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IMD के मुताबिक, 16-17 मई तक मॉनसून अंडमान सागर और निकोबार तक पहुंच सकता है. (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGPT)
देश में भीषण गर्मी के बीच अब हर किसी की नजर सिर्फ एक चीज पर है- मॉनसून. और अब भारतीय मौसम विभाग (IMD) से बड़ा अपडेट आया है. मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मॉनसून तय समय से करीब 4 दिन पहले अंडमान-निकोबार पहुंच सकता है. अगर ऐसा होता है, तो ये पूरे देश में मॉनसून की एंट्री को तेज कर सकता है.
IMD का कहना है कि दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल हो रही हैं. बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम और मजबूत नमी इसकी सबसे बड़ी वजह माने जा रहे हैं.
हम यहां 2026 का पूरा Tentative Monsoon Tracker दिखा रहे हैं, जिसमें राज्यवार संभावित तारीखें, मॉनसून की चाल और IMD के ताजा संकेत शामिल हैं.
IMD के मुताबिक, 16-17 मई तक मॉनसून अंडमान सागर और निकोबार तक पहुंच सकता है. सामान्य तौर पर मॉनसून 20 मई तक अंडमान पहुंचता है. केरल में इसकी सामान्य एंट्री 1 जून मानी जाती है. यानी इस बार शुरुआत थोड़ी तेज दिखाई दे रही है.
भारत में मॉनसून की “Official Journey” अंडमान से ही शुरू मानी जाती है. अगर यहां मॉनसून जल्दी पहुंचता है, तो केरल में भी जल्दी एंट्री की संभावना बढ़ती है.
हालांकि, मौसम विशेषज्ञ यह भी कह रहे हैं कि अंडमान में जल्दी एंट्री का मतलब हमेशा पूरे भारत में जल्दी मॉनसून नहीं होता. आगे की हवाओं, अरब सागर की स्थिति और बंगाल की खाड़ी के सिस्टम पर बहुत कुछ निर्भर करेगा.
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| राज्य | संभावित तारीख |
| अंडमान-निकोबार | 16-17 मई |
| केरल | 28 मई-1 जून |
| तमिलनाडु | 1-5 जून |
| कर्नाटक | 3-7 जून |
| आंध्र प्रदेश | 5-10 जून |
| तेलंगाना | 8-12 जून |
| राज्य | संभावित तारीख |
| महाराष्ट्र | 8-12 जून |
| गोवा | 7-10 जून |
| गुजरात | 15-20 जून |
| मध्य प्रदेश | 15-22 जून |
| छत्तीसगढ़ | 13-18 जून |
| राज्य | संभावित तारीख |
| ओडिशा | 10-15 जून |
| पश्चिम बंगाल | 10-14 जून |
| बिहार | 15-20 जून |
| झारखंड | 14-18 जून |
| उत्तर प्रदेश | 20-25 जून |
| दिल्ली | 27 जून-2 जुलाई |
| पंजाब/हरियाणा | 29 जून-5 जुलाई |
| राजस्थान | 25 जून-5 जुलाई |

इस बार कई मौसमीय सिस्टम एक साथ एक्टिव हैं.
IMD के मुताबिक:
इसी वजह से मॉनसून की शुरुआती चाल तेज दिखाई दे रही है.
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यहां तस्वीर थोड़ी दिलचस्प है.
कुछ शुरुआती मॉडल:
सामान्य से कम बारिश की तरफ इशारा कर रहे हैं. IMD ने पहले “Below Normal” मानसून की आशंका जताई थी. Long Period Average का करीब 92% बारिश रहने का अनुमान है. लेकिन, एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि जून-जुलाई में बनने वाले सिस्टम तस्वीर बदल सकते हैं.
अगर मॉनसून समय से आता है तो:
लेकिन अगर मॉनसून बीच में कमजोर पड़ा, तो:
यानी सिर्फ “जल्दी आने” से ज्यादा जरूरी है- मॉनसून का लगातार एक्टिव रहना.
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इस बार एक बड़ा बदलाव भी हुआ है. IMD ने पहली बार AI आधारित मौसम मॉडल लॉन्च किए हैं, जो
यानी 2026 का मॉनसून ट्रैकिंग सिस्टम पहले से ज्यादा एडवांस होने वाला है.
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगा. दिल्ली में मॉनसून आमतौर पर 27 जून से 1 जुलाई के बीच पहुंचता है. अगर केरल में जल्दी एंट्री होती है और अरब सागर की शाखा मजबूत रहती है, तो NCR में भी 2-4 दिन पहले बारिश शुरू हो सकती है.
अभी सबसे बड़ा संकेत यही है कि मॉनसून की शुरुआत मजबूत दिखाई दे रही है. अंडमान-निकोबार में तय समय से पहले दस्तक पूरे सीजन की दिशा तय कर सकती है. हालांकि, असली तस्वीर जून के पहले हफ्ते में साफ होगी, जब मॉनसून केरल पहुंचेगा. फिलहाल, IMD की नजर बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम और अरब सागर की हवाओं पर टिकी है. अगर सब कुछ इसी तरह बना रहा, तो इस बार गर्मी से राहत जल्दी मिल सकती है.