Petrol-Diesel Price History: पिछले 10 सालों में कैसे महंगा होता गया पेट्रोल-डीजल? जानिए कितने बढ़े कच्चे तेल के दाम

पिछले 10 सालों में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला. कहीं कच्चा तेल सस्ता हुआ लेकिन टैक्स बढ़े, तो कहीं ग्लोबल संकट के कारण फ्यूल रिकॉर्ड महंगा हो गया. मई 2016 से मई 2026 तक के डेटा से समझिए कि पेट्रोल, डीजल और कच्चे तेल की कीमतें कैसे बदलीं और इसका आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ा.
Petrol-Diesel Price History: पिछले 10 सालों में कैसे महंगा होता गया पेट्रोल-डीजल? जानिए कितने बढ़े कच्चे तेल के दाम

10 साल पहले 62 रुपये लीटर मिलने वाला पेट्रोल आज 100 रुपये के पार क्यों पहुंच गया? प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सिर्फ इंटरनेशनल बाजार से तय नहीं होतीं. इसमें कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स, रिफाइनिंग कॉस्ट और डीलर कमीशन भी शामिल होते हैं. यही वजह है कि कई बार कच्चा तेल सस्ता होने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिलती.

अब मई 2026 में फिर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 100 रुपये के आस-पास पहुंच चुकी हैं. ऐसे में पिछले 10 साल का डेटा यह समझने के लिए बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर कब और क्यों पेट्रोल-डीजल इतना महंगा हुआ.

आखिर 10 साल में पेट्रोल-डीजल कैसे महंगा हुआ?

इसके पीछे कई बड़े कारण रहे:

  • इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें
  • रूस-यूक्रेन युद्ध
  • मिडिल ईस्ट तनाव
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी
  • केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स

पिछले 10 सालों में क्या रहे दाम?

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए दुनिया में तेल महंगा होते ही असर भारत पर दिखाई देता है. आइए मई 2016 से मई 2026 तक पेट्रोल-डीजल और कच्चे तेल की कीमतों का पूरा डेटा देखें.

साल (मई)पेट्रोल (₹/लीटर)डीजल (₹/लीटर)कच्चा तेल (डॉलर/बैरल)
2016₹62₹50$41
2017₹68₹57$45
2018₹76₹67$66
2019₹71₹66$60
2020₹71₹69$18
2021₹92₹83$62
2022₹105₹96$108
2023₹96₹89$70
2024₹94₹87$78
2025₹97₹90$60
2026₹102₹95$100

2016 में क्या स्थिति थी?

मई 2016 में पेट्रोल करीब 62 रुपये लीटर और डीजल करीब 50 रुपये लीटर था. उस समय कच्चा तेल लगभग 41 डॉलर प्रति बैरल था. ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काफी नीचे थीं, क्योंकि 2014-15 की बड़ी गिरावट का असर जारी था, लेकिन भारत में टैक्स बढ़ने की वजह से लोगों को पूरी राहत नहीं मिली.

2018 में अचानक इतनी तेजी क्यों आई?

2018 में कच्चा तेल 66 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. OPEC देशों ने उत्पादन घटाया और सप्लाई को नियंत्रित किया. इसका सीधा असर भारत पर पड़ा. इसी दौरान:

  • पेट्रोल 76 रुपये लीटर पहुंच गया
  • डीजल 67 रुपये लीटर हो गया
  • ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ने लगी

यहीं से आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ना शुरू हुआ.

2020 में कच्चा तेल इतना सस्ता कैसे हो गया?

कोविड महामारी के दौरान पूरी दुनिया लॉकडाउन में चली गई. सड़कें खाली थीं, फ्लाइट बंद थीं और फैक्ट्रियां रुक गई थीं. इस वजह से तेल की मांग अचानक गिर गई और कच्चा तेल 18 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया.

लेकिन बड़ा सवाल यही था कि पेट्रोल-डीजल इतना सस्ता क्यों नहीं हुआ? जवाब है टैक्स. इसी दौरान सरकारों ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी थी.

2022 में सबसे बड़ा झटका क्यों लगा?

