आज के समय में खेती की लागत बढ़ने से किसानों की आमदनी कम हो रही है. खेतों में फर्टिलाइजर, केमिकल पेस्टीसाइट का इस्तेमाल बढ़ने से लागत आसमान छूने लगी है. इससे जहां खेत की मिट्टी लगातार कमजोर हो रही है, वहीं फसल में केमिकलों की मात्रा भी बढ़ रही है.
1/8इस समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की हुई है. इस योजना में खेत की मिट्टी की जांच करके उसका हेल्थ कार्ड तैयार किया जाता है और उसी के आधार पर खेत में फर्टिलाइजर डालने की बात कही जाती है.
2/8मिट्टी की जांच करने वाली संस्था 'फार्मर' (गाजियाबाद) के संचालक डॉ. जगपाल सिंह के मुताबिक, इनसान की तरह पौधों को भी पोषक तत्वों (न्यूट्रिएंट्स) की जरूरत होती है.
3/8डॉ. जगपाल सिंह बताते हैं कि पौधों को 17 न्यूट्रिएंट्स की जरूरत होती है. इनमें कार्बोहाइड्रेट, वसा, प्रोटीन और विटामिन शामिल हैं. ये पोषक तत्व पौधों को मिट्टी, हवा और धूप से मिलते हैं.
4/8इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को मिट्टी की जांच कराने और जांच रिपोर्ट के आधार पर फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करने की बात कही जाती है.
5/8मिट्टी की जांच के लिए खास तरीके से खेत की मिट्टी के नमूने लेने की बात कही जाती है. डॉ. जगपाल सिंह के मुताबिक, एक एकड़ खेत में लगभग 8-10 स्थानों से ‘V’ आकार के 6 इंच गहरे गहरे गड्ढे बनाएं.
6/8इन सभी गड्ढों से मिटटी को इकट्ठा कर के इसमें से कंकड़, घास-फूंस अलग कर दें. अब इस मिट्टी के आधा-आधा किलो के पैकेट तैयार करें का नमूना बनाएं.
7/8मिट्टी की जांच फसल की जरूरतों का पता चल जाता है. इससे जरूरत के हिसाब से फर्टिलाइजर का इस्तेमाल होता है. इससे लागत कम होती है.
8/8जरूरत के मुताबिक, पौधों में पोषक तत्व मिलते हैं तो उनकी बढ़वार अच्छी होती है. उनमें कीट और बीमारी कम लगते हैं. पौधों में भरपूर मात्रा में पोषक त्तव होंगे तो पैदावार ज्यादा होगी. फसल अच्छी होगी तो उसके दाम भी ज्यादा मिलेंगे.