IBC के 10 साल: NCLT ने बदली कर्ज वसूली की तस्वीर, अब MSME तक पहुंचाने की जरूरत: Justice M.M. Kumar

जस्टिस एम.एम. कुमार ने कहा कि IBC और NCLT का पहला दशक संस्थागत निर्माण और व्यवस्था स्थापित करने का दशक था. अब अगले चरण में फोकस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने, MSME तक पहुंच बढ़ाने और समाधान व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने पर होना चाहिए. उनके मुताबिक पिछले 10 वर्षों में जो आधार तैयार हुआ है, वह आने वाले समय में भारत की वित्तीय और कारोबारी व्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
IBC के 10 साल: NCLT ने बदली कर्ज वसूली की तस्वीर, अब MSME तक पहुंचाने की जरूरत: Justice M.M. Kumar

जस्टिस एम.एम. कुमार ने कहा- NCLT और IBC ढांचे को देश की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. (फोटो: Zeebiz)

नई दिल्ली में आयोजित "IBC & NCLT @10 – Celebrating a Decade of Insolvency Reforms" कार्यक्रम में NCLT के संस्थापक अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एम. कुमार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) ने देश में कर्ज वसूली और कंपनी समाधान की व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया है.

उन्होंने कहा कि आज जिस NCLT और IBC ढांचे को देश की आर्थिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, उसकी शुरुआत बेहद सीमित संसाधनों और बुनियादी ढांचे के साथ हुई थी.

आसान नहीं था NCLT का शुरुआती सफर

जस्टिस एम.एम. कुमार ने NCLT के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा कि संस्था ने सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों के बीच काम शुरू किया था.

इसके बावजूद NCLT ने Insolvency and Bankruptcy Code को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और धीरे-धीरे देश की आर्थिक व्यवस्था में अपनी मजबूत पहचान बनाई.

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में NCLT ने केवल मामलों का निपटारा ही नहीं किया, बल्कि दिवाला समाधान की पूरी संस्कृति को बदलने में योगदान दिया.

Loan Recovery Framework हुआ मजबूत

जस्टिस कुमार ने कहा कि IBC लागू होने के बाद देश का Loan Recovery Framework पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है.

पहले किसी कंपनी के वित्तीय संकट में फंसने पर समाधान की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती थी. लेकिन अब समाधान के लिए स्पष्ट ढांचा उपलब्ध है, जिससे वित्तीय संस्थानों और कर्जदाताओं को अधिक भरोसा मिला है.

उन्होंने कहा कि इस बदलाव का असर पूरे बैंकिंग और वित्तीय तंत्र पर दिखाई दिया है.

Out-of-Court Settlement में आई तेजी

उन्होंने कहा कि IBC का एक बड़ा असर अदालतों के बाहर होने वाले समझौतों में भी दिखाई दिया है.

IBC के प्रावधानों ने कर्जदारों और कर्जदाताओं को समय रहते समाधान निकालने के लिए प्रेरित किया है. इसी वजह से बड़ी संख्या में मामले औपचारिक दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही सुलझने लगे हैं.

जस्टिस कुमार ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में लगभग ₹14 लाख करोड़ से अधिक के मामलों का Out-of-Court Settlement हुआ है. यह दर्शाता है कि IBC ने केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं बदली, बल्कि व्यवहार में भी बदलाव लाया है.

NPA कम करने में मिली मदद

उन्होंने कहा कि IBC और NCLT ने Non-Performing Assets (NPA) की समस्या को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

समयबद्ध समाधान और बेहतर रिकवरी व्यवस्था के कारण बैंकिंग प्रणाली को मजबूती मिली है. इससे वित्तीय संस्थानों का भरोसा भी बढ़ा है.

Ease of Doing Business को मिला फायदा

जस्टिस एम.एम. कुमार ने कहा कि NCLT और IBC ने भारत की Ease of Doing Business Ranking सुधारने में भी योगदान दिया है.

किसी भी निवेशक के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि यदि कोई कारोबारी विवाद या वित्तीय संकट उत्पन्न हो जाए तो उसके समाधान की स्पष्ट और भरोसेमंद व्यवस्था मौजूद हो.

IBC ने इसी भरोसे को मजबूत किया है.

MSME सेक्टर तक पहुंचाने की जरूरत

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी काफी काम बाकी है.

उनके मुताबिक Micro, Small and Medium Enterprises (MSME) के लिए Insolvency Framework को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि छोटे और मध्यम उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ऐसे में उन्हें समयबद्ध और कम लागत वाला समाधान तंत्र उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा.

Haircut पर भी उठाया सवाल

जस्टिस कुमार ने Insolvency Resolution में Haircut के आकलन को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की.

उन्होंने कहा कि Haircut की गणना करते समय केवल Compound Interest को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए. इसके बजाय Principal Amount को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए ताकि रिकवरी के वास्तविक परिणामों का बेहतर आकलन किया जा सके.

अगले दशक से उम्मीदें

जस्टिस एम.एम. कुमार ने कहा कि IBC और NCLT का पहला दशक संस्थागत निर्माण और व्यवस्था स्थापित करने का दशक था.

अब अगले चरण में फोकस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने, MSME तक पहुंच बढ़ाने और समाधान व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने पर होना चाहिए.

उनके मुताबिक पिछले 10 वर्षों में जो आधार तैयार हुआ है, वह आने वाले समय में भारत की वित्तीय और कारोबारी व्यवस्था को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

Add Zee Business as a Preferred Source