वित्त मंत्रलय के तहत आने वाली खुफिया एजेंसी एफआईयू (FIU) में इस समय कर्मचारियों की कमी महसूस हो रही है और आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार पर्याप्त कर्मचारी न होने से कर चोरी, आतंकवादियों को धन के हस्तांतरण और मनी लांड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई की व्यवस्थाओं की वैश्विक समीक्षा में भारत कमजोर स्थिति में दिख सकता है. संगठन के पास 14 लाख संदिग्ध लेन-देन (STR) से जुड़ी रिपोर्ट मिली. यह 2017-18 के मुकाबले यह 14 गुना अधिक है.
1/5वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) में विश्लेषकों और जांचकर्ताओं की कमी एक दशक से है. एफआईयू राष्ट्रीय एजेंसी है जिसके पास मनी लांड्रिंग, आतंकवादी संगठनों को वित्त पोषण तथा देश में जाली नोट का पता लगाने जैसे गंभीर कर अपराधों से जुड़े आंकड़ों का संग्रह, विश्लेषण तथा संबंधित एजेंसियों तक उसे पहुंचाने की जिम्मेदारी है.
2/5पीटीआई के पास उलब्ध एक आधिकारिक पत्र के अनुसार एफआईयू हर साल अनुबंधों पर कर्मचारियों की नियुक्ति कर इस कमी की भरपाई कर रहा है. एफआईयू ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को सौंपी एक रिपोर्ट में कहा है, ‘‘कर्मचारियों की कमी समेत गंभीर चुनौतियों के बावजूद संगठन के अधिकारी एवं कर्मचारी पूरे समर्पण के साथ काम कर रहे हैं.’’ एफआईयू वित्त मंत्रालय के अधीन आता है.
3/5आतंकवादियों को वित्त पोषण और मनी लांड्रिंग निरोधक व्यवस्था की अगले साल की शुरुआत में वैश्विक समीक्षा होगी और एफआईयू के कार्यबल में कमी से प्रतिकूल टिप्पणी मिल सकती है. इससे कर अपराध से जुड़े मामलों से निपटने को लेकर एक प्रभावी देश के रूप में स्थिति कमजोर पड़ सकती है. यह समीक्षा अंतरराष्ट्रीय निकाय फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) करेगा.
4/5आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2017-18 में एजेंसी के पास स्वीकृत 75 पदों की तुलना में आधे लोग ही थे. वर्ष 2011-12 से यही हालात हैं.
5/5एजेंसी में कर्मचारियों की संख्या 31 से 36 के बीच रही है. इस कमी को पूरा करने के लिये करीब दो दर्जन से अधिक विशेषज्ञों को अनुबंध पर रखा है. वहीं 2009-10 से 2010-11 के दौरान एफआईयू के लिये मंजूर 74 कर्मचारियों में से क्रमश: 45 और 36 कर्मचारी ही कार्यरत थे.