और पर्यावरण के लिए बड़ा खतरा बन रहे हैं. ये छोटे दाने (Nurdles) समुद्र के पानी और तटों पर फैलकर भयानक प्रदूषण फैलाते हैं. इन्हें साफ करना लगभग नामुमकिन होता है और ये समुद्री जीवों के पेट में जाकर पूरी फूड चेन को बर्बाद कर रहे हैं.
समस्या क्या है?
अगर ये समुद्र में गिर जाएं तो मछलियां इन्हें खा लेती हैं. समुद्री इकोसिस्टम को नुकसान होता है.
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नहीं, जगह के साथ-साथ सरकार ने पैकेजिंग पर भी नकेल कसी है. अब प्लास्टिक पेलेट्स की पैकिंग IMDG कोड के मानकों के अनुरूप होनी चाहिए. यह वही मानक हैं जो खतरनाक रसायनों या विस्फोटकों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, ताकि रिसाव की गुंजाइश न रहे.

इसका मतलब है कि शिपिंग इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आने वाला है.

अगर आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट या लॉजिस्टिक्स बिजनेस से जुड़े हैं, तो 15 अप्रैल के बाद अपनी शिपिंग प्लानिंग बदल लें. 'ऑन डेक' लोडिंग की जिद अब भारी जुर्माना या शिपमेंट रिजेक्शन का कारण बन सकती है. आम नागरिक के तौर पर, यह फैसला हमारे समुद्रों को साफ रखने और सी-फूड की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा सुरक्षा कवच है.
Q1. प्लास्टिक पेलेट्स खतरनाक क्यों हैं?
ये समुद्री जीवों द्वारा खा लिए जाते हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं.
Q2. क्या ये नियम भारत में ही लागू हैं?
नहीं, ये अंतरराष्ट्रीय मानकों (IMO) पर आधारित हैं.
Q3. क्या शिपिंग कंपनियों पर असर पड़ेगा?
हां, उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाने होंगे.
Q4. क्या इससे प्रदूषण पूरी तरह खत्म होगा?
नहीं, लेकिन काफी हद तक कम होगा.
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