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पेट्रोल-डीजल पर राहत के संकेत. (ANI)
कई मंत्रालयों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट को करीब डेढ़ महीना हो चुका है, लेकिन देश में कच्चे तेल और LNG की सप्लाई बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं.
उन्होंने कहा कि भारत में फिलहाल कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त सप्लाई पहले से सुनिश्चित की जा चुकी है. सरकार के मुताबिक देश में पर्याप्त इन्वेंट्री मौजूद है और कहीं भी ड्राई आउट जैसी स्थिति नहीं बनने दी गई है. मंत्रालय ने यह भी कहा कि बाजार में सप्लाई लगातार बनी हुई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है.
सरकार ने बताया कि पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ने के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों यानी OMCs की अंडर-रिकवरी में कमी आई है. पहले जहां कंपनियों को करीब ₹1000 करोड़ प्रतिदिन का नुकसान हो रहा था, वहीं अब यह घटकर लगभग ₹750 करोड़ प्रतिदिन रह गया है. हालांकि सरकार ने फिलहाल OMCs के लिए किसी बेलआउट पैकेज पर विचार से इनकार किया है. सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि अभी ऐसी किसी राहत योजना पर चर्चा नहीं चल रही है.
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूसी तेल को लेकर भी सवाल उठे. इस पर सरकार ने कहा कि US Waiver मिले या नहीं, भारत की तेल सप्लाई प्रभावित नहीं होगी. मंत्रालय का कहना है कि सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने के लिए पहले से जरूरी इंतजाम किए गए हैं. सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की कि अंतरराष्ट्रीय हालात चुनौतीपूर्ण जरूर हैं, लेकिन घरेलू सप्लाई और उपलब्धता पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ने दिया जाएगा.
पेट्रोलियम मंत्रालय ने यह भी बताया कि ईंधन की मांग के पैटर्न में बदलाव देखने को मिल रहा है. Bulk Sale से मांग अब धीरे-धीरे Pump Sale की तरफ शिफ्ट हो रही है. सरकार इसे बाजार के सामान्य होने का संकेत मान रही है.
अंतर मंत्रालयीय प्रेस कॉन्फ्रेंस में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय की संयुक्त सचिव अपर्णा शर्मा ने भी खरीफ सीजन को लेकर बड़ा अपडेट दिया. उन्होंने कहा कि मौजूदा खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता 50 प्रतिशत से अधिक बनी हुई है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उर्वरकों के MRP में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. यानी किसानों के लिए कीमतों के मोर्चे पर अभी राहत बरकरार है.
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सरकार की ओर से दिए गए बयानों से साफ संकेत मिला कि फिलहाल प्राथमिकता देश में तेल, LNG और उर्वरकों की उपलब्धता बनाए रखने पर है. पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक सप्लाई दबाव के बावजूद सरकार लगातार हालात की निगरानी कर रही है.