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जब भी घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की बात आती है, तो सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही होता है कि ऑन-ग्रिड (On-Grid) लगवाएं या ऑफ-ग्रिड (Off-Grid)? एक कहता है बिल जीरो हो जाएगा, दूसरा कहता है रात को भी बिजली मिलेगी. लेकिन असली बारीकियां कोई नहीं समझाता.
आज हम इस उलझन को हमेशा के लिए खत्म कर देंगे. हम 3 किलोवॉट (3kW) के सिस्टम को आधार मानकर दोनों की ऐसी तुलना करेंगे कि आपके मन में कोई सवाल नहीं बचेगा. चलिए, सूरज की रोशनी से बिजली बनाने के इस सफर को शुरू करते हैं.
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सोलर पैनल असल में 'सिलिकॉन' का बना होता है. जब सूरज की रोशनी इस पर पड़ती है, तो यह फोटोवोल्टिक (PV) प्रभाव के जरिए DC (Direct Current) बिजली पैदा करता है. लेकिन हमारे घर के उपकरण (टीवी, फ्रिज, पंखे) AC (Alternating Current) पर चलते हैं. इसलिए सोलर सिस्टम में एक इन्वर्टर लगाया जाता है जो इस DC को AC में बदल देता है.
सोलर पैनल धूप में बिजली बनाता है और इन्वर्टर उसे आपके घर के इस्तेमाल लायक बनाता है. अब यहां से दो रास्ते निकलते हैं- या तो आप इस बिजली को सीधे इस्तेमाल करें और बची हुई सरकार को दे दें (ऑन-ग्रिड) या इसे बैटरियों में भरकर रात के लिए बचा लें (ऑफ-ग्रिड).
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ऑन-ग्रिड सिस्टम सरकारी बिजली की तारों (Grid) से जुड़ा होता है. इसमें बैटरियां नहीं होतीं.
कैसे काम करता है: दिन में सोलर जितनी बिजली बनाता है, वह आपके घर में इस्तेमाल होती है. अगर बिजली ज्यादा बन रही है, तो वह 'नेट मीटर' (Net Meter) के जरिए वापस सरकारी ग्रिड में चली जाती है. रात को जब धूप नहीं होती, तो आप ग्रिड से बिजली लेते हैं. महीने के अंत में हिसाब होता है कि आपने कितनी बिजली दी और कितनी ली.
बड़ा फायदा: इसमें सरकार भारी सब्सिडी देती है.
बड़ा नुकसान: अगर सरकारी बिजली कट गई, तो आपका सोलर भी बंद हो जाएगा.
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कुल खर्च: लगभग ₹1,80,000 - ₹2,10,000
सब्सिडी (PM Surya Ghar): ₹75,000-₹85,000 (लगभग)
आपकी जेब से खर्च: ₹1,10,000 - ₹1,30,000
यह सिस्टम सरकारी बिजली से पूरी तरह आजाद होता है (या आप उसे सिर्फ बैकअप के तौर पर रख सकते हैं).
कैसे काम करता है: सोलर पैनल से बनी बिजली पहले आपके घर को पावर देती है और साथ ही साथ बैटरियों को चार्ज करती है. जब सूरज ढल जाता है या बिजली कट जाती है, तो इन्वर्टर बैटरियों से बिजली लेकर आपका घर चलाता है.
बड़ा फायदा: बिजली रहे न रहे, आपके घर में लाइट जलती रहेगी. यह उन इलाकों के लिए वरदान है जहां बहुत बिजली कटती है.
बड़ा नुकसान: इसमें बैटरी और स्पेशल इन्वर्टर का खर्च बहुत ज्यादा होता है और सरकार इस पर कोई सब्सिडी भी नहीं देती.
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कुल खर्च: लगभग ₹2,50,000 - ₹3,00,000 (बैटरी की क्वालिटी के आधार पर)
सब्सिडी: ₹0 (कोई सब्सिडी नहीं)
आपकी जेब से खर्च: ₹2.5 लाख से ₹3 लाख तक.
| मुख्य उद्देश्य | बिजली का बिल कम/जीरो करना। | बिजली कटौती से आजादी पाना। |
| बैटरी बैकअप | नहीं होता। | होता है (6-8 साल में बदलनी पड़ती हैं)। |
| सब्सिडी (Govt Subsidy) | ₹78,000 से ₹94,000 तक मिलती है। | कोई सब्सिडी नहीं मिलती। |
| बिजली कटने पर | सिस्टम बंद हो जाता है। | सिस्टम चलता रहता है। |
| नेट मीटरिंग | जरूरी है। | जरूरी नहीं है। |
| मेंटेनेंस | बहुत कम (सिर्फ पैनल सफाई)। | ज्यादा (बैटरी का पानी और रिप्लेसमेंट)। |
| अनुमानित कीमत (3kW) | ₹1.20 लाख (सब्सिडी के बाद)। | ₹2.80 लाख (बिना सब्सिडी)। |
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यहां अधिकतर लोग गलती करते हैं. सही चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है:
आपके यहां बिजली बहुत कम कटती है (दिन में 1-2 घंटे से कम).
