भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को अपना नया राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष चुना है. यदि बरसों से चल आ रही परिपार्टी कायम रही तो नितिन नबीन का जे.पी.नड्डा का उत्तराधिकारी बनना तय है. 45 साल के नितिन नबीन को नया अध्यक्ष चुनकर भाजपा ने एक तीर से कई निशाने साधने का काम किया है. नितिन नबीन के चयन से परंपरागत सवर्ण वोट बैंक को भाजपा ने साधने की कवायद की है. साथ ही भाजपा में नई सोशल इंजीनियरिंग का दौर शुरू किया है. वहीं, आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव के मद्देनजर टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने एक सॉफ्ट चेहरा भी रखा है. वहीं, नितिन नबीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के पीछे अमित शाह फैक्टर भी अहम रहा है.
कार्यकर्ताओं को बड़ा संदेश
नितिन नबीन के चयन से भाजपा ने फिर एक बार संदेश दिया है कि कोई कार्यकर्ता या सामान्य चेहरा भी भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष हो सकता है. पार्टी सबका ख्याल रखती है.
Add Zee Business as a Preferred Source
हर कार्यकर्ता का ध्यान रखती है पार्टी
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, राजस्थान के भजनलाल शर्मा, छत्तीसगढ़ के विष्णु साय, ओडिशा के मोहन चरण मांझी जैसे लो प्रोफाइल चेहरों को पार्टी ने मुख्यमंत्री जैसे पद देकर यह संदेश दिया है कि पार्टी हर कार्यकर्ता का ध्यान रखती है. जरूरत के समय उन्हें नवाजने से पीछे नहीं हटती है.
- पार्टी के इस कदम से अखिल भारतीय स्तर पर कार्यकर्ताओं को मोटिवेट करने में बहुत मदद मिलेगी. साथ ही दूसरी पार्टियों के कल्चर पर आक्रमण करने में तेजी आएगी जहां बड़े नेता या उनके संबंधी ही बड़े पदों को प्राप्त कर पाते हैं. वहां कार्यकर्ताओं की ज्यादा हैसियत नहीं होती.
- नितिन नबीन की इस नियुक्ति को बिहार में पार्टी को मजबूती देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. भाजपा राज्य में अपने बल पर सरकार बनाने का सपना सजाकर रखे है. इस नजरिये से भी आगे इस नियुक्ति का बड़ा महत्व है. साथ ही युवा शक्ति को लीडरशिप में जगह देने की पार्टी की कवायद के तहत भी इस नियुक्ति के अपने मायने हैं.
- युवा चेहरों को आगे लाने और उन्हें बड़ी भूमिकाएं देने की बात देश की बड़ी युवा आबादी को अपने साथ जोड़ने की बड़ी मुहीम का भी हिस्सा हो सकती है. पिछले चुनावों में युवाओं ने बड़ी संख्या में पार्टी के पक्ष में मतदान किया था. अब पार्टी इसी नए वोटबैंक को अपने साथ जोड़ने के लिए कई तरह की कवायद कर रही है.
परंपरागत वोट बैंक को साधने की कवायद
भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला न सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोट बैंक सवर्णों को साधने की दिशा में बड़ा कदम है. सवर्ण भाजपा को लगातार अपना सपोर्ट देते आए हैं, इस वर्ग को इस नियुक्ति से यह संदेश दिया जा सकता है कि हम आपको भूले नहीं हैं. आपका शुक्रराना किया जा रहा है.
बंगाल और पूर्वोत्तर तक संकेत
- नितिन नबीन इस नियुक्ति से बंगाल के प्रभावशाली कायस्थ समुदाय को भी अपने पाले में लाने की कोशिश भी माना जा सकता है. नबीन कायस्थ समुदाय से आते हैं. वे इस समुदाय को भाजपा से जोड़ने का काम कर सकते हैं.
- कायस्थ समुदाय बंगाल में पारंपरिक रूप से ममता का समर्थक रहा है. बिहार और बंगाल के कायस्थ समाज के बीच सांस्कृतिक, वैचारिक और पारिवारिक रिश्ते रहे हैं.
- भाजपा यदि किसी कायस्थ चेहरे को राष्ट्रीय भूमिका देती है तो उसका सांकेतिक असर बंगाल तक जाना स्वाभाविक है. ज्योति बसु से लेकर विधानचंद्र राय तक पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रहे मुख्यमंत्रियों का संबंध कायस्थ वर्ग से रहा है.
- बिहार–बंगाल की भौगोलिक और सामाजिक नजदीकी इस रणनीति को और मजबूत बनाती है. बंगाल का भद्रलोक और बौद्धिक वर्ग परंपरागत रूप से कायस्थ समुदाय से जुड़ा रहा है.
- कायस्थ समुदाय के सबसे बड़े चेहरे के रूप में विवेकानंद और सुभाष चंद बोस का नाम लिया जा सकता है। नितिन नबीन की नियुक्ति से भाजपा को कायस्थ समुदाय को जातिगत और सांस्कृतिक संकेत देने का मौका मिलेगा.
गृहमंत्री अमित शाह से करीबी भी बड़ा कारण
नितिन नबीन की नियुक्ति का एक कारण अमित शाह से उनकी करीबी को भी माना जा सकता है. चूंकि संगठन में अमित शाह का बहुत दखल होता है तो नबीन की नियुक्ति से संगठन और सरकार का कॉर्डिनेशन बहुत सजह हो जाएगा.