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होते ही ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उथल-पुथल मच गई. मई 2022 में:

  • कच्चा तेल 108 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया
  • पेट्रोल 105 रुपये लीटर हो गया
  • डीजल 96 रुपये लीटर तक पहुंच गया

इसका असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं रहा. महंगाई बढ़ी, ट्रांसपोर्ट महंगा हुआ और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ गए.

2026 में फिर क्यों बढ़े दाम?

मई 2026 में एक बार फिर ग्लोबल तनाव बढ़ा. मिडिल ईस्ट संकट और सप्लाई चिंताओं के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. भारत में कई शहरों में पेट्रोल फिर 100 रुपये लीटर के ऊपर चला गया. यानी पिछले 10 सालों में यह दूसरा बड़ा दौर है जब लोगों को रिकॉर्ड महंगे फ्यूल का सामना करना पड़ रहा है.

क्या सिर्फ कच्चा तेल ही पेट्रोल-डीजल महंगा करता है?

नहीं. यही सबसे बड़ा भ्रम है. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत में कई हिस्से शामिल होते हैं:

कॉम्पोनेंटअनुमानित हिस्सा
कच्चा तेल35-45%
केंद्र सरकार टैक्स20-25%
राज्य VAT15-25%
रिफाइनिंग और डीलर मार्जिनबाकी हिस्सा

यानी अगर कच्चा तेल सस्ता भी हो जाए, तब भी टैक्स ज्यादा होने पर पेट्रोल महंगा रह सकता है.

कच्चा तेल सस्ता नहीं हुआ तो क्या होगा?

अगर कच्चा तेल 100 डॉलर के आसपास बना रहता है, तो:

  • ट्रांसपोर्ट महंगा हो सकता है
  • ऑनलाइन डिलीवरी चार्ज बढ़ सकते हैं
  • एयर टिकट महंगे हो सकते हैं
  • खाने-पीने की चीजों की कीमत बढ़ सकती है
  • किसानों की लागत बढ़ सकती है

यानी पेट्रोल-डीजल सिर्फ गाड़ी चलाने का खर्च नहीं बढ़ाता, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालता है.

आखिर पेट्रोल-डीजल के दाम रोज क्यों बदलते हैं?

भारत में जून 2017 से डेली प्राइस रिविजन सिस्टम लागू है. पहले कीमतें हर 15 दिन में बदलती थीं. अब ऑयल कंपनियां इंटरनेशनल बाजार के हिसाब से रोज कीमत अपडेट करती हैं. इससे अचानक बड़ा झटका कम लगता है और इंटरनेशनल बदलाव जल्दी दिखते हैं, लेकिन कई बार लोगों को रोज नए दाम देखने पड़ते हैं.

पिछले 10 साल में पेट्रोल-डीजल कितना महंगा हुआ?

मई 2016 में पेट्रोल करीब 62 रुपये लीटर और डीजल 50 रुपये लीटर था. मई 2026 तक पेट्रोल 102 रुपये और डीजल 95 रुपये लीटर पहुंच गया. यानी 10 साल में पेट्रोल करीब 40 रुपये और डीजल करीब 45 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ.

Conclusion

पिछले 10 सालों का डेटा साफ दिखाता है कि भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें सिर्फ कच्चे तेल से तय नहीं होतीं. कई बार टैक्स बढ़े, कई बार युद्ध और सप्लाई संकट ने असर डाला. अब मई 2026 में फिर बढ़ती कीमतें इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में फ्यूल और महंगाई दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 मई 2016 में पेट्रोल कितना था?

करीब 62 रुपये प्रति लीटर.

Q2 2022 में पेट्रोल इतना महंगा क्यों हुआ?

रूस-यूक्रेन युद्ध और कच्चे तेल की रिकॉर्ड तेजी की वजह से.

Q3 क्या कच्चा तेल सस्ता होने पर पेट्रोल तुरंत सस्ता हो जाता है?

नहीं. टैक्स और अन्य लागत भी बड़ी भूमिका निभाते हैं.

Q4 2020 में कच्चा तेल इतना सस्ता क्यों हुआ?

कोविड लॉकडाउन के दौरान तेल की मांग अचानक गिर गई थी.

Q5 भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमत कौन तय करता है?

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इंटरनेशनल क्रूड, टैक्स और डॉलर-रुपया दर के आधार पर कीमत तय करती हैं.

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