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नई कीमतें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं. (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGPT)
देश में महंगाई का एक और बड़ा झटका लग गया है. पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी गई है. नई कीमतें आज सुबह 6 बजे से लागू हो गई हैं. ऐसे समय में ये फैसला आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है और पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है.
दिल्ली में पेट्रोल अब ₹94.77 की जगह करीब ₹97.91 प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि डीजल ₹87.67 से बढ़कर लगभग ₹90.78 प्रति लीटर पहुंच गया है. प्रीमियम पेट्रोल के दाम भी ₹2 से ज्यादा बढ़े हैं.
सबसे बड़ी बात ये है कि तेल कंपनियों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर क्रूड में तेजी लंबे समय तक बनी रही तो आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता.
नई कीमतें (दिल्ली)
| ईंधन | पुरानी कीमत | नई कीमत | बढ़ोतरी |
| पेट्रोल | ₹94.77 | ₹97.91 | ₹3.14 |
| डीजल | ₹87.67 | ₹90.78 | ₹3.11 |
| प्रीमियम पेट्रोल | ₹102 | ₹104+ | ₹2+ |
नोट: अलग-अलग शहरों में VAT और स्थानीय टैक्स के कारण कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है.
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| शहर | पुराने दाम (रुपए/लीटर) | नए दाम (रुपए/लीटर) | कुल बढ़ोतरी (रुपए) |
| दिल्ली | 94.77 | 97.77 | 3.00 |
| कोलकाता | 105.45 | 108.74 | 3.29 |
| चेन्नई | 100.80 | 103.67 | 2.87 |
| शहर | पुराने दाम (रुपए/लीटर) | नए दाम (रुपए/लीटर) | कुल बढ़ोतरी (रुपए) |
| दिल्ली | 87.67 | 90.67 | 3.00 |
| कोलकाता | 92.02 | 95.13 | 3.11 |
| चेन्नई | 92.39 | 95.25 | 2.86 |

पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर हर महीने करीब ₹30,000 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ रहा है. यह स्थिति तब पैदा हुई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा है, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों को स्थिर रखा गया है.
सूत्रों और सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
पेट्रोल: कंपनियों को प्रति लीटर करीब ₹20 का नुकसान हो रहा था.
डीजल: डीजल पर यह घाटा और भी बड़ा है, जो प्रति लीटर करीब ₹100 (Under-recovery) तक पहुंच गया था.
नोट: यह घाटा तब होता है जब अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों के मुकाबले घरेलू रिटेल प्राइस काफी कम रखे जाते हैं।
आम आदमी को लगता है कि पेट्रोल की जो कीमत वह चुका रहा है, वह पूरी की पूरी सरकार या कंपनी के पास जा रही है. लेकिन इसका गणित कुछ और है. दिल्ली के उदाहरण से समझें:
| एलिमेंट (घटक) | पेट्रोल (₹/लीटर) | डीजल (₹/लीटर) |
| डीलरों से लिया जाने वाला मूल्य | 77.49 | 74.42 |
| डीलर कमीशन (औसत) | 4.40 | 3.03 |
| वैट (VAT @ 19.4% / 16.75%) | 15.88 | 13.22 |
| रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) | 97.77 | 90.67 |
कई दिनों से चर्चा थी कि पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की तेजी. कुछ हफ्ते पहले तक Brent Crude करीब 70 डॉलर प्रति बैरल था. लेकिन, ईरान-अमेरिका तनाव, मिडिल ईस्ट में युद्ध, सप्लाई रूट्स पर खतरा, शिपिंग कॉस्ट बढ़ना, इन वजहों से क्रूड का भाव 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है. जिससे कंपनियों को रोजाना 1700 करोड़ का नुकसान हो रहा था.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में जब global crude महंगा होता है, तो उसका असर सीधे रिफाइनिंग कॉस्ट और फ्यूल प्राइसिंग पर पड़ता है.
पिछले कुछ समय से:
कंपनियां रिटेल प्राइसेज स्थिर रखे हुए थीं लेकिन क्रूड लगातार ऊपर जा रहा था. रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा था. अब कंपनियों ने उसी दबाव को कीमतों में पास करना शुरू किया है.
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यही सबसे बड़ा सवाल है.
अगर:
तो तेल कीमतों में और बढ़ोतरी की संभावना बनी रह सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत के लिए 100 डॉलर वाला crude लंबे समय तक टिकना बड़ा आर्थिक दबाव पैदा कर सकता है.
इससे पहले सरकार ने पेट्रोल और डीजल का भाव कंट्रोल करने के लिए स्पेशल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपए की कटौती की थी. पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 रुपए प्रति लीटर से घटाकर ₹3 रुपए, जबकि डीजल पर ₹10 से शून्य कर दी गई थी. केंद्र सरकार एक लीटर पेट्रोल पर कुल 21.90 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूलती थी. कटौती के बाद यह 11.90 रुपए रह गई थी. वहीं, एक लीटर डीजल पर कुल सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी 17.8 रुपए से घटकर 7.8 रुपए पर आ गई थी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सावधानीपूर्वक इस्तेमाल की अपील की थी. पीएम ने कहा था कि आज समय की मांग है कि पेट्रोल, गैस और डीजल का उपयोग बहुत संयम से किया जाए.