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5,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से देशभर में करीब 100 इकाइयां लगायी जाएंगी.
राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड नेफेड ने कृषि-अपशिष्ट से जैव सीएनजी बनाने के लिए 100 प्लांट लगाने की घोषणा की है. इन प्लांटों का निर्माण 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत किया जाएगा. नेफेड के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार चड्ढा ने कहा कि पहले तीन केंद्रों की स्थापना उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में की जाएगी.
उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश में गन्ने का सर्वाधिक उत्पादन होता है और वहां चीनी मिलों से निकलने वाला कचरा भारी मात्रा में उपलब्ध है.
संजीव कुमार चड्ढा ने कहा कि रिलायंस, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) और प्रौद्योगिकी सेवा उपलब्ध कराने वाली चार-पांच निजी निवेशकों के साथ पहले ही समझौते पर हस्ताक्षर किया जा चुका है. प्रारंभ में 5,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से देशभर में करीब 100 इकाइयां लगायी जाएंगी.
उन्होंने बताया कि संयंत्रों से जैव-सीएनजी खरीदने के लिए इंडियन ऑयल के साथ करार किया गया है. वह 48 रुपये प्रति किलोग्राम के दर से जैव-सीएनजी खरीदेगी.
पहला जैव सीएनजी प्लांट पुणे में
4 अगस्त, 2016 को भारत के पहले ‘जैव सीएनजी ईंधन संयंत्र’ का पुणे महाराष्ट्र में शुरू किया गया था. यह प्लांट पुणे स्थित प्रिमोव इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्थापित किया गया था. इस प्लांट में खेती के कचरे में जीवाणु शोधन से गैस पैदा की जाती है और फिर इस गैस को साफ करके कंप्रेस्ड करके गैस वाले वाहनों में इस्तेमाल किया जाता है. पेट्रोलियम ईंधन के मुकाबले सीएनजी गैस के कार्बन डाइऑक्साइड तथा अन्य प्रदूषक कम मात्रा में पैदा होते हैं और जैव सीएनजी से पेट्रोलिय ईंधन के आयात को कम करने करने में मदद मिलेगी. साथ ही प्रदूषण की समस्या का भी समाधान मिलेगा.