रणनीतिक कामों और फैसले में आएगी तेजी
- नितिन नबीन की नियुक्ति रणनीतिक कामों और फैसलों में तेजी आएगी. उनके पक्ष में एक और प्लस पॉइंट है उनका काफी लो प्रोफाइल नेता होना.
- लो प्रोफाइल होने के कारण खासियत की वजह से वे कार्यकर्ताओं के साथ भी सहज संबंध बना पाएंगे.
- भाजपा जैसी पार्टी हमेशा से ही हाइकमांड कल्चर के खिलाफ रही है तो उस भूमिका में भी नबीन आसानी फिट हो रहे हैं.
भाजपा की नई सोशल इंजीनियरिंग
भाजपा अब सिर्फ स हिंदुत्व पर ही काम नहीं करती है बल्कि जाति-क्षेत्र और वहां किस तरह का परसेप्शन बनाया जाए. इस समीकरण पर काम कर रही है. चूंकि भाजपा पर आरोप लगता रहता है कि वह सिर्फ नार्थ इंडिया यानी कि हिन्दी हार्टलैंड की पार्टी है. पार्टी इस पर्सेप्शन को तोड़ने के लिए लिए लगातार काम कर रही है.
केवल उत्तर भारत की पार्टी नहीं भाजपा
- बिहार से भाजपा के नए कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने से यह संदेश भी जाएगा कि पार्टी केवल उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं है. नितिन नबीन कायस्थ जाति से आते हैं तो इस कदम से पार्टी को बंगाल-असम की कायस्थ जाति में सेंध लगाने का मौका मिलेगा.
- कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि यह नियुक्ति भाजपा की पूर्वोत्तर भारत के लिए बनाई जा रही स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसमें पूरे रीजन को साधने के लिए किसी कॉमन फैक्टर पर काम किया जाता है.
- इस नियुक्ति से भाजपा बिहार और बंगाल दोनों को एक ही नैरेटिव के माध्यम से जोड़ा गया है. यानी एक ही तीर से बंगाल-असम की कायस्थ जाति, क्षेत्र के पाइंट ऑफ व्यू से दोनों राज्यों के लिए कॉमन नैरेटिव और नार्थ की पार्टी वाले पर्सेप्शन को भेदने का काम किया गया है.
- छत्तीसगढ़ चुनावों के दौरान नबीन अपनी संगठन संयोजन की क्षमता का लोहा मनवा चुके हैं. जहां पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस की एकतरफा जीत की बात की जा रही थी. उन्होंने ग्रासरूट लेवल पर कार्यकर्ता को मोबलाइज करके करके चुपचाप एक ऐतिहासिक जीत भाजपा के पाले में डाली थी.
- पार्टी को उनसे यही उम्मीद बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों को लेकर भी है. नबीन को पूर्वोत्तर का भी काफी अनुभव है वे सिक्कम में भी काम कर चुके हैं.
ममता बनर्जी के मुकाबले एक सॉफ्ट चेहरा
नितिन नबीन की नियुक्ति भाजपा की पश्चिम बंगाल के लिए बनाई गई स्ट्रेटजी का एक अहम हिस्सा भी माना जा सकता है. यह नियुक्ति तृणमूल के पारंपरिक सामाजिक आधार में सेंध लगाने की कोशिश के रूप में देखी जा सकती है. नितिन नबीन का भद्र और शालीन चेहरा वहां ममता जैसी आक्रमक नेता के खिलाफ भी चुनाव प्रचार के दौरान एक भद्र विकल्प पेश कर सकता है. बंगाल में चूंकि भाजपा की सबसे बड़ी समस्या रही है, आक्रामक राजनीति का अभाव, बाहरी पार्टी की छवि होना, ममता बनर्जी जैसा कोई बड़ा और स्वीकार्य चेहरा नहीं होना. इस समस्या से निजात पाने के लिए वे नबीन के रूप में एक सॉफ्ट-स्पोकन, लंबे प्रशासनिक अनुभव वाले, लो-प्रोफाइल लेकिन कुशल संगठक नेता को ममता के राज्य में सेंध लगाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
सवाल: भाजपा ने नितिन नवीन को क्यों चुना?
जवाब: युवा जोश, संगठन कौशल और छत्तीसगढ़-सिक्किम में मिली जीत के कारण पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है.
सवाल: इस फैसले का बंगाल कनेक्शन क्या है?
जवाब: नवीन कायस्थ समाज से हैं, जिनका बंगाल में प्रभाव है। वे वहां ममता बनर्जी के सामने एक सौम्य चेहरा बन सकते हैं.
सवाल: कार्यकर्ताओं को क्या संदेश मिला?
जवाब: संदेश साफ है कि एक सामान्य कार्यकर्ता भी अपनी मेहनत से पार्टी के शीर्ष पद तक पहुंच सकता है.
सवाल: इसके पीछे की 'सोशल इंजीनियरिंग' क्या है?
जवाब: इसके जरिए सवर्ण वोट बैंक को साधा गया है और बिहार-बंगाल के बीच जातीय समीकरण बैठाया गया है.
सवाल: अमित शाह फैक्टर क्या है?
जवाब: अमित शाह के करीबी होने से सरकार और संगठन के बीच तालमेल बेहतर होगा और फैसलों में तेजी आएगी.