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एक तरफ जहां अमेरिका के साथ चल रहे टैरिफ वॉर को लेकर चिंता का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था से बेहद उत्साहजनक खबरें आ रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए भारी-भरकम टैरिफ के बावजूद, भारत में कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार न सिर्फ बनी हुई है, बल्कि और तेज हो गई है.
कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा आंकड़े इस बात का सबूत हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को झेलने के लिए मजबूत है और देश में बिजनेस का माहौल सकारात्मक बना हुआ है.
मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2025 में देश में नई कंपनियों और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) के पंजीकरण में जबरदस्त उछाल देखने को मिला.
ये आंकड़े दिखाते हैं कि देश में उद्यमिता की भावना मजबूत हो रही है और नए लोग बिजनेस की दुनिया में कदम रख रहे हैं.
इस उत्साह के पीछे दो बड़े कारण हैं:
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में 7.8% की दर से विकास किया है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज है.
सरकार लगातार कारोबारी माहौल को और बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है.
GST में सुधार: छोटे व्यवसायों की मदद के लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) में लगातार सुधार किए जा रहे हैं. जीएसटी काउंसिल की मौजूदा बैठक में भी टैक्स स्लैब को दो स्तरीय बनाने पर विचार हो रहा है, जिससे 150 से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम हो सकता है.
ये आंकड़े इस बात का भी संकेत हैं कि अमेरिकी टैरिफ के बावजूद, भारतीय उद्यमियों का अपनी अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम है. उनका फोकस सिर्फ अमेरिकी बाजार पर नहीं, बल्कि भारत के विशाल घरेलू बाजार और अन्य वैकल्पिक बाजारों पर भी है.
जवाब: कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2025 में लगभग 20,170 नई कंपनियां और 6,939 नई LLP रजिस्टर हुईं.
जवाब: राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8% रही.
जवाब: असर पड़ेगा, खासकर निर्यात पर आधारित उद्योगों पर. लेकिन, ये आंकड़े दिखाते हैं कि भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि वो इन बाहरी झटकों के असर को काफी हद तक कम कर सकती है.
जवाब: LLP का मतलब लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप है. यह बिजनेस का एक ऐसा मॉडल है जिसमें पार्टनरशिप के फायदे (आसान नियम) और कंपनी की तरह सीमित देनदारी, दोनों मिलती हैं.
जवाब: सरकार छोटे व्यवसायों की मदद के लिए GST के नियमों को लगातार सरल बना रही है. जीएसटी काउंसिल की मौजूदा बैठक में भी टैक्स की दरों को कम करने और स्लैब को बदलने पर विचार किया जा रहा है.