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सोने की खरीदी के लिए अब BIS प्रमाणित हॉलमार्किंग जरूरी कर दी गई है. ग्राहक भी इसके लिए जागरुक होते जा रहे हैं. लेकिन BIS जूतों की भी हॉलमार्किंग करता है जिसके बारे में कई खरिदारों को जानकारी नहीं होती है. BIS एक स्टैंडर्ड तरीके और तय किए गए मानकों के आधार पर भी जूते बनानेवाली कंपनियों को अपनी मार्किंग मुहैय्या कराती है. हम आपको बताएंगे कि अगर आप अब अलगी बार जूते खरीदारी के लिए निकले तो इस खबर को हैंडी रखें ताकि आप भी असली और नकली जूतों में फर्क को पहचान सकें. उदाहरण के तौर पर स्पोर्ट्स शूज़ के लिए IS 15844 की मार्किंग दी जाती है. इसी तरह डर्बी शूज़ के लिए IS 17043 मार्किंग है.
BIS अलग अलग जूतों की कैटेगरी के लिए मार्किंग प्रदान करता है. इसके तहत लेदर सेफ्टी बूट्स और शूज़, कैनवास शूज़ रबर सोल के साथ, एंटीरायट शूज़, स्पोर्ट्स फुटवेयर के साथ और भी कई आइट्म का समावेश होता है. साथ ही ये भी अनिवार्य किया गया है कि BIS की दी गई मार्किंग को इन जूतों पर भी प्रिंट कराना होगा. ऐसे में ग्राहक बड़ी आसानी से जूतों में BIS मार्किंग को देखकर असली और नकली का फर्क कर सकते हैं.
दरअसल भारत में प्रवेश करने वाले सस्ते चमड़े के जूतों की क्वालिटी के हाई मिनिमम लेवल की गारंटी के लिए यह नया उपाय अमल में लाया गया था. साथ ही देश में बननेवाले जूतों को भी स्टैंडर्ड प्रोडक्ट की कैटेगिरी में लाने के लिए BIS के नियम लगू होते हैं. उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की ओर से अधिसूचना जारी की गई है, ताकि इन उत्पादों को भारतीय मानक ब्यूरो के निर्दिष्ट मानकों के अनुरूप होना चाहिए.