Monsoon 2025: 16 साल बाद मानसून ने बनाया रिकॉर्ड, तय समय से 8 दिन पहले हुई झमाझम बारिश

Monsoon 2025: 16 साल बाद केरल में मानसून ने तय समय से 8 दिन पहले दस्तक दे दी है, IMD ने शनिवार को इस बात की पुष्टि की कि 2025 का मानसून सामान्य समय से पहले, यानी 24 मई को ही केरल पहुंच चुका है.
Monsoon 2025: 16 साल बाद मानसून ने बनाया रिकॉर्ड, तय समय से 8 दिन पहले हुई झमाझम बारिश

Monsoon 2025: लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने केरल में औपचारिक दस्तक दे दी है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने शनिवार को इस बात की पुष्टि की कि 2025 का मानसून सामान्य समय से पहले, यानी 24 मई को ही केरल पहुंच चुका है. आमतौर पर मानसून की शुरुआत 1 जून को होती है, लेकिन इस बार यह तय तारीख से पूरे आठ दिन पहले आ गया. गौर करने वाली बात यह है कि 2009 के बाद यह पहली बार है जब मानसून इतनी जल्दी पहुंचा है.

IMD ने पिछले सप्ताह ही अनुमान जताया था कि मानसून 27 मई के आसपास दस्तक दे सकता है, जिसमें ±4 दिन का अंतर हो सकता है. उनकी यह भविष्यवाणी लगभग सटीक साबित हुई.

कैसे होती है मानसून की भविष्यवाणी?

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मानसून की घोषणा के लिए मौसम विभाग कुछ वैज्ञानिक मानकों का पालन करता है. इनमें शामिल है — केरल और आसपास के क्षेत्रों में 14 निर्धारित मौसम केंद्रों में से कम से कम 60% केंद्रों पर लगातार दो दिन तक 2.5 मिमी या उससे अधिक बारिश दर्ज होना. इसके अलावा 925 hPa के स्तर पर पश्चिमी हवाएं 15-20 नॉट की रफ्तार से चलनी चाहिए, और 600 hPa तक उनकी गहराई होनी चाहिए. वहीं एक खास क्षेत्र में आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन (OLR) का स्तर 200 W/m² से नीचे होना चाहिए. इस बार ये सभी मानदंड पूरे होने पर मानसून की आधिकारिक घोषणा कर दी गई.

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केरल में हुई झमाझम बारिश

केरल में मानसून की दस्तक के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है. शुक्रवार से लगातार हो रही बारिश के चलते कई जिलों में जलभराव, सड़कों पर अवरोध और पेड़ गिरने जैसी घटनाएं सामने आई हैं. राज्य के राजस्व मंत्री के. राजन ने शनिवार को जानकारी दी कि प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे यात्रा से पहले मौसम और ट्रैफिक की जानकारी अवश्य लें.

केरल में मानसून की शुरुआत के साथ ही यह उत्तर दिशा की ओर धीरे-धीरे बढ़ता है और जून के अंत तक देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेता है. आमतौर पर यह मध्य जुलाई तक भारत के सभी हिस्सों में पहुंच जाता है.

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