ईरान का तेल चीन भेजने की खबर निकली फर्जी, पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताई सच्चाई, कहा-'पेमेंट की दिक्कत नहीं'

केंद्र सरकार ने उन खबरों और सोशल मीडिया दावों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि भुगतान संबंधी समस्याओं के कारण ईरान का कच्चा तेल भारत के वाडिनार से चीन भेज दिया गया. सरकार ने इन दावों को 'तथ्यात्मक रूप से गलत' और भ्रामक बताया है.
ईरान का तेल चीन भेजने की खबर निकली फर्जी, पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताई सच्चाई, कहा-'पेमेंट की दिक्कत नहीं'

LNG Tanker, Representative Image (Pic Credit: Reuters) 

ईरान युद्ध के बीच सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट तेजी से वायरल हो रही थी, जिसमें दाव किया जा रहा था कि पेमेंट की समस्या के कारण ईरान के क्रूड ऑयल का एक जहाज भारत के वाडिनार से चीन भेजा गया है. इस रिपोर्ट का अब पेट्रोलियम मंत्रालय ने खंडन किया है. अपने ऑफिशियल X हैंडल से पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल खरीदता है. तेल कंपनियों को जरूरत और मुनाफे के हिसाब से दुनिया में कहीं से भी तेल खरीदने की पूरी छूट दी गई है.

सुरक्षित किया जरूरत का क्रूड ऑयल

पेट्रोलियम मंत्रालय ने अपने आधिकारिक हैंडल पर लिखा- "खाड़ी देशों में चल रहे तनाव के बीच भी भारतीय कंपनियों ने अपनी जरूरत का क्रूड ऑयल सुरक्षित कर लिया है, इसमें ईरान से हासिल होने वाला तेल शामिल है."

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पेमेंट को लेकर नहीं है दिक्कत

  • मंत्रालय के मुताबिक अफवाहों में जो दावा किया जा रहा है, उसके उलट ईरान से तेल खरीदने में पेमेंट को लेकर किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं है.
  • मंत्रालय ने अपने पोस्ट में चुटकी लेते हुए कहा है कि जहाज का रास्ता बदलने के दावे करने वालों को यह बात पता नहीं कि तेल का व्यापार कैसे काम करता है.
  • तेल ले जाने वाले जहाजों के कागजातों यानी Bill of Landing में अक्सर एक अनुमानित बंदरगाह का ही नाम लिखा होता है.
  • पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक व्यापारिक मुनाफे और जरूरतों के हिसाब से समुद्र के बीच में भी जहाजों की डेस्टिनेशन को बदला जा सकता है, यह इस व्यापार में एक आम बात है.

LPG से जुड़े दावों का किया खंडन

पेट्रोलियम मिनिस्ट्री ने LPG से जुड़े दावों का भी एक बार फिर खंडन किया है. अपनी पोस्ट में कहा कि एलपीजी को लेकर भी किए जा रहे कुछ दावे पुरी तरह से गलत हैं.

मैंगलोर पहुंचा LPG से लदा सी बर्ड जहाज

  • पोस्ट में आगे बताया कि ईरान से करीब 44 हजार मीट्रिक टन (TMT) LPG लेकर आ रहा सी बर्ड नाम का जहाज 2 अप्रैल को ही भारत के मैंगलोर बंदरगाह पहुंच चुका है.
  • ईरान से आए जहाज में से फिलहाल गैस को उतारने का काम चल रहा है.
  • पोस्ट के आखिरी में सरकार ने कहा कि, "हम फिर साफ कर रहे हैं कि आने वाले महीनों के लिए भारत की कच्चे तेल की जरूरतें पूरी तरह सुरक्षित है. कोई भी कमी नहीं होगी.

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क्या किया गया है दावा

सरकार की तरफ से यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्ट्स के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी प्रतिबंधों के तहत प्रतिबंधित एक टैंकर, जिसका नाम 'पिंग शुन' है और जो ईरानी कच्चे तेल को ला रहा था, ने गुजरात के वाडिनार से अपना मार्ग बदलकर चीन के डोंगयिंग की ओर कर लिया. शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, जहाज पहले भारत की ओर आ रहा था, लेकिन बाद में उसने अपनी मंजिल बदल ली, जिससे यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि भुगतान की समस्या के कारण ऐसा हुआ. कुछ बाजार विश्लेषकों ने यह भी कहा था कि सख्त भुगतान शर्तें इस बदलाव की वजह हो सकती हैं.

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