आपके पास पहले से ही एक छोटा इन्वर्टर-बैटरी बैकअप है.
आपका मुख्य मकसद हर महीने आने वाले 4,000-5,000 रुपये के बिल को खत्म करना है.
आप कम निवेश (Investment) में ज्यादा फायदा चाहते हैं.
आपके इलाके में बिजली कटौती की बहुत समस्या है (दिन-रात मिलाकर 5-6 घंटे कटती है).
आप ऐसी जगह रहते हैं जहां बिजली का कनेक्शन मिलना मुश्किल या महंगा है (जैसे खेत या पहाड़).
आप बिजली विभाग (Electricity Board) के झंझट और नेट मीटरिंग की कागजी कार्रवाई से दूर रहना चाहते हैं.
आपका बजट ज्यादा है और आप 24 घंटे बिना रुकावट बिजली चाहते हैं.
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राहुल (शहर में रहता है): राहुल के यहां बिजली मुश्किल से 15 मिनट कटती है. उसने ₹1.2 लाख (सब्सिडी काटकर) में 3kW का ऑन-ग्रिड लगवाया. अब उसका महीने का 300 यूनिट का बिल जीरो आता है. वह 3 साल में अपना पैसा वसूल कर लेगा.
अमित (गांव/कस्बे में रहता है): अमित के यहां रात को 4 घंटे और दिन में 3 घंटे बिजली कटती है. उसने करीब ₹3 लाख में ऑफ-ग्रिड लगवाया. उसके पास 4 बैटरियां हैं. बिजली कटने पर भी उसका एसी और पंखा चलता रहता है. उसे बिल की चिंता नहीं है, क्योंकि वह सरकार से बिजली लेता ही नहीं है.
चाहे ऑन-ग्रिड हो या ऑफ-ग्रिड, 3kW का सोलर सिस्टम दिन भर में लगभग 12 से 15 यूनिट बिजली बनाता है.
इतना लोड आप चला सकते हैं:
1 इन्वर्टर एसी (दिन में 5-6 घंटे)
1 फ्रिज (24 घंटे)
4-5 पंखे और 8-10 LED लाइट्स
टीवी और पानी की मोटर (1 घंटा)
नोट: ऑफ-ग्रिड में रात को एसी चलाने के लिए आपको बड़ी बैटरी बैंक (कम से कम 4-6 बैटरियां) की जरूरत होगी. अगर आप एसी, हीटर, गीजर, आयरन प्रेस, इंडक्शन, माइक्रोवेव जैसी ज्यादा बिजली खींचने वाली चीजें ना चलाएं तो 3 किलोवॉट का सोलर पैनल 24 घंटे आपके घर को मुफ्त में बिजली दे सकता है.
अगर आप एक आम शहरी नागरिक हैं जहाँ बिजली की स्थिति ठीक है, तो आँख बंद करके ऑन-ग्रिड सोलर लगवाएं. यह सस्ता है, सरकार इसमें आपकी मदद कर रही है और यह आपके निवेश को बहुत जल्दी वसूल कर देता है. लेकिन अगर आप बिजली कटौती के दर्द से परेशान हैं और बजट की चिंता नहीं है, तो ऑफ-ग्रिड आपकी लाइफ बदल देगा. याद रखें, सोलर लगवाना सिर्फ खर्चा नहीं, बल्कि 25-30 साल की शांति है, क्योंकि सोलर की लाइफ 25-30 साल की होती है.
1- क्या ऑन-ग्रिड सोलर रात को बिजली देता है?
नहीं, ऑन-ग्रिड सोलर सिर्फ सूरज की रोशनी में काम करता है. रात को आप सरकारी ग्रिड से बिजली लेते हैं.
2- क्या मैं बाद में ऑन-ग्रिड को ऑफ-ग्रिड बना सकता हूं?
हां, लेकिन इसके लिए आपको अपना इन्वर्टर बदलना होगा और बैटरियां लगानी होंगी, जो काफी खर्चीला काम है. साथ ही आपको सरकारी इजाजत की जरूरत भी होगा, क्योंकि आपने ऑनग्रिड सोलर के लिए सब्सिडी ली है.
3- सोलर पैनल की लाइफ कितनी होती है?
सोलर पैनल की परफॉरमेंस वारंटी 25 साल होती है. इन्वर्टर 5-10 साल और बैटरियां 5-7 साल चलती हैं.
4- 3kW सोलर के लिए कितनी जगह चाहिए?
इसके लिए आपकी छत पर लगभग 250 से 300 स्क्वायर फुट की छाया-मुक्त (Shadow-free) जगह होनी चाहिए.
5- क्या बारिश में सोलर काम करता है?
हां, बादल होने पर भी सोलर बिजली बनाता है, लेकिन धूप की तुलना में उत्पादन 30-50% तक कम हो जाता है.
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